8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट को लेकर एक्शन तेज, अक्टूबर में 2 अहम बैठकें; लेवल 8 कर्मचारियों की सैलरी में कितना होगा इजाफा?
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव लाने के लिए गठित आठवां वेतन आयोग (8th Pay Commission) तय समयसीमा के भीतर अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपने की दिशा में पूरी सक्रियता से जुट गया है। वेतन आयोग द्वारा विभिन्न राज्यों और प्रमुख शहरों में कर्मचारी संगठनों व अन्य हितधारकों के साथ परामर्श का दौर जारी है। इसी सिलसिले में अक्टूबर 2026 के दौरान आयोग की दो अत्यंत महत्वपूर्ण बैठकें प्रस्तावित हैं। माना जा रहा है कि इन बैठकों के संपन्न होते ही आयोग अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देकर ड्राफ्ट रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर देगा।
आयोग की हलचल तेज होते ही केंद्रीय कर्मचारियों के बीच नए वेतन मैट्रिक्स और फिटमेंट फैक्टर को लेकर उत्सुकता चरम पर है। कर्मचारी अपने-अपने पे-लेवल के आधार पर सैलरी में होने वाली संभावित बढ़ोतरी का गणित समझने में लगे हैं। किसी भी वेतन आयोग में कर्मचारियों के वेतन निर्धारण की रीढ़ 'फिटमेंट फैक्टर' ही होता है, जो यह तय करता है कि नई बेसिक पे किस स्तर तक पहुंचेगी।
अक्टूबर में 2 अहम बैठकें: बेंगलुरु और मुंबई में होगा बड़ा मंथन
वेतन आयोग ने देश के अलग-अलग हिस्सों में कर्मचारियों, ट्रेड यूनियनों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ व्यापक संवाद की नीति अपनाई है। इससे पहले चंडीगढ़, चेन्नई, पुडुचेरी और जयपुर में विस्तृत चर्चाएं संपन्न हो चुकी हैं। अब आयोग का पूरा ध्यान अक्टूबर में होने वाले दो बड़े सम्मेलनों पर है:
बेंगलुरु बैठक: 7 और 8 अक्टूबर 2026 को आयोग की पहली अहम बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें दक्षिण भारत के कर्मचारी प्रतिनिधियों और तकनीकी विभागों से जुड़े मुद्दों पर मंथन होगा।
मुंबई बैठक: इसके बाद 22 और 23 अक्टूबर 2026 को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में दूसरी बड़ी बैठक होगी।
इन दोनों बैठकों में वेतन विसंगतियों को दूर करने, न्यूनतम वेतन सीमा तय करने, भत्तों के युक्तिकरण और सबसे महत्वपूर्ण 'फिटमेंट फैक्टर' के फॉर्मूले पर गहन चर्चा की जाएगी। इन बैठकों से मिलने वाले इनपुट्स आयोग की अंतिम सिफारिशों का आधार बनेंगे।
सैलरी निर्धारण में फिटमेंट फैक्टर की अहम भूमिका
केंद्रीय कर्मचारियों के नए वेतन निर्धारण में फिटमेंट फैक्टर का सबसे बड़ा योगदान होता है। सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission) के समय सरकार ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया था, जिसके आधार पर तत्कालीन 6वें वेतन आयोग की बेसिक पे को 2.57 से गुणा करके नई न्यूनतम बेसिक पे 18,000 रुपये तय की गई थी।
आठवें वेतन आयोग के तहत भी यही व्यवस्था लागू होगी। नए वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार फिटमेंट फैक्टर सीधे तौर पर मौजूदा बेसिक पे पर लागू किया जाएगा। नई बेसिक पे तय हो जाने के बाद उस पर तत्कालीन दर से महंगाई भत्ता (DA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) जैसे घटक जोड़े जाएंगे। हालांकि, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि बेसिक सैलरी में होने वाली बड़ी बढ़ोतरी और हाथ में आने वाली ग्रॉस या इन-हैंड सैलरी में वास्तविक इजाफा दो अलग पहलू होते हैं, क्योंकि नए पे कमीशन के लागू होते ही पुराना डीए शून्य (शून्य प्रतिशत) से दोबारा शुरू होता है।
लेवल 8 के कर्मचारियों की सैलरी में कितना हो सकता है इजाफा?
केंद्रीय सेवाओं में लेवल 8 (Grade Pay 4800) एक महत्वपूर्ण संवर्ग माना जाता है, जिसमें अनुभाग अधिकारी (Section Officer) और समकक्ष राजपत्रित/गैर-राजपत्रित पद शामिल होते हैं। मान लीजिए कि किसी लेवल 8 कर्मचारी की मौजूदा बेसिक सैलरी 47,600 रुपये है और वर्तमान डीए तथा भत्तों के साथ उसकी ग्रॉस सैलरी लगभग 90,440 रुपये प्रति माह के आसपास बैठती है।
यदि 8वें वेतन आयोग में विभिन्न फिटमेंट फैक्टर्स की सिफारिश की जाती है, तो उनकी बेसिक सैलरी पर इसका सीधा असर इस प्रकार दिखेगा:
2.00 के फिटमेंट फैक्टर पर: यदि आयोग न्यूनतम 2.00 का फिटमेंट फॉर्मूला लागू करता है, तो 47,600 रुपये की बेसिक सैलरी बढ़कर सीधे 95,200 रुपये हो जाएगी। इस नई बेसिक पे के आधार पर एचआरए और टीए जुड़ने के बाद कर्मचारी की कुल ग्रॉस सैलरी 1 लाख रुपये के आंकड़े को आसानी से पार कर जाएगी।
2.25 के फिटमेंट फैक्टर पर: यदि फिटमेंट फैक्टर 2.25 तय होता है, तो नई बेसिक सैलरी उछलकर करीब 1,07,100 रुपये के स्तर पर पहुंच जाएगी।
2.57 के फिटमेंट फैक्टर पर (7वें वेतन आयोग जैसा अनुपात): यदि आयोग 7वें वेतन आयोग के समान 2.57 का अनुपात बरकरार रखता है, तो बेसिक पे बढ़कर 1,22,332 रुपये हो जाएगी।
2.86 के फिटमेंट फैक्टर पर (कर्मचारी संघों की मांग के अनुरूप): यदि कर्मचारी संगठनों की अधिकतम मांग (लगभग 2.86 से 3.00) के करीब सहमति बनती है, तो लेवल 8 के कर्मचारी की नई बेसिक पे 1,36,136 रुपये तक पहुंच सकती है।
अंतिम सिफारिशों और कैबिनेट की मंजूरी पर टिकी निगाहें
आयोग के स्तर पर तैयार होने वाली रिपोर्ट केवल एक सिफारिशी प्रारूप होती है। वास्तविक फिटमेंट फैक्टर, नई पे मैट्रिक्स टेबल, न्यूनतम मूल वेतन और भत्तों की पुनर्गठित संरचना का अंतिम निर्णय केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) की औपचारिक स्वीकृति के बाद ही लागू होता है।
वर्तमान में चल रही बैठकों से यह संकेत अवश्य मिल रहा है कि आयोग तय समयसीमा में काम पूरा करने को लेकर गंभीर है। अक्टूबर की बैठकों के बाद जैसे ही ड्राफ्टिंग का काम शुरू होगा, पे मैट्रिक्स के सटीक आंकड़े और ज्यादा स्पष्ट होकर सामने आएंगे।