पैसा कहीं नहीं जाएगा, भगवान स्वयं ढूंढ लेंगे! राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर बाबरी के पूर्व पैरोकार इकबाल अंसारी का चौंकाने वाला बयान

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अयोध्या। अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी और चोरी का मामला इस समय देश की सियासत और धार्मिक गलियारों में सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। इस हाई-प्रोफाइल विवाद के बीच, अब राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद के पूर्व पैरोकार रहे इकबाल अंसारी का एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा बयान सामने आया है। इकबाल अंसारी ने इस पूरे प्रकरण पर अपनी राय रखते हुए मामले की निष्पक्ष और पूरी तरह से पारदर्शी जांच की मांग की है।

इकबाल अंसारी ने भगवान पर अटूट विश्वास जताते हुए एक बेहद दिलचस्प बात कही। उन्होंने कहा, "भगवान का पैसा कहीं नहीं जाएगा, भगवान स्वयं अपने पैसे को ढूंढ लेंगे।"

योगी सरकार की SIT पर जताया भरोसा, कड़ी कार्रवाई की मांग

इकबाल अंसारी ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा गठित की गई विशेष जांच टीम (SIT) पर पूरा भरोसा जताया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस मामले की जांच पूरी ईमानदारी, निष्पक्षता और बिना किसी दबाव के होनी चाहिए। अंसारी ने मांग की कि जांच के दौरान जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए, चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो, उसके खिलाफ कानून के दायरे में सबसे कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरे देश की तरह उनकी भी यही इच्छा है कि इस कथित घोटाले का सच सबके सामने आए।

"यह केवल पैसे का नहीं, करोड़ों भक्तों की आस्था का मामला है"

राम मंदिर में चढ़ने वाले दान के महत्व को रेखांकित करते हुए इकबाल अंसारी ने कहा कि यह विवाद केवल रुपयों या धनराशि की गिनती तक सीमित नहीं है। यह सीधे तौर पर देश और दुनिया के करोड़ों राम भक्तों की अटूट आस्था और अटूट विश्वास से जुड़ा हुआ बेहद संवेदनशील मामला है। देशभर के अमीर-गरीब लोगों ने राम मंदिर निर्माण के लिए अपनी गाढ़ी कमाई से, अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार आर्थिक सहयोग दिया है। इसलिए, प्रभु के चरणों में अर्पित किए गए चढ़ावे के एक-एक रुपये का सही हिसाब होना और उसकी जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है।

पता लगाया जाए कि कथित रूप से धन कहां गया और किसने छिपाया?

अंसारी ने जांच के मुख्य बिंदुओं पर जोर देते हुए कहा कि यदि चढ़ावे की राशि में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी, अनियमितता या चोरी हुई है, तो उसकी तह तक जाना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों को यह स्पष्ट रूप से पता लगाना चाहिए कि कथित रूप से गायब हुआ धन आखिर गया कहां? उसे किसने और किस मकसद से छिपाया? और इस पूरी हेराफेरी की प्रक्रिया में किस-किस स्तर के अधिकारी या कर्मचारी की क्या भूमिका रही। रामनगरी की साख के लिए सच्चाई का बाहर आना अनिवार्य है।

ट्रस्ट के अनुरोध पर बनी 3 सदस्यीय SIT ने संभाली कमान

आपको बता दें कि यह विवाद तब और गहरा गया जब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने खुद सोशल मीडिया पर उड़ रही तमाम तरह की चर्चाओं और आरोपों को गंभीरता से लिया। ट्रस्ट ने मामले की निष्पक्ष जांच और दूध का दूध, पानी का पानी करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का लिखित अनुरोध किया था। ट्रस्ट का मानना है कि यह विवाद राम मंदिर की छवि और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचाने की एक गहरी साजिश भी हो सकता है, जिसका पर्दाफाश होना जरूरी है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से तीन बेहद वरिष्ठ अधिकारियों की एसआईटी का गठन कर दिया है। इस टीम में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज किरण एस. और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन कुमार को शामिल किया गया है। सोमवार को इस विशेष टीम ने अयोध्या पहुंचकर राम मंदिर के 'गणना कक्ष' से अपनी गहन छानबीन और कागजी पड़ताल शुरू कर दी है।