एनसीईआरटी ने पॉलिटिकल साइंस की टेक्स्टबुक कमेटी का पुनर्गठन किया, 20 में से 4 सदस्य आरएसएस से जुड़े
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 11वीं और 12वीं की पॉलिटिकल साइंस (राजनीति विज्ञान) की पाठ्यपुस्तकों को तैयार करने के लिए एक नई और संशोधित टीम का गठन किया है। इस पुनर्गठित समिति में देश भर के विश्वविद्यालयों के शिक्षाविद्, स्कूल शिक्षक और एनसीईआरटी के अपने फैकल्टी सदस्य शामिल किए गए हैं।
नई समिति का गठन और जिम्मेदारियां
एनसीईआरटी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस 20 सदस्यीय पाठ्यपुस्तक विकास समिति का मुख्य उद्देश्य इन दोनों कक्षाओं की किताबों की तैयारी को और अधिक मजबूत और सुव्यवस्थित बनाना है। इस पैनल में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), दिल्ली विश्वविद्यालय (DU), इग्नू (IGNOU), नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली, जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल, पांडिचेरी यूनिवर्सिटी और उत्कल यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के फैकल्टी सदस्य शामिल हैं।
राजनीतिक विश्लेषक और शिक्षाविद् संदीप शास्त्री की अगुवाई वाली इस टीम को समय-सीमा भी दी गई है। इसके तहत कक्षा 11वीं की टेक्स्टबुक को 30 नवंबर, 2026 तक और कक्षा 12वीं की किताब को 30 जुलाई, 2027 तक अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद अंतिम शिक्षण-अधिगम सामग्री को एनसीईआरटी द्वारा अनुमोदित, प्रकाशित और वितरित किया जाएगा।
समिति में शामिल सदस्यों की पृष्ठभूमि
इस 20 सदस्यीय पैनल में कम से कम चार ऐसे सदस्य शामिल हैं, जिनके राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) या भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े संगठनों के साथ पुराने या वर्तमान संबंध रहे हैं:
वंदना मिश्रा (जेएनयू की प्रोफेसर और एबीवीपी की पूर्व राष्ट्रीय सचिव)
यदुनाथ देशपांडे (शिक्षाविद् जो एबीवीपी में संगठनात्मक पदों पर रह चुके हैं और खुद को राजनीतिक सलाहकार बताते हैं)
प्रशांत दिवेकर (पुणे स्थित ज्ञान प्रबोधिनी से जुड़े)
रवि रमेशचंद्र शुक्ला (जेएनयू के एकेडमिक जो रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी से जुड़े जर्नल के संपादकीय बोर्ड से संबंधित रहे हैं)
इसके अलावा इस समिति में जेएनयू से प्रकाश कांडपाल, एनएलयू दिल्ली से निधि गुप्ता, चाणक्य यूनिवर्सिटी से चेतन सिंघई, दिल्ली यूनिवर्सिटी से सुकांक्षिका वत्सा और इग्नू से सतीश कुमार जैसे अन्य विद्वान भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं।