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August 11 2026 06:32 pm

'कांग्रेस या भाजपा को आंदोलन हाईजैक नहीं करने दो': जंतर-मंतर से रांची तक के प्रदर्शनों का हवाला देकर मायावती ने Gen-Z को चेताया

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने देश भर के छात्रों, नौजवानों और 'जनरेशन-जी' (Gen-Z) के युवाओं को राजनीतिक दलों की चालबाजियों से सावधान रहने की गंभीर चेतावनी दी है। लखनऊ में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए बीएसपी सुप्रीमो ने कहा कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस दोनों ही युवाओं के वाजिब आंदोलनों को अपने संकीर्ण राजनीतिक लाभ के लिए 'हाईजैक' कर रहे हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे किसी भी राजनीतिक दल के हाथों का मोहरा बनने के बजाय अपनी समस्याओं के वास्तविक समाधान के लिए सतर्कता और बुद्धिमत्ता से काम लें। मायावती का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के अलग-अलग हिस्सों में बेरोजगारी, पेपर लीक और सरकारी भर्तियों में देरी को लेकर युवाओं का असंतोष उफान पर है और हाल ही में बीएसपी के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद ने भी युवाओं के बीच अपनी पैठ बढ़ाने के लिए आक्रामक अभियान छेड़ रखा है।

सियासी साजिश बनाम युवाओं के मुद्दे: मायावती ने जंतर-मंतर और रांची आंदोलनों का दिया हवाला

अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मायावती ने देश में हाल ही में हुए प्रमुख छात्र आंदोलनों का उल्लेख करते हुए भाजपा और कांग्रेस पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रतियोगी परीक्षाओं और बेरोजगारी के खिलाफ हुए विशाल प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि इस जनआंदोलन को पहले कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने पूरी तरह से अपने कब्जे में ले लिया। युवाओं के दर्द को दूर करने के बजाय विपक्षी दलों ने इस मुद्दे का इस्तेमाल केवल संसद की कार्यवाही को बाधित करने और अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए किया। इसी प्रकार झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ जब छात्र सड़कों पर उतरे, तो वहां भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों ने उस आंदोलन को हाईजैक करके उसे राजनीतिक मोड़ दे दिया।

बीएसपी प्रमुख ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चाहे दिल्ली का जंतर-मंतर हो या रांची की सड़कें, दोनों ही जगह युवाओं और उनके माता-पिता की जायज चिंताओं पर गंभीरता से काम करने के बजाय सत्ता पक्ष और विपक्ष ने केवल अपनी चुनावी स्वार्थ की राजनीति चमकाने का काम किया है। मायावती ने आरोप लगाया कि संसद में लगातार हो रहे हंगामे और गतिरोध के पीछे भाजपा और कांग्रेस के बीच कोई अंदरूनी साठगांठ हो सकती है, ताकि दोनों दल केंद्र और राज्य सरकारों की विफलताओं, बेरोजगारी और महंगाई जैसे बुनियादी सवालों से देश की जनता का ध्यान भटका सकें। उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ केवल नूरा-कुश्ती का खेल खेल रही हैं और इस खेल में देश का युवा बुरी तरह पिस रहा है।

Gen-Z के भविष्य के साथ खिलवाड़: 'राजनीतिक मोहरा न बनें देश के युवा'

मायावती ने देश की नई पीढ़ी यानी Gen-Z को संबोधित करते हुए कहा कि आज के दौर का युवा जागरूक, समझदार और अपने अधिकारों के प्रति सजग है। लेकिन जब युवा अपनी वास्तविक समस्याओं को लेकर सड़कों पर उतरते हैं, तो राजनीतिक दल उनकी मासूमियत और गुस्से का फायदा उठाकर अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने लगते हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को यह समझना होगा कि उनका मुख्य उद्देश्य अपनी मांगों को मनवाना, भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाना और रोजगार के अवसर हासिल करना होना चाहिए, न कि किसी पार्टी विशेष के राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बनना।

बीएसपी सुप्रीमो ने युवाओं को सलाह दी कि वे अपनी समस्याओं को सुलझाने के लिए राजनीतिक व्यवस्था और दलों का इस्तेमाल बेहद सावधानीपूर्वक और रणनीति के साथ करें। उन्हें अपनी स्वायत्तता बनाए रखनी चाहिए ताकि कोई भी पार्टी उनके आंदोलन की दिशा न भटका सके। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज पार्टी हमेशा से छात्रों और युवाओं के साथ चट्टान की तरह खड़ी रही है और आगे भी उनके हकों की लड़ाई संसद से लेकर सड़क तक पूरी ईमानदारी से लड़ती रहेगी। मायावती ने आगाह किया कि यदि युवा इस समय राजनीतिक विवादों के जाल में फंस गए, तो उनकी समस्याओं का वास्तविक समाधान पीछे छूट जाएगा और वे केवल चुनावी विमर्श का साधन बनकर रह जाएंगे।

आरक्षण, रोजगार और निजी क्षेत्र में कोटा: मायावती ने याद दिलाया बीएसपी शासन का रिकॉर्ड

युवाओं के साथ-साथ मायावती ने देश में आरक्षण व्यवस्था और सरकारी नौकरियों के संकट पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और विभिन्न राज्यों की सरकारें सुनियोजित तरीके से सार्वजनिक क्षेत्र (पब्लिक सेक्टर) को कमजोर कर रही हैं और निजीकरण को बढ़ावा दे रही हैं, जिससे दलितों, आदिवासियों और पिछड़े वर्गों को मिलने वाला आरक्षण लगभग बेअसर और निष्प्रभावी साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि आरएसएस और भाजपा की नीतियों का मुख्य उद्देश्य आरक्षण व्यवस्था को अप्रत्यक्ष रूप से समाप्त करना है, जिससे गरीब, शोषित और वंचित समाज के युवा एक बार फिर सामाजिक और आर्थिक रूप से लाचार हो जाएं।

इस संदर्भ में मायावती ने उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की चार बार रही सरकारों के शासनकाल के कार्यों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बीएसपी सरकार के दौरान सरकारी विभागों में सालों से लगी भर्तियों की रोक को हटाकर लाखों युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरियां दी गई थीं। उस समय युवाओं को सड़कों पर लाठियां खाने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता था। इसके अलावा, बीएसपी सरकार ने ही सरकारी मदद से लगने वाले निजी उद्योगों में भी पिछड़े और शोषित वर्ग के युवाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीएसपी निजी क्षेत्र के विकास के खिलाफ नहीं है, लेकिन जिस तरह सरकारी नौकरियों में सामाजिक न्याय के लिए आरक्षण लागू है, उसी तर्ज पर प्राइवेट सेक्टर में भी कोटा प्रणाली अनिवार्य की जानी चाहिए ताकि हर वर्ग के युवा को आगे बढ़ने के समान अवसर मिल सकें।

2027 का सियासी समर: यूपी, उत्तराखंड और पंजाब में बीएसपी की राह पर चलने का आह्वान

आगामी चुनावी परिदृश्य का जिक्र करते हुए मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जो देश की राजनीति के लिए बेहद अहम मोड़ साबित होंगे। उन्होंने समाज के सभी वर्गों—विशेष रूप से Gen-Z, छात्रों, युवाओं, दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों, किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों से अपील की कि वे अपने बेहतर भविष्य और संविधान की रक्षा के लिए बीएसपी का हाथ मजबूत करें। उन्होंने कहा कि बीएसपी ही देश की एकमात्र सच्ची अंबेडकरवादी पार्टी है जो 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' के सिद्धांत पर काम करती है।

मायावती के इस आक्रामक रुख से साफ है कि बहुजन समाज पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों में युवाओं और Gen-Z को अपनी मुख्य चुनावी रणनीति का हिस्सा बनाने जा रही है। एक तरफ जहां आकाश आनंद जमीनी स्तर पर जाकर युवाओं से सीधा संवाद स्थापित कर रहे हैं और विरोधियों पर तीखे जुबानी हमले बोल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मायावती अपने प्रशासनिक अनुभव और नीतिगत गारंटियों के जरिए युवाओं का भरोसा जीतने की कोशिश कर रही हैं। बीएसपी का यह नया 'Gen-Z आउटरीच' देश के राजनीतिक समीकरणों को नया आकार दे सकता है। अब देखना यह होगा कि क्या देश का युवा वर्ग भाजपा और कांग्रेस के परस्पर राजनीतिक द्वंद्व से निकलकर मायावती की इस अपील पर भरोसा जताता है या नहीं।