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May 14 2026 10:40 pm

बंगाल में सियासी घमासान 'इस्तीफा नहीं दूंगी', ममता बनर्जी के इस अड़ियल रुख ने पैदा किया संवैधानिक संकट

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India News Live, Digital Desk: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने पूरे देश को चौंका दिया है, लेकिन असली ड्रामा तो अब शुरू हुआ है। 15 साल तक बंगाल की सत्ता पर राज करने वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने चुनाव में हार के बावजूद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया है। ममता बनर्जी के इस तेवर ने राज्य में एक अभूतपूर्व संवैधानिक संकट (Constitutional Crisis) की स्थिति पैदा कर दी है।

'नैतिक रूप से हम जीते, इस्तीफा क्यों दूं?'

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी बेहद हमलावर मूड में नजर आईं। उन्होंने चुनाव नतीजों को 'जनादेश' मानने से इनकार करते हुए इसे एक बड़ी 'साजिश' करार दिया। उन्होंने कहा, "इस्तीफा देने का सवाल ही पैदा नहीं होता। हम चुनाव हारे नहीं हैं, बल्कि हमारी 100 से ज्यादा सीटें जबरदस्ती लूटी गई हैं। यह जीत नैतिक रूप से हमारी है।" उन्होंने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए उसे 'विलेन' बताया और कहा कि आयोग ने बीजेपी के एजेंट के रूप में काम किया है।

राज्यपाल के पास क्या हैं विकल्प?

ममता बनर्जी के राजभवन न जाने और इस्तीफा न देने के फैसले ने कानूनी विशेषज्ञों को भी चर्चा में डाल दिया है। संविधान विशेषज्ञों के अनुसार, भले ही ममता बनर्जी इस्तीफा न दें, लेकिन वे सत्ता में बनी नहीं रह सकतीं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत, मुख्यमंत्री राज्यपाल के 'प्रसादपर्यंत' (Pleasure of the Governor) पद पर रहता है।

जैसे ही यह स्पष्ट हो जाता है कि वर्तमान मुख्यमंत्री के पास बहुमत नहीं है, राज्यपाल उन्हें पद से बर्खास्त करने और जीतने वाली पार्टी के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने का अधिकार रखते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ममता के इस्तीफा न देने से सरकार गठन की प्रक्रिया नहीं रुकेगी; राज्यपाल आधिकारिक आदेश जारी कर उन्हें पदमुक्त कर सकते हैं।

ईवीएम और चुनाव आयोग पर उठाए बड़े सवाल

ममता बनर्जी ने अपनी हार को स्वीकार करने के बजाय तकनीकी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने ईवीएम की बैटरी और काउंटिंग सेंटर्स पर टीएमसी कार्यकर्ताओं को रोके जाने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा, "मैं अब एक स्वतंत्र पक्षी (Free Bird) हूं। मैं सड़क पर उतरूंगी और इस 'लूटे हुए' जनादेश के खिलाफ लड़ाई लड़ूंगी। मैं न तो कोई पेंशन लूंगी और न ही सरकारी सुविधा।"

इंडिया गठबंधन को मजबूत करने का संकल्प

अपनी भविष्य की रणनीति का खुलासा करते हुए उन्होंने कहा कि वह अब इंडिया (INDIA) गठबंधन को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक शक्तिशाली बनाने पर ध्यान केंद्रित करेंगी। ममता ने साफ कर दिया कि वह अब चुप नहीं बैठेंगी और बीजेपी के 'अत्याचारों' के खिलाफ जन-आंदोलन छेड़ेंगी।