Operation Sindoor : अमेरिकी दस्तावेजों में पाकिस्तान का दबाव अभियान हुआ बेनकाब
India News Live,Digital Desk : ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अमेरिकी दस्तावेजों ने पाकिस्तान की साजिशों का एक और बड़ा सच उजागर कर दिया है। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम हमले से लेकर ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत और उसके बाद भारत-पाक के चार दिनों के तनाव के दौरान, पाकिस्तान ने अमेरिका पर दबाव बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
अमेरिका में पाकिस्तान के राजनयिक और रक्षा अधिकारी 50 से अधिक बैठकों की मांग कर चुके थे। इन बैठकों में अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारी, सांसद और मीडिया संस्थानों के साथ बातचीत करने की योजना बनाई गई थी।
अमेरिका में 60 से अधिक बैठकें
अमेरिकी विदेशी एजेंट पंजीकरण अधिनियम (FARA) के रिकॉर्ड के अनुसार, पाकिस्तान के उच्चायुक्त ने अमेरिका में 60 से अधिक बैठकों के लिए ईमेल, फोन कॉल और मीटिंग की व्यवस्था की। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य था भारत के खिलाफ अमेरिका पर दबाव डालना। ऑपरेशन सिंदूर से परेशान पाकिस्तान ने हरसंभव प्रयास किए ताकि भारतीय कार्रवाई को रोका जा सके।
बैठकों में क्या हुआ चर्चा का केंद्र
पाकिस्तान ने अमेरिकी सांसदों, पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय), राज्य विभाग और प्रमुख पत्रकारों से संपर्क बनाने की कोशिश की। इन बैठकों में कश्मीर मुद्दे, क्षेत्रीय सुरक्षा, सीमा पर द्विपक्षीय संबंध और रेयर अर्थ मिनरल्स जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
करोड़ों रुपये की लॉबिंग
पाकिस्तान ने अमेरिका को अपने पक्ष में करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट (नवंबर 2025) के अनुसार, पाकिस्तान ने वाशिंगटन की लॉबिंग फर्म को लगभग 5 मिलियन डॉलर (करीब 45 करोड़ रुपये) का भुगतान किया। इसका फायदा तत्कालीन ट्रंप प्रशासन को भी मिला।
ट्रंप प्रशासन पर प्रभाव
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने जेवलिन एडवाइजर्स के माध्यम से सेडेन लॉ एलएलपी के साथ डील की। इसके कुछ ही हफ्तों बाद, ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर का स्वागत किया। पाकिस्तान ने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार देने की अपील के साथ-साथ व्यापारिक और आर्थिक लाभ के प्रस्ताव भी दिए।
इस खुलासे से एक बार फिर पाकिस्तान की रणनीति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके दबाव अभियान का पूरा चित्र सामने आया है।