June 22 2026 09:20 pm

निर्जला एकादशी 2026: गृहस्थ और वैष्णव दोनों 25 जून को ही रखेंगे महाव्रत, दूर हुआ तारीख का सारा संशय

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सनातन धर्म में सबसे कठिन और परम कल्याणकारी माने जाने वाले 'निर्जला एकादशी' व्रत की तारीख को लेकर इस साल भक्तों के बीच कोई असमंजस नहीं रहेगा। पंचांग की सटीक गणना के अनुसार, साल 2026 में गृहस्थ (आम श्रद्धालु) और वैष्णव संप्रदाय (साधु-संत) दोनों एक ही दिन यानी 25 जून 2026 को यह महाव्रत रखेंगे।

ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की इस एकादशी को साल की सभी 24 एकादशियों में सर्वश्रेष्ठ और सबसे ज्यादा फलदायी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन पूरी निष्ठा और बिना जल ग्रहण किए व्रत रखने से वर्ष भर की सभी एकादशियों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।

पंचांग गणना: जानिए क्यों एक ही दिन रखा जाएगा व्रत?

वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 24 जून 2026 को शाम 06 बजकर 12 मिनट पर हो जाएगी। इस तिथि का समापन 25 जून 2026 की रात 08 बजकर 09 मिनट पर होगा।

शास्त्रों के नियमानुसार, जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी तिथि मौजूद होती है (उदया तिथि), उसी दिन व्रत रखना श्रेष्ठ माना जाता है। चूंकि 25 जून को सूर्योदय के समय पूर्ण एकादशी तिथि व्याप्त रहेगी, इसलिए गृहस्थ और वैष्णव दोनों ही इस दिन एक साथ भगवान हरि की भक्ति में लीन होकर निर्जल व्रत का पालन करेंगे।

व्रत पारण (Vrat Parana) का सबसे सटीक समय

निर्जला एकादशी व्रत का पारण (व्रत खोलना) अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को किया जाता है।

पारण की तारीख: 26 जून 2026

पारण का शुभ समय: सुबह 05 बजकर 25 मिनट से सुबह 08 बजकर 13 मिनट तक।

विशेष नोट: शास्त्रों के अनुसार, एकादशी व्रत का पारण हमेशा सूर्योदय के बाद और द्वादशी तिथि के भीतर तय समय पर ही करना चाहिए। समय बीत जाने पर पारण करने से व्रत के पूर्ण फल की प्राप्ति नहीं होती है।

निर्जला एकादशी 2026: पूजा के सभी शुभ मुहूर्त

25 जून को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए दिनभर में कई अत्यंत शुभ मुहूर्त बन रहे हैं:

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:04 बजे से सुबह 04:45 बजे तक (संकल्प और ध्यान के लिए सर्वोत्तम)

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:56 बजे से दोपहर 12:52 बजे तक (महापूजा के लिए श्रेष्ठ)

विजय मुहूर्त: दोपहर 02:43 बजे से दोपहर 03:39 बजे तक

अमृत काल: शाम 06:46 बजे से रात 08:32 बजे तक

गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:21 बजे से शाम 07:42 बजे तक

श्रीहरि विष्णु की इस सरल विधि से करें आराधना

एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर पवित्र स्नान करें और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।

घर के ईशान कोण या मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने घी का दीपक प्रज्वलित करें।

भगवान को पीले फूल, मौसमी फल और पंचामृत का भोग लगाएं।

पूजा में तुलसी दल (तुलसी के पत्ते) अनिवार्य रूप से शामिल करें, क्योंकि भगवान विष्णु बिना तुलसी के कोई भी भोग स्वीकार नहीं करते। ध्यान रहे कि एकादशी के दिन तुलसी तोड़ना वर्जित है, इसलिए पत्ते एक दिन पहले (दशमी को) ही तोड़कर रख लें।

"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें और शाम को सपरिवार विष्णु जी की आरती व कीर्तन करें।

क्या करें और क्या न करें: महाव्रत के कड़े नियम

निर्जला एकादशी का पूर्ण लाभ उठाने के लिए कुछ नियमों और मर्यादाओं का पालन करना बेहद जरूरी माना गया है:

महादान का महत्व: ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी को देखते हुए इस दिन जरूरतमंदों को पानी, मीठा शरबत, मिट्टी का घड़ा (कलश), छाता, वस्त्र और मौसमी फल दान करना महापुण्यदायी माना जाता है।

क्रोध और विवाद से दूरी: व्रत के दिन किसी भी व्यक्ति से बहस, लड़ाई-झगड़ा या किसी की चुगली करने से बचें। मन में किसी के प्रति द्वेष या बुरे विचार न लाएं।

सात्विकता का पालन: इस दिन घर में पूरी तरह सात्विक माहौल रखें। मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज और तामसिक भोजन से पूरी तरह दूरी बनाए रखें।