BREAKING:
September 06 2026 06:43 am

जिनपिंग और ट्रंप की तल्ख मीटिंग का 'इनसाइड सीक्रेट': जापान पर क्यों भड़क गए चीन के राष्ट्रपति?

Post

India News Live,Digital Desk : हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन दौरे के दौरान एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। बीजिंग में हुई इस द्विपक्षीय वार्ता के दौरान माहौल उस समय बेहद तनावपूर्ण हो गया, जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अचानक जापान के रक्षा विस्तार को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के सामने कड़ा ऐतराज जताया। इस दो दिवसीय दौरे का यह पल सबसे 'हीटेड मोमेंट' बताया जा रहा है।

बिना एजेंडे के जापान पर क्यों बरसे जिनपिंग?

सूत्रों के अनुसार, ट्रंप की इस यात्रा के दौरान 'जापान' औपचारिक वार्ता का हिस्सा नहीं था, फिर भी जिनपिंग ने बातचीत के बीच में ही इस मुद्दे को छेड़ दिया। जापान की बदलती सैन्य नीतियों पर जिनपिंग का रुख बेहद तल्ख था। चीन के राष्ट्रपति की नाराजगी देखकर वहां मौजूद अमेरिकी अधिकारी भी हैरान रह गए।

आखिर चीन की नाराजगी की जड़ क्या है?

विशेषज्ञों के मुताबिक, जिनपिंग की नाराजगी के पीछे जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की सरकार द्वारा अपनाई गई आक्रामक रक्षा नीतियां हैं। चीन को निम्नलिखित बातों से सख्त आपत्ति है:

सैन्य विस्तार: जापान द्वारा रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ाया गया रक्षा बजट।

सैन्य निर्यात: नए नियमों के तहत जापान का लड़ाकू विमानों, मिसाइलों और युद्धपोतों का निर्यात शुरू करना।

रणनीतिक साझेदारी: इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में जापान की बढ़ती रक्षा सक्रियता और ताइवान की सुरक्षा के लिए बढ़ता समर्थन।

ताइवान मुद्दा: जापानी प्रधानमंत्री का वह बयान जिसमें उन्होंने कहा था कि 'ताइवान पर चीन का हमला जापानी सैन्य कार्रवाई को जायज ठहरा सकता है', ने बीजिंग को सबसे ज्यादा नाराज किया है।

ट्रंप का 'मजबूत' जवाब

इस तीखी बहस के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने भी पीछे हटने के बजाय जिनपिंग को करारा जवाब दिया। ट्रंप ने तर्क दिया कि जापान का सैन्य विस्तार क्षेत्रीय खतरों और उत्तर कोरिया से मिल रही चुनौतियों के कारण एक आवश्यक कदम है। उन्होंने जापानी प्रधानमंत्री के प्रति अपना गहरा सम्मान जाहिर किया और अपने व्यक्तिगत संबंधों पर जोर देते हुए स्पष्ट किया कि अमेरिका अपने मित्र देश के रक्षा निर्णयों के साथ खड़ा है।

क्षेत्रीय अस्थिरता का खतरा

इस तनाव के बाद अमेरिका में चीनी दूतावास ने एक बयान जारी कर 'जापानी उदारवादी ताकतों' पर क्षेत्रीय शांति को अस्थिर करने का आरोप लगाया है। बीजिंग का मानना है कि ताइवान के मामलों में जापान का हस्तक्षेप चीन की संप्रभुता का उल्लंघन है।

यह घटना दर्शाती है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समीकरण कितनी तेजी से बदल रहे हैं। एक तरफ जापान अपनी सुरक्षा के लिए कठोर कदम उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर चीन इसे सीधे तौर पर चुनौती के रूप में देख रहा है। ट्रंप और जिनपिंग के बीच हुई यह गरमा-गरमी इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में पूर्वी एशिया में कूटनीतिक और सामरिक चुनौतियां और बढ़ने वाली हैं।