BREAKING:
September 09 2026 03:49 am

दीवार फांदकर अचानक सरकारी स्कूल के अंदर पहुंचे राज्यमंत्री: ताले लटके और शिक्षक गायब देख भड़के सुरेंद्र दिलेर

Post

उत्तर प्रदेश की बेसिक शिक्षा व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त और जवाबदेह बनाने के सरकारी दावों के बीच जमीनी स्तर पर बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। राज्य सरकार के मंत्री सुरेंद्र दिलेर जब एक सरकारी प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय की हकीकत परखने के लिए औचक निरीक्षण पर पहुंचे, तो स्कूल के मुख्य द्वार पर ताला लटका मिला। तय समय के बाद भी स्कूल का बंद होना और बाहर बच्चों का भटकना देखकर मंत्री खुद को रोक नहीं पाए। प्रोटोकॉल और सुरक्षा घेरे को दरकिनार करते हुए वे तुरंत स्कूल की बाउंड्री वॉल फांदकर सीधे परिसर के अंदर दाखिल हो गए। मंत्री को इस तरह दीवार कूदकर स्कूल के भीतर जाते देख उनके सुरक्षाकर्मियों, स्थानीय ग्रामीणों और साथ चल रहे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। परिसर के भीतर का नजारा देखकर यह स्पष्ट हो गया कि दूरदराज के क्षेत्रों में तैनात शिक्षक और कर्मचारी किस कदर शासन के दिशा-निर्देशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

क्लासरूम में लटके ताले और गायब मिले शिक्षक: औचक निरीक्षण में खुली बेसिक शिक्षा की पोल

स्कूल परिसर के अंदर कदम रखते ही व्यवस्था की बदहाली की परतें एक के बाद एक खुलती चली गईं। निर्धारित समय सारिणी के बावजूद कक्षाओं के दरवाजों पर ताले लटके हुए थे। विद्यालय में न तो प्रधानाध्यापक मौजूद थे और न ही सहायक अध्यापक या अन्य शिक्षामित्र अपनी ड्यूटी पर तैनात मिले। कई कमरों की खिड़कियों से धूल और मकड़ी के जाले साफ नजर आ रहे थे, जिससे यह प्रतीत हो रहा था कि इन कमरों को कई दिनों से खोला ही नहीं गया है। मौके पर मौजूद कुछ बच्चों और आसपास के ग्रामीणों ने मंत्री को बताया कि शिक्षकों का देर से आना या अक्सर स्कूल से नदारद रहना यहां की आम दिनचर्या बन चुका है। रजिस्टर में फर्जी उपस्थिति दर्ज करने और बिना अवकाश स्वीकृत कराए ड्यूटी से गायब रहने का यह खेल देखकर मंत्री सुरेंद्र दिलेर का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया।

गंदगी का अंबार, मिड-डे मील में लापरवाही और नौनिहालों के भविष्य से खिलवाड़ पर फूटा गुस्सा

निरीक्षण के दौरान सिर्फ शिक्षकों की गैरहाजिरी ही नहीं, बल्कि विद्यालय परिसर के बुनियादी ढांचे और स्वच्छता की स्थिति भी बेहद दयनीय पाई गई। स्कूल के शौचालय में भीषण गंदगी पसरी हुई थी और वहां पानी तक का समुचित प्रबंध नहीं था। मिड-डे मील रसोईघर की पड़ताल करने पर पता चला कि बच्चों के लिए दोपहर का भोजन बनाने की कोई मुकम्मल तैयारी ही नहीं थी। शुद्ध पेयजल के लिए लगाए गए इंडिया मार्का हैंडपंप और टोटियां खराब पड़ी थीं, जिसके चलते मासूम बच्चों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा था। बच्चों के बैठने के लिए बने कमरों में फर्श उखड़ा हुआ था और बिजली के पंखे बंद पड़े थे। सरकार द्वारा प्राथमिक विद्यालयों के कायाकल्प और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए पानी की तरह बहाए जा रहे बजट की यह दुर्दशा देखकर मंत्री ने कड़ी नाराजगी जताई और इसे नौनिहालों के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ करार दिया।

मौके से ही बीएसए और उच्चाधिकारियों को लगाई फटकार, वेतन रोकने व निलंबन के कड़े निर्देश

लापरवाही का यह आलम देखकर मंत्री सुरेंद्र दिलेर ने बिना एक पल गंवाए मौके से ही जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) और खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) को फोन लगाया। उन्होंने दोनों अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई और तत्काल प्रभाव से स्कूल का पूरा रिकॉर्ड तलब करने को कहा। मंत्री ने निर्देश दिए कि औचक निरीक्षण के दौरान गैरहाजिर पाए गए सभी शिक्षकों, अनुदेशकों और कर्मचारियों का उस दिन का वेतन तत्काल रोका जाए और उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए। इसके साथ ही लंबे समय से गायब चल रहे दोषी अध्यापकों के खिलाफ विभागीय जांच बैठाते हुए निलंबन की सख्त कार्रवाई की संस्तुति करने के आदेश दिए गए। उन्होंने बीएसए को दो टूक शब्दों में कहा कि यदि फील्ड में तैनात मॉनिटरिंग अफसरों ने नियमित निरीक्षण किया होता, तो एक सरकारी स्कूल की ऐसी बदहाल स्थिति कभी नहीं होती।

सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की मनमानी और लेटलतीफी पर नकेल कसने की सख्त चेतावनी

इस औचक निरीक्षण के बाद मंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि सरकारी खजाने से मोटा वेतन लेने वाले शिक्षकों की मनमानी और कार्य में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार परिषदीय विद्यालयों के आधुनिकीकरण और स्मार्ट क्लासरूम के निर्माण के लिए लगातार प्रयासरत है, लेकिन कुछ गैर-जिम्मेदार कर्मचारियों के चलते पूरी व्यवस्था बदनाम होती है। ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब, वंचित और जरूरतमंद परिवारों के बच्चे इन स्कूलों में उम्मीद के साथ आते हैं, ऐसे में उनके अधिकार और शिक्षा के साथ खिलवाड़ करने वालों पर कड़ी कानूनी और प्रशासनिक नकेल कसी जाएगी। उन्होंने सभी शिक्षकों को समयबद्धता का पालन करने और डिजिटल बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए।

प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और आकस्मिक जांच का बढ़ेगा दायरा

घटना के बाद पूरे जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में खलबली मच गई है। मंत्री के इस कड़े तेवर के बाद जिला प्रशासन ने अन्य सभी विकास खंडों में भी विशेष जांच दल बनाकर प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों का सघन औचक निरीक्षण शुरू करने का फैसला लिया है। शासन स्तर पर भी इस घटना की विस्तृत रिपोर्ट भेजी जा रही है ताकि खंड शिक्षा अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा सके। ग्रामीणों ने मंत्री के इस औचक एक्शन की सराहना की और उम्मीद जताई कि इस तरह के जमीनी दौरों से लापरवाह सिस्टम में सुधार आएगा और गरीब बच्चों को उनका वास्तविक शैक्षणिक अधिकार मिल सकेगा।