June 18 2026 05:11 pm

साल 2027 में वृषभ राशि पर शुरू महाकाल शनि की साढ़ेसाती, करियर-बिजनेस में बरतें ये सावधानियां

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नई दिल्ली/लखनऊ: ज्योतिष शास्त्र में न्याय के देवता और कर्मफल दाता माने जाने वाले शनिदेव का राशि परिवर्तन सबसे बड़ी खगोलीय और ज्योतिषीय घटनाओं में से एक माना जाता है। आगामी वर्ष 2027 में शनिदेव एक ऐसा बड़ा फेरबदल करने जा रहे हैं, जिससे कुछ राशियों को मुक्ति मिलेगी तो कुछ के जीवन में अग्निपरीक्षा का दौर शुरू होगा।

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, साल 2027 में शनिदेव के राशि बदलते ही कुंभ राशि के जातकों को साढ़ेसाती के चंगुल से हमेशा के लिए आजादी मिल जाएगी, जबकि वृषभ राशि वाले जातकों पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण (उदय चरण) शुरू हो जाएगा। आइए मशहूर ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र उपाध्याय से जानते हैं कि वृषभ राशि वालों पर यह साढ़ेसाती कब से लगेगी, उन्हें क्या सावधानियां रखनी होंगी और इससे बचने के महाउपाय क्या हैं।

नोट कर लें तारीख: वृषभ राशि पर कब से लगेगी साढ़ेसाती?

वर्तमान समय में शनिदेव देवगुरु बृहस्पति की मीन राशि में गोचर कर रहे हैं। पंचांग और ग्रहों की गणना के अनुसार, 03 जून 2027 को शनिदेव मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। शनि के मेष राशि में कदम रखते ही वृषभ राशि वालों के लिए साढ़ेसाती के कष्टकारी 7.5 वर्षों की शुरुआत हो जाएगी।

मित्रता का लाभ: वृषभ राशि के स्वामी 'शुक्र' हैं, और ज्योतिष में शुक्र व शनि के बीच गहरी मित्रता का भाव है। यही वजह है कि अन्य राशियों की तुलना में वृषभ राशि के जातकों के लिए शनि की यह साढ़ेसाती थोड़ी कम कष्टदायक और सहनीय रहेगी।

साढ़ेसाती के दौरान वृषभ राशि वाले भूलकर भी न करें ये गलतियां

पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, साढ़ेसाती के पहले चरण में वृषभ राशि के जातकों को मानसिक तनाव, आर्थिक उतार-चढ़ाव और स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए आने वाले समय में आपको इन बातों का विशेष ध्यान रखना होगा:

स्वास्थ्य और चोट-चपेट: इस अवधि में वाहन चलाते समय या सामान्य दिनों में भी विशेष सावधानी बरतें, ताकि सिर में किसी प्रकार की चोट न लगे। साथ ही अपने पिता के स्वास्थ्य का भी पूरा ख्याल रखें।

पार्टनरशिप और विदेशी व्यापार: यदि आपका बिजनेस साझेदारी (Partnership) में है या विदेश से जुड़ा है, तो अपने पार्टनर की गतिविधियों पर पैनी नजर रखें। अनजान लोगों के साथ किसी भी प्रकार का बड़ा आर्थिक लेन-देन पूरी तरह टाल दें।

सरकारी तंत्र से न उलझें: इस दौरान किसी भी तरह की पंगेबाजी या गैर-कानूनी काम से बचें। सरकारी अधिकारियों या प्रशासन से उलझना आपके करियर को पूरी तरह बर्बाद कर सकता है।

ऑफिस में व्यवहार: कार्यक्षेत्र में अपने बॉस और उच्चाधिकारियों (Superiors) के साथ रिश्तों में मधुरता बनाए रखें, अन्यथा नौकरी पर खतरा आ सकता है। किसी भी क्षेत्र में बड़ा रिस्क लेने से बचें।

साढ़ेसाती का सकारात्मक पहलू: विदेश यात्रा के बनेंगे योग

साढ़ेसाती का मतलब सिर्फ नुकसान नहीं होता। पंडित उपाध्याय के अनुसार, यद्यपि इस दौरान व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में संतुलन बनाना थोड़ा कठिन होगा, लेकिन शनिदेव आपको शुभ फल भी देंगे। इस अवधि में वृषभ राशि के उन जातकों के लिए विदेश जाने के प्रबल योग बनेंगे जिनका काम विदेशी कंपनियों या एक्सपोर्ट-इंपोर्ट से जुड़ा है। आपके कुछ ऐसे नए और मजबूत संबंध बनेंगे जो भविष्य में आपको बड़ा लाभ देंगे।

शनिदेव के प्रकोप और अशुभ प्रभाव से बचने के 5 चमत्कारी उपाय

यदि आप चाहते हैं कि शनि की साढ़ेसाती के दौरान आपका बाल भी बांका न हो, तो ज्योतिष शास्त्र और पंडित जी द्वारा बताए गए इन 5 उपायों को अपने जीवन में जरूर शामिल करें:

हनुमान जी की शरण: शनिदेव ने स्वयं वचन दिया है कि वे हनुमान जी के भक्तों को कभी प्रताड़ित नहीं करते। इसलिए नियमित रूप से या प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को हनुमान मंदिर जाएं, बजरंगबली के दर्शन करें और उन्हें बूंदी या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं।

पीपल के पेड़ के पास दीपदान: हर शनिवार की शाम को सूर्यास्त के बाद किसी पुराने पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का एक दीपक जलाएं। दीपक जलाने के बाद पेड़ की 7 या 11 बार परिक्रमा अवश्य करें।

छाया दान का महाउपाय: शनिवार की सुबह एक कटोरी में सरसों का तेल लें, उसमें अपना चेहरा (प्रतिबिंब) देखें और फिर उस तेल को किसी गरीब, जरूरतमंद या डाकोत को दान कर दें। यह उपाय शनि के कष्टों को तुरंत हर लेता है।

जरूरतमंदों की सहायता और दान: शनिवार के दिन किसी लाचार या गरीब व्यक्ति को काले तिल, काले वस्त्र, चमड़े के जूते-चप्पल, छाता या साबुत काली उड़द की दाल का दान करें।

कर्म प्रधान बनें: शनि न्यायप्रिय देवता हैं और वे केवल बुरे कर्म करने वालों को ही दंडित करते हैं। साढ़ेसाती के दौरान अपने आचरण को शुद्ध रखें, असहायों का मजाक न उड़ाएं और शनिवार को शनि चालीसा व 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' मंत्र का जाप करें।