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August 08 2026 09:12 pm

सोशल मीडिया पर खत्म हो रही है गुमनामी: अब एआई आपकी पोस्ट और कमेंट्स से खोज निकालेगा असली पहचान

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India News Live,Digital Desk : अगर आप सोचते हैं कि सोशल मीडिया पर फेक प्रोफाइल या छद्म नाम (Pseudonym) बनाकर आप सुरक्षित हैं, तो यह खबर आपकी नींद उड़ा सकती है। एंथ्रोपिक और ईटीएच ज्यूरिख (ETH Zurich) के एक चौंकाने वाले अध्ययन में यह सामने आया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब इतना शक्तिशाली हो गया है कि वह आपकी पोस्ट, कमेंट्स और लिखने के अंदाज से ही आपकी असली पहचान उजागर कर सकता है। इसके लिए एआई को आपके नाम या फोन नंबर जैसे व्यक्तिगत डेटा की भी जरूरत नहीं है।

कैसे काम करता है एआई का यह 'डिटेक्टिव' दिमाग?

शोधकर्ताओं ने एक ऐसी स्वचालित प्रणाली (Automated System) विकसित की है, जो इंटरनेट पर मौजूद बिखरी हुई जानकारियों को जोड़कर एक पूरा चित्र तैयार कर लेती है। यह सिस्टम मुख्य रूप से तीन स्तरों पर काम करता है:

लेखन शैली का विश्लेषण: हर व्यक्ति के लिखने का एक खास तरीका होता है। एआई आपके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले शब्दों, व्याकरण और वाक्य संरचना से आपकी 'डिजिटल फिंगरप्रिंट' तैयार कर लेता है।

रुचियां और स्थान के संकेत: आपकी पोस्ट में छुपे हुए छोटे-छोटे संकेत, जैसे कि आपके कार्यस्थल का जिक्र, पसंदीदा रेस्तरां, शिक्षा, और आपके द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे डिवाइस की जानकारी, एआई के लिए महत्वपूर्ण सुराग बन जाते हैं।

क्रॉस-प्लेटफॉर्म मिलान: यह सिस्टम रेडिट (Reddit) जैसे गुमनाम प्लेटफार्मों की पोस्ट की तुलना लिंक्डइन (LinkedIn) जैसी प्रोफेशनल प्रोफाइल से करके यह बता सकता है कि दोनों खातों के पीछे एक ही व्यक्ति है।

गोपनीयता पर मंडराता बड़ा खतरा

यह अध्ययन उन लोगों के लिए चिंता का विषय है जो सुरक्षा कारणों से अपनी पहचान छिपाकर सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं। खास तौर पर पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और संवेदनशील जानकारी साझा करने वाले व्हिसलब्लोअर्स के लिए अब 'एनोनिमस' रहना लगभग असंभव हो जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, किसी उपयोगकर्ता की पोस्ट की संख्या जितनी अधिक होगी, एआई मॉडल के लिए उसकी पहचान सत्यापित करना उतना ही सटीक और आसान होगा।

निगरानी और साइबर हमलों का बढ़ता जोखिम

शोधकर्ताओं ने आगाह किया है कि इस तकनीक के कुछ गंभीर नकारात्मक पहलू भी हो सकते हैं। सरकारें इस पद्धति का उपयोग बड़े पैमाने पर नागरिकों की निगरानी (Surveillance) के लिए कर सकती हैं। साथ ही, साइबर अपराधी इस तकनीक के जरिए किसी भी व्यक्ति की 'विस्तृत प्रोफाइलिंग' कर सकते हैं, जिससे फिशिंग और अन्य डिजिटल हमलों का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा। यह शोध साबित करता है कि एआई के इस युग में डिजिटल दुनिया में पूरी तरह से छिपना अब एक बीते जमाने की बात हो गई है।