रजत पाटीदार के बैक-टू-बैक अर्धशतक भी नहीं आए काम: बाकी बल्लेबाजों ने टेके घुटने
मध्यक्रम के भरोसेमंद बल्लेबाज रजत पाटीदार के शानदार फॉर्म और जुझारू बल्लेबाजी के बावजूद भारत 'ए' को ऑस्ट्रेलिया 'ए' के खिलाफ निराशाजनक हार का सामना करना पड़ा है। पाटीदार ने मुश्किल परिस्थितियों में लगातार दूसरी पारी में शानदार अर्धशतक जमाकर एक छोर संभाले रखा, लेकिन दूसरे छोर से किसी भी प्रमुख बल्लेबाज का ठोस समर्थन न मिलने के कारण भारत 'ए' मुकाबला और साथ ही अनाधिकारिक टेस्ट सीरीज गंवा बैठा। तेज और उछाल भरी पिचों पर भारतीय शीर्ष क्रम और निचले क्रम के गैर-जिम्मेदाराना शॉट सेलेक्शन ने टीम की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
रजत पाटीदार की जुझारू पारी: अकेले दम पर संभाला मोर्चा
कठिन विदेशी परिस्थितियों और सटीक ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाजी आक्रमण के सामने जब भारतीय टीम के स्थापित बल्लेबाज एक के बाद एक पवेलियन लौट रहे थे, तब रजत पाटीदार ने अपनी तकनीक और धैर्य का परिचय दिया।
पाटीदार ने क्रीज पर समय बिताते हुए अनुशासित शॉट खेले और ढीली गेंदों को सीमा रेखा के पार पहुंचाया। बैक-टू-बैक फिफ्टी जड़कर उन्होंने चयनकर्ताओं को अपनी लाल गेंद (रेड बॉल) की फॉर्म का मजबूत प्रमाण दिया। हालांकि, जैसे ही पाटीदार का विकेट गिरा, भारतीय पारी ताश के पत्तों की तरह ढह गई और टीम बड़ा स्कोर खड़ा करने से चूक गई।
फ्लॉप रहा शीर्ष क्रम और मध्यक्रम: नहीं मिला पाटीदार का साथ
इस पूरी सीरीज में भारत 'ए' की सबसे बड़ी कमजोरी साझेदारियों का अभाव रही:
ओपनर्स की नाकामी: नई गेंद के सामने भारतीय सलामी जोड़ी मजबूत शुरुआत दिलाने में नाकाम रही, जिससे मध्यक्रम पर लगातार दबाव बना रहा।
मिडिल ऑर्डर का पतन: पाटीदार के अलावा मध्यक्रम का कोई भी बल्लेबाज अर्धशतकीय साझेदारी तक नहीं निभा सका। सेट होने के बाद बल्लेबाजों ने खराब शॉट खेलकर अपने विकेट गंवाए।
टेल-एंडर्स का सरेंडर: निचले क्रम के बल्लेबाज भी ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाजों की उछाल और गति के सामने ज्यादा देर टिक नहीं सके, जिसके चलते भारत 'ए' विरोधी टीम को चुनौतीपूर्ण लक्ष्य देने में विफल रहा।
ऑस्ट्रेलिया 'ए' ने भुनाए मौके, सीरीज पर किया कब्जा
ऑस्ट्रेलिया 'ए' के गेंदबाजों ने कसी हुई लाइन-लेंथ और आक्रामक फील्डिंग के दम पर भारतीय बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का कोई मौका नहीं दिया। पहली पारी में मिली बढ़त और दूसरी पारी में संयमित बल्लेबाजी के दम पर मेजबान टीम ने लक्ष्य को आसानी से हासिल कर सीरीज अपने नाम कर ली।
भारतीय टीम के लिए पाटीदार की फॉर्म इस दौरे का सबसे बड़ा सकारात्मक पहलू रही, लेकिन बाकी बल्लेबाजों की विफलता ने आगामी अंतरराष्ट्रीय दौरों से पहले टीम प्रबंधन के सामने प्लेइंग इलेवन के संतुलन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।