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August 04 2026 07:07 pm

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की चमक फीकी: बार-बार सड़क धंसने और महंगे टोल से 30% वाहन पुराने हाईवे पर लौटे

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तेज रफ्तार और कम समय में सफर का वादा करने वाला लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे अपने उद्घाटन के बाद से ही लगातार सुर्खियों और सवालों के घेरे में है। हालांकि शुरुआत में यह एक्सप्रेसवे कानपुर और लखनऊ के बीच सफर करने वाले यात्रियों की पहली पसंद बना था, लेकिन बार-बार सड़क धंसने, लगातार मरम्मत कार्यों, डायवर्जन और अधिक टोल शुल्क के चलते बड़ी संख्या में लोग अब दोबारा पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highway) का रुख करने लगे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, शुरुआत में इसका इस्तेमाल करने वाले करीब 30 फीसदी वाहन वापस पुराने हाईवे पर लौट आए हैं।

बार-बार सड़क धंसने और महंगे टोल से यात्री परेशान

63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे पर 14 जुलाई को इसके शुरू होने के बाद से अब तक पाँच बार सड़क धंसने और क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हर बार मरम्मत के लिए बैरिकेडिंग और डायवर्जन लगाना पड़ा है, जिससे तेज और सुगम यात्रा का दावा प्रभावित हुआ है।

टोल टैक्स का भारी अंतर: जाजमऊ के लेदर कारोबारी फरहान का कहना है कि एक्सप्रेसवे पर एक तरफ का टोल करीब 290 रुपये है, जबकि पुराने हाईवे से सफर करने पर लगभग 100 रुपये ही टोल चुकाना पड़ता है। वहीं, लखनपुर के अमित त्रिवेदी का कहना है कि इन दिक्कतों के चलते नीचे पुराने हाईवे से ही आवागमन अधिक बेहतर लग रहा है।

ट्रैफिक में भारी गिरावट: एनएचएआई (NHAI) के सूत्रों के मुताबिक, जहाँ पहले इस एक्सप्रेसवे पर रोजाना औसतन 22 से 24 हजार वाहन गुजरते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर 18 से 20 हजार रह गई है।

AI निर्माण के दावों की खुली पोल

इस एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान एनएचएआई ने बड़े-बड़े दावे किए थे कि देश में पहली बार स्वचालित इंटेलिजेंट मशीनों (AIMC) का इस्तेमाल करके काम की रफ्तार, सामग्री की गुणवत्ता और मात्रा की सीधे मंत्रालय स्तर पर निगरानी की जा रही है। 4,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बने इस प्रोजेक्ट को लेकर दावा किया गया था कि अगले 10 साल तक इस सड़क पर न तो गड्ढे होंगे और न ही यह धंसेगी, लेकिन शुरुआती महीनों में ही सतह खराब होने से इन दावों पर सवालिया निशान लग गए हैं।

NHAI का क्या है पक्ष?

यात्रियों के मोहभंग और बार-बार हो रही तकनीकी कमियों पर एनएचएआई अधिकारियों का अलग तर्क है। एनएचएआई से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि ट्रैफिक में आई इस गिरावट की वजह एक्सप्रेसवे की दुश्वारियाँ नहीं, बल्कि शुरुआत में बड़ी संख्या में उन लोगों का आना था जो सिर्फ इस नए मार्ग का जायजा लेना चाहते थे। अधिकारियों का कहना है कि छह महीने बाद ही औसत ट्रैफिक का वास्तविक आकलन सामने आ पाएगा।

इसके अलावा, लखनऊ स्थित एनएचएआई क्षेत्रीय कार्यालय ने सोशल मीडिया पर सामने आई शिकायतों के बाद स्पष्ट किया है कि फिलहाल सड़क पर जितनी भी दिक्कतें थीं, उनकी मरम्मत का काम पूरी तरह पूरा करा लिया गया है और अब एक्सप्रेसवे पर यातायात पूरी तरह सामान्य है।