अडानी ग्रुप की कंपनियों ने 3 महीने में गंवाए ₹2.66 लाख करोड़: भारी बिकवाली के भंवर में फंसे शेयर
मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ महीनों से जारी उतार-चढ़ाव और लार्ज-कैप शेयरों में मुनाफावसूली का सबसे तगड़ा असर देश के प्रमुख कारोबारी समूह अडानी ग्रुप (Adani Group) पर देखने को मिला है। एक्सचेंज आंकड़ों और मार्केट रिपोर्टों के अनुसार, बीते तीन महीनों के दौरान अडानी ग्रुप की सभी लिस्टेड कंपनियों के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन (Mcap) में लगभग ₹2.66 लाख करोड़ की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस दौरान समूह की प्रमुख फ्लैगशिप कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज से लेकर ग्रीन एनर्जी, पावर, सीमेंट और मीडिया सेक्टर की कंपनियों के शेयरों में 13% से लेकर 23% तक की तेज गिरावट आई है। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यह बिकवाली केवल घरेलू कारणों से नहीं, बल्कि वैश्विक पूंजी प्रवाह और बड़े संस्थागत निवेशकों के रणनीतिक फैसलों का सीधा नतीजा है।
किस कंपनी में कितनी गिरावट? देखें शेयरों का हाल
बीते तीन महीनों में समूह की लगभग सभी प्रमुख कंपनियों के शेयरों में निवेशकों ने मुनाफावसूली और बिकवाली की राह पकड़ी:
अडानी एंटरप्राइजेज (Adani Enterprises): समूह की प्रमुख कंपनी के शेयर में पिछले 3 महीने के दौरान करीब 15.89% की गिरावट दर्ज की गई है।
अडानी ग्रीन व एनर्जी सॉल्यूशंस: अडानी ग्रीन एनर्जी और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस के शेयर करीब 20% से 21% तक टूटे हैं।
सीमेंट सेक्टर (ACC व अंबुजा): अंबुजा सीमेंट्स और एसीसी के शेयरों के दाम में 16% से 20% की कमजोरी देखी गई।
अडानी पावर व एनडीटीवी: अडानी पावर लगभग 13% और एनडीटीवी के शेयर करीब 23% तक लुढ़क गए।
हालांकि, शेयरों में आई इस गिरावट के बावजूद चेयरमैन गौतम अडानी की निजी नेटवर्थ व्यापक स्तर पर 97 बिलियन डॉलर से 120 बिलियन डॉलर की रेंज के बीच स्थिर बनी हुई है।
अडानी ग्रुप के शेयरों में बिकवाली के 4 प्रमुख कारण
1. GQG पार्टनर्स द्वारा हिस्सेदारी घटाना
हिंडनबर्ग रिपोर्ट के संकट के समय जब अडानी ग्रुप के शेयर रिकॉर्ड निचले स्तर पर थे, तब अमेरिकी निवेश फर्म जीक्यूजी पार्टनर्स (GQG Partners) ने समूह की कंपनियों में भारी निवेश कर बाजार में विश्वास लौटाया था। लेकिन हालिया तिमाहियों में यह संस्थागत निवेशक धीरे-धीरे अपनी हिस्सेदारी घटा रहा है। जून-सितंबर तिमाही के दौरान जीक्यूजी पार्टनर्स ने अडानी पावर, अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पोर्ट्स और अडानी ग्रीन में शेयर बेचकर मुनाफा कमाया है। एक बड़े एंकर इन्वेस्टर द्वारा शेयर बेचे जाने का सीधा नकारात्मक असर बाजार के सेंटिमेंट पर पड़ा।
2. एफपीआई (FPI) का आउटफ्लो और ग्लोबल एआई बूम
इस साल वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी टेक कंपनियों में भारी निवेश आ रहा है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) पारंपरिक इंफ्रास्ट्रक्चर और भारतीय लार्ज-कैप कंपनियों से पैसा निकालकर अमेरिका और चीन की टेक कंपनियों में लगा रहे हैं। भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की इस लगातार निकासी की सीधी चपेट में अडानी समूह के हाई-बीटा शेयर आ गए।
3. बॉन्ड यील्ड में तेजी और भारी कर्ज वाली कंपनियों पर दबाव
वैश्विक स्तर पर बॉन्ड मार्केट में उछाल देखने को मिल रहा है और बॉन्ड यील्ड ऊंची बनी हुई है। पूंजी-सघन (Capital-Intensive) और बुनियादी ढांचा क्षेत्र की कंपनियों के लिए बॉन्ड यील्ड में तेजी का मतलब है भविष्य में कर्ज लेने की लागत (Borrowing Cost) का बढ़ना। कर्ज पर अधिक ब्याज चुकाने की आशंका से कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव आता है, जिससे बाजार सतर्क हो गया।
4. घरेलू बाजार में लार्ज-कैप और हाई वैल्यूएशन पर करेक्शन
निफ्टी और सेंसेक्स के रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद घरेलू म्यूचुअल फंड्स और खुदरा निवेशक अत्यधिक वैल्यूएशन वाले शेयरों से हटकर डिफेंसिव सेक्टर्स (जैसे आईटी और फार्मा) की ओर शिफ्ट हो रहे हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के शेयरों में पहले आए भारी उछाल के बाद यह एक स्वाभाविक तकनीकी करेक्शन भी माना जा रहा है।
'शोर पर नहीं, एसेट्स पर ध्यान दें': अडानी ग्रुप का जवाब
ग्रुप शेयरों में मची इस उथल-पुथल के बीच अडानी समूह के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) जुगेशिंदर रॉबी सिंह ने निवेशकों को आश्वस्त करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि बाजार का मिजाज अल्पकालिक (Ephemeral) होता है, जबकि इंफ्रास्ट्रक्चर पत्थर की तरह टिकाऊ और शाश्वत होता है। उन्होंने कहा, ‘जब भीड़ स्क्रीन पर टिकर के शोर पर प्रतिक्रिया दे रही होती है, तब भी हमारी बुनियादी परिसंपत्तियां जमीन पर मजबूती और सच्चाई के साथ टिकी रहती हैं। अंत में ठोस परिसंपत्तियां हमेशा सट्टेबाजी से ज्यादा टिकती हैं। सटोरियों की घबराहट के बजाय हमारे एसेट्स को देखें।’