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August 06 2026 05:26 pm

महराजगंज में नई रेल लाइन परियोजना ने पकड़ी तेज रफ्तार: कई अंडरपास और पुल बनकर तैयार

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उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में बहुप्रतीक्षित आनंदनगर-घुघली नई रेल लाइन परियोजना अब काफी तेजी से धरातल पर उतरती नजर आ रही है। लगभग 958.27 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार होने वाली इस 52.7 किलोमीटर लंबी रेल परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण का काम लगभग पूरा हो चुका है। इसके साथ ही विभिन्न स्थानों पर प्रस्तावित अधिकांश रेल अंडरपास बनकर पूरी तरह तैयार हो चुके हैं, जिससे स्थानीय नागरिकों और किसानों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। रेलवे प्रशासन द्वारा इस महत्वाकांक्षी परियोजना को वर्ष 2027 तक पूरा करने का कड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके तहत निर्माण कार्यों में दिन-रात तेजी लाई जा रही है।

53 गांवों से गुजरेगी लाइन, बड़े पुलों और ओवरब्रिज का निर्माण कार्य तेज

जिले के कुल 53 गांवों से होकर गुजरने वाली इस महत्वपूर्ण रेल परियोजना के पहले चरण का काम बारिश के मौसम के बावजूद लगातार जारी है। घघरुआ खंडेशर, रामपुर बल्डीहा, पिपरा मुंडेरी, लक्ष्मीपुर शिवाला, दरौली, फुलवरिया, सिसवा बाबू और महुअवा समेत कई प्रमुख स्थानों पर अंडरपास का निर्माण पूरा हो चुका है। घुघली-महराजगंज खंड में पुल निर्माण को गति देने के लिए शिकारपुर के निकट कोदइला में एक विशेष मिक्सिंग प्लांट स्थापित किया गया है, जहां से पिलर और प्रीकास्ट संरचनाएं तैयार की जा रही हैं। इसके अलावा, एनएच-730 से जुड़े गोरखपुर-महराजगंज मार्ग पर कोदइला के पास एक आधुनिक रेलवे ओवरब्रिज और रोहिन नदी पर एक बड़े पुल का निर्माण भी पूरी गति से चल रहा है।

पूर्वोत्तर रेलवे ने दी जानकारी, ट्रैक बिछाने के कार्य पर भी जल्द होगा फोकस

पूर्वोत्तर रेलवे के सीनियर सेक्शन इंजीनियर अजय कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि परियोजना के पहले चरण का अधिकांश कार्य सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है और सभी तयशुदा अंडरपास का निर्माण पूरा कर लिया गया है। दूसरे चरण के अंतर्गत अब प्रमुख पुलों, रेलवे स्टेशनों और पुलियों के निर्माण में भी तेजी लाई गई है, जिसके लिए विभिन्न स्थानों पर गहरी पाइलिंग कर आधार स्तंभ खड़े किए जा चुके हैं। हालांकि, मिट्टी की उपलब्धता न होने के कारण फिलहाल ट्रैक बिछाने के कार्य में कुछ शुरुआती इंतजार करना पड़ रहा है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर सभी बाधाओं को दूर करते हुए तय समयसीमा यानी वर्ष 2027 तक इस रेल परियोजना को जनता को समर्पित करने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास जारी हैं।