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July 22 2026 04:09 pm

बाबा श्याम के भक्तों के लिए बड़ी खबर, 19 घंटे बंद रहेंगे मंदिर के कपाट; जानें कब से होंगे दर्शन

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सीकर/खाटू (डिजिटल डेस्क): यदि आप भी 'हारे के सहारे' बाबा श्याम के दरबार में हाजिरी लगाने या अपनी अर्जी लेकर राजस्थान के सीकर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो यह जरूरी खबर आपके लिए ही है। विश्व प्रसिद्ध खाटू श्याम जी मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए अस्थाई रूप से बंद कर दिए गए हैं। श्री श्याम मंदिर कमेटी ने आधिकारिक सूचना जारी कर भक्तों से इस अवधि के दौरान मंदिर न पहुंचने की अपील की है ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।

आइए जानते हैं कि मंदिर प्रशासन ने कपाट बंद करने का निर्णय क्यों लिया है और आज किस समय से भक्त अपने आराध्य के दर्शन दोबारा कर पाएंगे।

क्यों बंद किए गए बाबा श्याम के कपाट?

खाटू श्याम मंदिर की सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार, हर महीने अमावस्या के बाद बाबा श्याम का विशेष तिलक और अलौकिक श्रृंगार किया जाता है। इस मुख्य अनुष्ठान को पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न किया जाता है।

श्रृंगार की अनूठी विधि: इस विशेष पूजा के दौरान बाबा श्याम के मस्तक पर चंदन, केसर और अन्य सुगंधित पदार्थों का लेप लगाकर विशेष तिलक तैयार किया जाता है। इस पूरी आध्यात्मिक प्रक्रिया को संपन्न होने में लगभग 8 से 10 घंटे या उससे अधिक का समय लगता है, जिसके चलते इस दौरान गर्भगृह में आम भक्तों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित रहता है।

जानिए किस तारीख और कितने बजे खुलेंगे बाबा के द्वार

श्री श्याम मंदिर कमेटी के कोषाध्यक्ष रवि सिंह चौहान द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार:

कपाट बंद होने का समय: बाबा श्याम का मंदिर 18 जून 2026 की रात 10:00 बजे से दर्शनार्थियों के लिए बंद कर दिया गया था।

कपाट खुलने का समय: विशेष पूजा और महा-श्रृंगार के पूरा होने के बाद, आज यानी 19 जून 2026 को शाम 5:00 बजे बाबा श्याम के कपाट दोबारा खोल दिए जाएंगे।

शाम 5:00 बजे के बाद से सभी श्रद्धालु और देश-विदेश से आए भक्त पहले की तरह बाबा श्याम के दर्शन कर सकेंगे और अपनी मनोकामनाओं की अर्जी लगा सकेंगे।

'हारे का सहारा' बाबा श्याम: क्या है पौराणिक इतिहास?

राजस्थान के सीकर जिले के खाटू गांव में स्थित यह भव्य मंदिर महाभारत काल के महान योद्धा और भीम के पौत्र बर्बरीक को समर्पित है। इन्हें कलयुग में साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का अवतार माना जाता है।

शीश के दानी की कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत युद्ध के समय बर्बरीक जब कौरवों की हारती हुई सेना की मदद के लिए युद्ध मैदान में उतरने वाले थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण का रूप धरकर उनसे उनका शीश दान में मांग लिया था। धर्म की रक्षा के लिए बर्बरीक ने बिना संकोच किए अपना शीश काटकर प्रभु के चरणों में रख दिया।

श्रीकृष्ण का वरदान: बर्बरीक के इस परम बलिदान से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलयुग में तुम मेरे सबसे प्रिय नाम 'श्याम' से पूजे जाओगे। आज मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से खाटू दरबार में हाजिरी लगाता है, बाबा श्याम उसकी खाली झोली खुशियों से भर देते हैं।