NATO का ट्रंप को 'शक्ति प्रदर्शन': अरबों डॉलर की नई आर्म्स डील का ऐलान, यूरोप दिखाएगा अपना दम
तुर्की की राजधानी अंकारा में चल रहे दो दिवसीय NATO शिखर सम्मेलन (7-8 जुलाई 2026) में गठबंधन ने एक बार फिर अपनी एकजुटता और सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया है। समिट के दौरान कई देशों ने मिलकर अरबों डॉलर के नए रक्षा अनुबंधों (Defense Contracts) पर हस्ताक्षर किए हैं। NATO प्रमुख मार्क रूट ने इसे 'बिग रिवील' करार दिया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह साबित करना है कि यूरोपीय देश अब अपनी सुरक्षा के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं और अमेरिकी सैन्य शक्ति पर अपनी निर्भरता को कम कर रहे हैं।
हाल ही में ईरान के खिलाफ छेड़े गए युद्ध में यूरोपीय देशों द्वारा अमेरिकी सेना को अपने एयरबेस इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध लगाने या सीमित सहयोग देने के कारण राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप काफी नाराज थे। ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से NATO को 'पेपर टाइगर' तक कह दिया था और यूरोप पर 'सुरक्षा के नाम पर फ्री-लोडिंग' का आरोप लगाया था। इस समिट के जरिए NATO सहयोगी यह दिखाना चाहते हैं कि वे अपनी जिम्मेदारी बखूबी समझ रहे हैं और अब बड़े निवेश को 'वास्तविक फायरपावर' (असली सैन्य शक्ति) में बदल रहे हैं।
समिट में 'NATO 3.0' विजन पर भी जोर दिया गया है, जिसका लक्ष्य एक "मजबूत यूरोप, मजबूत NATO" है। इसके तहत कई प्रमुख प्रोजेक्ट्स की घोषणा की गई है, जिनमें शामिल हैं:
पुराने विमानों का आधुनिकीकरण: NATO अपने 50 साल पुराने AWACS सर्विलांस विमानों के बेड़े को बदलने के लिए नए अनुबंध कर रहा है।
ड्रोन और मिसाइल तकनीक: नई पीढ़ी के सर्विलांस ड्रोन, मिसाइल इंटरसेप्टर और अन्य रक्षा उपकरणों के लिए अरबों डॉलर का निवेश किया गया है।
यूरोपीय वित्तीय सहायता: कई प्रोजेक्ट्स को यूरोपीय संघ द्वारा रक्षा उद्देश्यों के लिए दिए जाने वाले सस्ते ऋणों (Cheap Loans) के माध्यम से वित्तपोषित किया जा रहा है।
समिट के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के बीच होने वाली द्विपक्षीय बातचीत पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। जहाँ ज़ेलेंस्की का लक्ष्य यूक्रेन के लिए 70 बिलियन यूरो (लगभग 80 बिलियन डॉलर) की वार्षिक सैन्य सहायता का वादा पक्का करना है, वहीं ट्रंप का रुख यूक्रेन युद्ध को लेकर अब भी काफी कड़ा बना हुआ है। यूरोप अब यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि वे न केवल अपनी सुरक्षा, बल्कि यूक्रेन की मदद करने में भी पूरी तरह सक्षम हैं।