3 साल बाद आया 'परमा एकादशी' का दुर्लभ संयोग, जानिए जून में कब रखा जाएगा यह व्रत और इसके बाद कब आएगी निर्जला एकादशी

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Parma And Nirjala Ekadashi 2026 Date: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है, लेकिन जब साल में अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) लगता है, तो इन व्रतों का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। साल 2026 का जून महीना उन सभी विष्णु भक्तों के लिए बेहद पवित्र और खास होने जा रहा है जो एकादशी का उपवास रखते हैं। इस महीने अधिकमास की दूसरी यानी शुक्ल पक्ष की 'परमा एकादशी' और सबसे कठिन माना जाने वाला 'निर्जला एकादशी' का व्रत एक ही महीने के अंतराल में आने वाला है।

यदि आप भी एकादशी व्रत की सही तारीखों और इसके महत्व को लेकर असमंजस में हैं, तो यह रिपोर्ट आपके काम की है। आइए जानते हैं कि जून 2026 में पुरुषोत्तम मास की परमा एकादशी और ज्येष्ठ मास की निर्जला एकादशी कब रखी जाएगी और भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को इस व्रत के बारे में क्या बताया था।

स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को बताया था परमा एकादशी का महत्व

शास्त्रों के अनुसार, अधिकमास को भगवान विष्णु ने अपना ही नाम 'पुरुषोत्तम' दिया है, इसलिए इस महीने में आने वाली एकादशी को पुरुषोत्तमी एकादशी या परमा एकादशी भी कहते हैं। महाभारत काल में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को इस व्रत की महिमा का वर्णन करते हुए बताया था कि यह एकादशी जीवन से दरिद्रता का नाश करने वाली और ऐश्वर्य देने वाली है।

अधिकमास की दो एकादशियों में से पहली पद्मिनी एकादशी होती है और दूसरी को 'परमा' या 'पद्मा' एकादशी कहा जाता है। इस दिन विधि-विधान से पुष्प, धूप, नैवेद्य और फल आदि के द्वारा भगवान पुरुषोत्तम (श्रीहरि) की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोवांछित कामनाएं पूरी होती हैं।

कलयुग में भव-बंधन से मुक्त करता है एकादशी का व्रत

पद्मपुराण में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि कलयुग में केवल एकादशी का व्रत ही ऐसा साधन है जो मनुष्य को भव-बंधन और सांसारिक कष्टों से मुक्त कर मोक्ष दिला सकता है। शास्त्रों के अनुसार, एकादशी चाहे शुक्ल पक्ष की हो या कृष्ण पक्ष की, इसका नियमपूर्वक पालन जरूर करना चाहिए।

विद्वानों का मानना है कि एकादशी व्रत चाहे रविवार के दिन पड़े, किसी संक्रांति के दिन हो या किसी अन्य बड़े पर्व के दिन—भगवान विष्णु के प्रिय भक्तों को इसका त्याग कभी नहीं करना चाहिए। यह व्रत हर परिस्थिति में कल्याणकारी और समस्त पापों का नाश करने वाला माना गया है।

जानिए जून 2026 में कब है परमा एकादशी? नोट करें सही शुभ मुहूर्त

इस साल अधिकमास की परमा एकादशी का व्रत 11 जून 2026, दिन गुरुवार को रखा जाएगा। गुरुवार का दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है, ऐसे में गुरुवार के दिन ही पुरुषोत्तम मास की एकादशी का आना सोने पर सुहागा माना जा रहा है।

एकादशी तिथि का प्रारंभ: 10 जून 2026 को रात 12:58 बजे से।

एकादशी तिथि का समापन: 11 जून 2026 को रात 10:37 बजे पर।

उदयातिथि के नियमानुसार, व्रत 11 जून को ही रखना शास्त्र सम्मत होगा।

परमा एकादशी के बाद कब आएगी महापुण्यदायी निर्जला एकादशी?

परमा एकादशी का व्रत पूरा होने के ठीक बाद ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की मुख्य एकादशी आएगी, जिसे हम निर्जला एकादशी या भीमसेनी एकादशी के नाम से जानते हैं। साल 2026 में निर्जला एकादशी का महाव्रत 25 जून 2026 को रखा जाएगा।

इस व्रत की महिमा इतनी बड़ी है कि जो श्रद्धालु पूरे साल की २४ एकादशियों का व्रत नहीं रख पाते, वे यदि पूरी श्रद्धा के साथ बिना जल ग्रहण किए (निर्जल रहकर) इस एक एकादशी का उपवास कर लें, तो उन्हें साल की सभी एकादशियों का पुण्य फल एक साथ मिल जाता है। यह व्रत सभी प्रकार के मानसिक और शारीरिक पापों को धोकर जीवन में सुख-समृद्धि लाता है।