एनडीए के पूर्व शिक्षक डॉ. संतोष गोयल अब मंदिर में रहने को मजबूर, वायरल वीडियो ने किया सबको भावुक
India News Live, Digital Desk: सोशल मीडिया पर अक्सर कई ऐसी कहानियाँ सामने आती हैं जो दिल को झकझोर देती हैं। इन दिनों एक बुजुर्ग शख्स का वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लोगों की आँखें नम हैं। यह कहानी है डॉ. संतोष गोयल की, जो कभी भारतीय रक्षा अकादमी (NDA) में देश के भविष्य यानी सेना के अधिकारियों को अंग्रेजी पढ़ाया करते थे, लेकिन आज वे गुमनामी और मुफलिसी की जिंदगी जीने को मजबूर हैं।
Ph.D. स्कॉलर से मंदिर की शरण तक का सफर
वीडियो में एक बेहद साधारण और जर्जर स्थिति में दिख रहे बुजुर्ग अपनी दास्तां सुनाते नजर आते हैं। जब वे बोलना शुरू करते हैं, तो उनकी शुद्ध अंग्रेजी और ज्ञान उनकी उच्च शिक्षा का प्रमाण देते हैं। डॉ. गोयल ने अंग्रेजी विषय में Ph.D. की है और साल 1971 में वे नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) में बतौर शिक्षक कार्यरत थे। उस दौर में वे सम्मान और प्रतिष्ठा के शिखर पर थे, लेकिन समय की गति ने उनके जीवन को पूरी तरह पलट कर रख दिया।
अंधेरे ने छीना सम्मानजनक भविष्य
डॉ. गोयल के जीवन में दुखों का पहाड़ तब टूटा जब उनकी आंखों की रोशनी चली गई। इस शारीरिक अक्षमता के कारण उन्हें अपनी प्रतिष्ठित नौकरी छोड़नी पड़ी। उन्होंने भावुक होते हुए बताया कि यदि वे कम से कम 15 साल तक नौकरी कर पाते, तो आज उन्हें पेंशन मिल रही होती और शायद उन्हें दर-दर की ठोकरें नहीं खानी पड़तीं। लेकिन नियति के खेल ने उन्हें पेंशन और सामाजिक सुरक्षा के अधिकार से भी वंचित कर दिया।
मंदिर बना आखिरी सहारा
आज डॉ. संतोष गोयल एक मंदिर के परिसर में रहकर अपना गुजर-बसर कर रहे हैं। जिस हाथ में कभी देश के वीरों को सिखाने वाली किताबें हुआ करती थीं, आज वही हाथ मंदिर में मिलने वाले भोजन पर निर्भर हैं। एक अधिकारी द्वारा साझा किए गए इस वीडियो ने व्यवस्था और समाज की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सोशल मीडिया पर उठा मदद का हाथ
डॉ. गोयल की कहानी वायरल होते ही इंटरनेट पर भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। लोग न केवल उनके प्रति सहानुभूति जता रहे हैं, बल्कि सरकार और एनडीए के पूर्व छात्रों (Alumni) से भी अपील कर रहे हैं कि वे आगे आकर अपने इस गुरु की मदद करें।
समाज की जिम्मेदारी: कई यूजर्स ने इसे सिस्टम की नाकामी बताया है कि एक उच्च शिक्षित व्यक्ति इस हाल में है।
वक्त की सीख: लोग इसे जीवन की अनिश्चितता का सबसे बड़ा उदाहरण मान रहे हैं, जहाँ एक पल में राजा रंक बन जाता है।
डॉ. संतोष गोयल की यह मार्मिक कहानी हमें याद दिलाती है कि वक्त कभी एक जैसा नहीं रहता। यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति के संघर्ष की नहीं है, बल्कि यह हमारे बुजुर्गों और विशेषकर हमारे उन शिक्षकों के प्रति हमारे कर्तव्यों की याद दिलाती है जिन्होंने देश के निर्माण में अपना जीवन खपा दिया।