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October 09 2026 07:17 pm

गौतम गंभीर के कार्यकाल में भारतीय टीम में क्यों दिख रहा है उतार-चढ़ाव?

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नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच के रूप में पदभार संभालने के बाद से गौतम गंभीर का कार्यकाल लगातार चर्चा और विश्लेषण के केंद्र में बना हुआ है। जहां टीम इंडिया ने सीमित ओवरों के क्रिकेट में कुछ धमाकेदार जीतें दर्ज की हैं, वहीं टेस्ट और वनडे क्रिकेट में अप्रत्याशित हार और प्रदर्शन में आए उतार-चढ़ाव ने क्रिकेट विशेषज्ञों को मंथन करने पर मजबूर कर दिया है। इसी बीच ऑस्ट्रेलिया के पूर्व स्टार ऑलराउंडर और दिग्गज क्रिकेटर शेन वॉटसन ने भारतीय टीम के हालिया अस्थिर प्रदर्शन और गौतम गंभीर की कोचिंग शैली को लेकर बड़ा बयान दिया है। वॉटसन ने स्पष्ट किया है कि जब भी किसी राष्ट्रीय टीम का नेतृत्व नए कोच के हाथों में जाता है, तो इस तरह का उतार-चढ़ाव स्वाभाविक होता है और इसके पीछे गंभीर की कार्यप्रणाली के साथ-साथ ड्रेसिंग रूम का बदलाव भी एक बड़ी वजह है।

नए कोच की कार्यशैली और खिलाड़ियों का तालमेल

शेन वॉटसन के अनुसार, गौतम गंभीर एक बेहद आक्रामक, स्पष्टवादी और प्रतिस्पर्धी मानसिकता वाले व्यक्तित्व हैं, जो उनकी कोचिंग रणनीति में भी साफ झलकता है।

वॉटसन ने कहा कि जब राहुल द्रविड़ जैसे शांत और धैर्यवान कोच के बाद गंभीर जैसे मुखर और आक्रामक दृष्टिकोण वाले कोच की एंट्री होती है, तो खिलाड़ियों को उस नए माहौल में पूरी तरह ढलने में वक्त लगता है। टीम के सीनियर और युवा खिलाड़ियों को यह समझने में समय लगता है कि नया कोच उनसे मैदान पर किस तरह के जोखिम और रवैये की उम्मीद कर रहा है। वॉटसन ने रेखांकित किया कि गंभीर अपने खिलाड़ियों से 100 प्रतिशत निर्भीक क्रिकेट की मांग करते हैं, और इस प्रक्रिया में कभी-कभी टीम को अप्रत्याशित झटके भी लगते हैं।

भारतीय क्रिकेट में ट्रांजिशन का मुश्किल दौर

वॉटसन ने यह भी रेखांकित किया कि इस उतार-चढ़ाव के लिए केवल गौतम गंभीर को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा, क्योंकि भारतीय टीम इस समय एक बड़े संक्रमण काल (Transition Phase) से गुजर रही है:

सीनियर खिलाड़ियों की जगह युवाओं की एंट्री: टी20 अंतरराष्ट्रीय से दिग्गजों के हटने के बाद नए खिलाड़ियों को बड़े मंच पर स्थापित किया जा रहा है।

लगातार बदलते संयोजन: वर्कलोड मैनेजमेंट और चोटों के चलते तीनों प्रारूपों में स्थिर प्लेइंग इलेवन खिलाना किसी भी कोच के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

विदेशी पिचों पर अनुकूलन: भारतीय बल्लेबाजों को विदेशी परिस्थितियों और स्पिन के खिलाफ नए सिरे से रणनीति बनाने की जरूरत है, जिसमें तालमेल बैठने में वक्त लगता है।

'गंभीर को समय देना जरूरी': वॉटसन का समर्थन

ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज ने जोर देकर कहा कि गंभीर की क्षमता पर किसी को संदेह नहीं होना चाहिए, क्योंकि वे कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) और लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) जैसी आईपीएल टीमों में अपनी सफल रणनीतिक सोच का लोहा मनवा चुके हैं।

वॉटसन का मानना है कि गंभीर के पास ड्रेसिंग रूम में कड़ा अनुशासन और जीत की भूख जगाने का हुनर है। जैसे-जैसे भारतीय खिलाड़ी गंभीर के विजन के साथ सहज होंगे, टीम के प्रदर्शन में निरंतरता (Consistency) लौट आएगी। आगामी बड़ी टेस्ट सीरीजों और आईसीसी टूर्नामेंटों से पहले यह शुरुआती हिचकोले टीम को मजबूत बनाने में मददगार साबित होंगे।