NEET पीड़िता अनीता की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम की नहीं मिली अनुमति, सीएम थलपति विजय के प्रशासन पर भड़के उदयनिधि स्टालिन
तमिलनाडु की राजनीति में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के खिलाफ चल रहे ऐतिहासिक संघर्ष और छात्र अधिकारों को लेकर एक बार फिर भीषण सियासी संग्राम छिड़ गया है। राज्य में नीट परीक्षा की विसंगतियों और सामाजिक न्याय की लड़ाई का प्रतीक बनी अरियालुर की छात्रा एस. अनीता की पुण्यतिथि (1 सितंबर) पर आयोजित होने वाले स्मृति एवं श्रद्धांजलि कार्यक्रम को स्थानीय पुलिस और प्रशासन द्वारा अनुमति न दिए जाने पर द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। पूर्व मंत्री और डीएमके के वरिष्ठ नेता उदयनिधि स्टालिन ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (थलपति विजय) के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) सरकार पर सीधा और तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि विजय सरकार छात्रों के दर्द और बलिदान को भुलाकर केंद्र की जनविरोधी नीतियों के सामने घुटने टेक चुकी है। उदयनिधि के इस आक्रामक बयान के बाद तमिलनाडु के सियासी गलियारों में डीएमके और टीवीके के बीच तलवारें पूरी तरह खिंच गई हैं।
अनीता की पुण्यतिथि पर कार्यक्रम की इजाजत न मिलने पर गरमाई सियासत: पुलिस ने कानून-व्यवस्था का दिया हवाला
अरियालुर और चेन्नई समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में डीएमके की युवा इकाई (Youth Wing), विभिन्न छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा 1 सितंबर को एस. अनीता की बरसी पर शांतिपूर्ण श्रद्धांजलि सभा, रक्तदान शिविर और नीट विरोधी संकल्प सभाओं का आयोजन तय किया गया था। हालांकि, कार्यक्रम से ठीक पहले स्थानीय जिला प्रशासन और पुलिस महकमे ने कानून-व्यवस्था, यातायात अवरोध और सुरक्षा प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए सार्वजनिक स्थानों पर इन आयोजनों और रैलियों की औपचारिक अनुमति देने से इनकार कर दिया।
पुलिस प्रशासन के इस एकतरफा फैसले ने पूरे राज्य के छात्र और युवा संगठनों में भारी रोष पैदा कर दिया। विभिन्न स्थानों पर छात्रों और कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं। डीएमके कैडर्स ने आरोप लगाया कि एक ऐसी छात्रा जिसने तमिलनाडु के ग्रामीण और वंचित वर्ग के बच्चों के डॉक्टर बनने के सपने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी, उसकी याद में एक सामान्य श्रद्धांजलि सभा तक को रोकना राज्य सरकार की असंवेदनशीलता और तानाशाही मानसिकता को दर्शाता है।
'छात्रों की आवाज दबा रही विजय सरकार': उदयनिधि स्टालिन का सीधा और तीखा हमला
प्रशासनिक रोक की खबर सामने आते ही डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन ने सोशल मीडिया और प्रेस बयानों के जरिए मुख्यमंत्री थलपति विजय पर सीधा वार किया। उदयनिधि ने कहा कि जो लोग राजनीति में आने से पहले फिल्मों और रैलियों में सामाजिक न्याय, छात्रों के अधिकार और जनहित की बड़ी-बड़ी बातें करते थे, आज सत्ता की कुर्सी पर बैठते ही वे एक मासूम छात्रा के शहादत दिवस पर फूल चढ़ाने तक से डर रहे हैं।
उदयनिधि स्टालिन ने सवाल किया कि क्या विजय सरकार तमिलनाडु के उस साझा दर्द को भूल गई है जिसने पूरे राज्य को एक सूत्र में पिरोया था? उन्होंने आरोप लगाया कि टीवीके सरकार का यह कदम केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं है, बल्कि यह केंद्र सरकार को खुश करने और दिल्ली के इशारों पर तमिलनाडु के स्वाभिमान को कुचलने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि अन्नाद्रमुक (AIADMK) के शासनकाल में जिस तरह नीट पर जनभावनाओं को दबाया गया था, आज विजय सरकार भी उसी नक्शेकदम पर चलकर खुद को भाजपा की 'बी-टीम' साबित करने में जुटी है। उदयनिधि ने ऐलान किया कि डीएमके किसी भी पुलिसिया दबाव के आगे नहीं झुकेगी और राज्य भर में अनीता के संघर्ष को याद करते हुए नीट के खिलाफ अपनी लड़ाई को और तेज करेगी।
तमिलनाडु में नीट विरोधी आंदोलन की पहचान: जानिए कौन थीं एस. अनीता और क्या था उनका संघर्ष
एस. अनीता तमिलनाडु के अरियालुर जिले के एक बेहद गरीब दिहाड़ी मजदूर की बेटी थीं। उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद तमिलनाडु स्टेट बोर्ड की 12वीं कक्षा में 1200 में से 1176 अंक हासिल किए थे और कट-ऑफ के आधार पर उन्हें राज्य के शीर्ष सरकारी मेडिकल कॉलेज में आसानी से एमबीबीएस की सीट मिल सकती थी। लेकिन केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर नीट परीक्षा को अनिवार्य किए जाने के कारण उनकी योग्यता और मेहनत पर पानी फिर गया, क्योंकि उस समय राज्य बोर्ड के पाठ्यक्रम और सीबीएसई आधारित नीट के सिलेबस में भारी अंतर था।
अनीता ने हार नहीं मानी और ग्रामीण व गरीब पृष्ठभूमि के छात्रों के अधिकारों के लिए सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ी। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय से राहत न मिलने और मेडिकल में दाखिला न हो पाने के गहरे मानसिक आघात के चलते 1 सितंबर 2017 को उन्होंने महज 17 वर्ष की उम्र में आत्महत्या कर ली थी। उनकी शहादत ने पूरे तमिलनाडु में नीट के खिलाफ एक विशाल जन-आंदोलन को जन्म दिया और वे राज्य में मेडिकल शिक्षा में सामाजिक न्याय और राज्य के अधिकारों की लड़ाई का सबसे बड़ा प्रतीक बन गईं। हर साल 1 सितंबर को राज्य भर में उनके बलिदान को याद किया जाता है।
टीवीके सरकार का प्रशासनिक रुख: 'शांति और सुरक्षा हमारी प्राथमिकता'
डीएमके और विपक्षी दलों के चौतरफा हमलों के बीच तमिलनाडु सरकार के मंत्रियों और पुलिस प्रशासन ने अपने फैसले का बचाव किया है। सरकारी सूत्रों और प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सरकार नीट परीक्षा के खिलाफ राज्य की पुरानी प्रतिबद्धता पर पूरी तरह कायम है और अनीता के प्रति पूरे राज्य के मन में गहरा सम्मान है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि हाल के दिनों में संवेदनशील इलाकों में कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा विरोध प्रदर्शनों की आड़ में सांप्रदायिक और राजनीतिक तनाव फैलाने की खुफिया सूचनाएं मिली थीं। इसके अतिरिक्त, मुख्य मार्गों पर आम जनता और स्कूली बच्चों के आवागमन में बाधा न पहुंचे, केवल इसी प्रशासनिक सावधानी के चलते संवेदनशील सार्वजनिक स्थलों पर बड़े जमावड़े की अनुमति नहीं दी गई थी। सरकार का कहना है कि निजी परिसरों या पार्टी कार्यालयों के भीतर श्रद्धांजलि देने पर कोई रोक नहीं थी, लेकिन विपक्ष इस पूरे मामले को बेवजह राजनीतिक रंग देकर अपनी खोई हुई सियासी जमीन तलाशने की कोशिश कर रहा है।
डीएमके बनाम टीवीके: 2026-2028 के सियासी रण में नीट बना सबसे बड़ा अखाड़ा
तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही द्रमुक (DMK) लगातार नवगठित टीवीके सरकार की घेराबंदी करने का मौका तलाश रही है। नीट का मुद्दा तमिलनाडु की राजनीति में हमेशा से सबसे संवेदनशील और भावनात्मक विषय रहा है, जिस पर कोई भी दल बैकफुट पर नहीं दिखना चाहता। डीएमके का आरोप है कि विजय सरकार नीट से छूट (NEET Exemption Bill) दिलाने के लिए केंद्र पर पर्याप्त दबाव बनाने में पूरी तरह नाकाम रही है।
वहीं दूसरी ओर, थलपति विजय के रणनीतिकारों का मानना है कि डीएमके जानबूझकर छात्र राजनीति और भावनात्मक मुद्दों को भड़काकर नई सरकार के प्रशासनिक कामकाज में बाधा डालना चाहती है। अनीता की पुण्यतिथि पर पैदा हुआ यह ताजा गतिरोध यह साफ करता है कि आने वाले दिनों में तमिलनाडु की राजनीति में नीट का मुद्दा, राज्य की स्वायत्तता और सामाजिक न्याय की बहस और अधिक उग्र रूप धारण करने वाली है। उदयनिधि स्टालिन द्वारा खोला गया यह नया मोर्चा राज्य की भावी चुनावी बिसात को तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।