BREAKING:
October 09 2026 07:15 pm

लखनऊ में बाढ़ का भीषण संकट: पुलिस मुख्यालय के पास के इलाके पर मंडराया खतरा

Post

राजधानी लखनऊ में मूसलाधार बारिश और गोमती नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर ने अब रिहायशी और वीआईपी इलाकों की चौखट पर दस्तक दे दी है। तटीय इलाकों में पानी भरने के बाद अब सबसे डराने वाली खबर सिग्नेचर बिल्डिंग यानी उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय (DGP मुख्यालय) के नजदीकी इलाके से सामने आ रही है। गोमती नदी के तेज बहाव और लगातार दबाव के कारण पुलिस मुख्यालय और गोमती नगर विस्तार से सटे मुख्य सुरक्षा बांध (तटबंध) में कई जगह गहरी दरारें और रिसाव (सीपेज) देखा गया है। बांध की मिट्टी धंसने और दीवारों पर दरारें उभरने की सूचना मिलते ही स्थानीय निवासियों में भारी दहशत फैल गई है। यदि यह सुरक्षा तटबंध टूटता है, तो पुलिस मुख्यालय के आसपास का पूरा इलाका, गोमती नगर विस्तार के कई सेक्टर्स और शहीद पथ से जुड़े निचले इलाके सीधे जलमग्न हो सकते हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन, नगर निगम, सिंचाई विभाग और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया है।

बांध में दिखीं दरारें: रिसाव रोकने के लिए युद्धस्तर पर काम शुरू

प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय निवासियों के अनुसार, शुक्रवार सुबह गोमती नदी के तेज दबाव के चलते बांध के एक हिस्से से अचानक पानी रिसता हुआ देखा गया। जब पास जाकर मुआयना किया गया, तो पाया गया कि बांध के ऊपरी और अंदरूनी हिस्से में लंबी दरारें आ चुकी हैं।

सूचना मिलते ही सिंचाई विभाग और लोक निर्माण विभाग के आला अधिकारी तकनीकी अमले के साथ मौके पर पहुंचे। पानी के बढ़ते दबाव को थामने और दरारों को भरने के लिए मौके पर भारी संख्या में बालू की बोरियां, मिट्टी और बोल्डर मंगाए गए हैं। मजदूर और बचाव कर्मी युद्धस्तर पर बांध के कमजोर हिस्सों को मजबूत करने (सैंडबैगिंग) में जुटे हुए हैं ताकि पानी का बहाव बांध को पूरी तरह काट न दे।

वीआईपी इलाकों और रिहायशी कॉलोनियों पर सबसे बड़ा खतरा

पुलिस मुख्यालय के पास मौजूद यह बांध केवल एक सुरक्षा दीवार नहीं है, बल्कि यह गोमती नगर विस्तार, चक गंजरिया (CG सिटी), मातृ एवं शिशु अस्पताल और इकाना स्टेडियम क्षेत्र के बीच एक रक्षा प्राचीर का काम करता है।

अगर बांध में आई ये दरारें समय रहते काबू में नहीं की गईं, तो सबसे बड़ा खतरा गोमती नगर विस्तार की बहुमंजिला सोसायटियों, पुलिस मुख्यालय के बेसमेंट और आसपास के गांवों पर पड़ेगा। निचले इलाकों में रहने वाले सैकड़ों परिवारों को पानी के अचानक घुसने का डर सता रहा है। कई रिहायशी सोसायटियों में ग्राउंड फ्लोर पर रहने वाले लोगों ने एहतियातन अपना कीमती सामान और गाड़ियां सुरक्षित व ऊंचे स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है।

प्रशासन ने जारी किया हाई अलर्ट, SDRF और नावों की तैनाती

हालात की नजाकत को भांपते हुए लखनऊ जिला प्रशासन ने पूरे इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है।

एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की मोटरबोट्स को स्टैंडबाय मोड पर तैनात कर दिया गया है। पुलिस मुख्यालय के सुरक्षा अधिकारियों ने भी अपने स्तर पर इमरजेंसी प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिया है ताकि किसी भी अनहोनी की स्थिति में जरूरी फाइलों, सर्वर रूम और वाहनों को सुरक्षित किया जा सके। नगर निगम की ओर से इलाके में बड़े पंपिंग सेट्स लगाए जा रहे हैं ताकि यदि थोड़ा-बहुत पानी रिसकर बाहर आता है तो उसे तुरंत वापस नदी या ड्रेनेज में धकेला जा सके।

गोमती के जलस्तर पर लगातार निगरानी, जनता से सतर्क रहने की अपील

सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पहाड़ों और तराई क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश तथा पीछे से छोड़े गए पानी के चलते गोमती नदी खतरे के निशान के बेहद करीब बह रही है।

अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे बांध के किनारे अनावश्यक भीड़ न लगाएं, सेल्फी लेने या वीडियो बनाने से बचें और किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें। कंट्रोल रूम 24 घंटे नदी के जलस्तर और बांध की स्थिरता पर नजर बनाए हुए है। प्रशासन का दावा है कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और मरम्मत का कार्य तेज गति से चल रहा है, लेकिन यदि बारिश दोबारा तेज होती है तो राजधानी के इस प्रमुख हिस्से के लिए अगले 24 से 48 घंटे बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं।