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September 29 2026 12:00 am

तुकाराम मुंढे को संजय राउत का पत्र, वसूली के रेट 10 हजार से 2 लाख पहुंचने का आरोप

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महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के सख्त और तेज-तर्रार रुख को लेकर लगातार सुर्खियों में बने रहने वाले आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे के विभाग पर अब तक का सबसे बड़ा और सनसनीखेज आरोप लगा है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे को एक पत्र लिखकर विभाग के अधिकारियों द्वारा छोटे व्यापारियों और रेस्टोरेंट संचालकों से की जा रही कथित 'खुली लूट' का कच्चा-चिट्ठा खोल दिया है।

राउत ने जहां एक ओर मिलावटी दूध, नकली पनीर और एक्सपायरी उत्पादों के खिलाफ मुंढे के नेतृत्व में की गई कार्यवाहियों की सराहना की, वहीं दूसरी ओर विभाग की जमीनी हकीकत को उजागर करते हुए कहा कि तुकाराम मुंढे के खौफ और 'दहशत' की आड़ में एफडीए के अधिकारी अब व्यापारियों से बेतहाशा वसूली कर रहे हैं।

'पहले रेट 10 से 12 हजार था, अब 75 हजार से 2 लाख हो गया'

संजय राउत ने पत्र में चौंकाने वाले आंकड़ों का दावा करते हुए लिखा कि मुंढे के एफडीए कमिश्नर बनने से पहले व्यापारियों को प्रतिष्ठान बंद करने (Closing Notice) का डर दिखाकर अधिकारी 10,000 से 12,000 रुपये तक की वसूली करते थे। लेकिन जब से मुंढे ने ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू की है, अधिकारियों ने व्यापारियों में उनके नाम का ऐसा डर बैठा दिया है कि 'क्लोजिंग नोटिस' को दबाने का रेट बढ़कर 75,000 रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक पहुंच गया है।

राउत ने कहा कि जब सिस्टम में कोई बड़ा प्रशासनिक अधिकारी कड़े तेवर दिखाता है, तो नीचे के भ्रष्ट अधिकारी इसे वसूली का नया औजार बना लेते हैं। व्यापारी अब दोहरी मार झेल रहे हैं—एक तरफ कार्रवाई का डर और दूसरी तरफ अधिकारियों की बेखौफ उगाही।

बांद्रा हेडक्वार्टर और ठाणे ऑफिस बने 'वसूली के मुख्य अड्डे'

शिवसेना (UBT) नेता ने अपने पत्र में मुंबई के बांद्रा स्थित एफडीए मुख्यालय और ठाणे के संभागीय कार्यालय को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कार्यालयों में खुलेआम पैसे मांगे जा रहे हैं।

राउत ने कई गंभीर उदाहरण पेश करते हुए आरोप लगाए:

ठाणे में 17-18 लाख की उगाही का आरोप: पत्र में दावा किया गया कि ठाणे के अधिकारियों ने एक क्विक-कॉमर्स कंपनी का निलंबित लाइसेंस बहाल कराने के बदले कथित रूप से 17 से 18 लाख रुपये की मांग की।

राज्यभर से आ रही शिकायतें: राउत ने लिखा कि केवल मुंबई ही नहीं, बल्कि नागपुर, पुणे, सोलापूर, वर्धा और छत्रपति संभाजीनगर से भी कई छोटे और मध्यम व्यापारी उनके पास क्लोजिंग नोटिस के नाम पर हो रही लूट की शिकायतें लेकर पहुंचे हैं।

फर्जी शिकायतों पर टारगेट: सोशल मीडिया पर बिना किसी ठोस सत्यापन के आने वाली शिकायतों के आधार पर भी अधिकारियों द्वारा सीधे लाइसेंस निलंबन की धमकी दी जाती है।

'छोटे उद्योगों पर हमला और मजबूत फार्मा लॉबी पर चुप्पी क्यों?'

संजय राउत ने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए लिखा कि एफडीए के कानून में पहले निरीक्षण, सुधार की मोहलत (Improvement Notice), और सुनवाई की तय प्रक्रिया होती है। लेकिन प्रक्रिया का पालन किए बिना सीधे 'शटडाउन' का भय दिखाकर वसूली करना खाद्य सुरक्षा नहीं, बल्कि सत्ता का दुरुपयोग और खुली डकैती है।

राउत ने फार्मास्युटिकल कंपनियों की लॉबी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि दवा क्षेत्र में भी गंभीर नियमों का उल्लंघन (Non-compliance) होता है, लेकिन राजनीतिक रसूख और चंदे के चलते उन पर हाथ डालने से बचा जाता है, जबकि छोटे दुकानदारों, ढाबा और रेस्टोरेंट संचालकों पर पूरी ताकत झोंक दी जाती है।

संजय राउत ने रखीं 3 प्रमुख मांगें

तुकाराम मुंढे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को संबोधित करते हुए संजय राउत ने मामले को गंभीरता से लेने की अपील की और ये मांगें रखीं:

स्वतंत्र जांच कमेटी का गठन: बांद्रा, ठाणे और अन्य जिलों में जारी किए गए 'क्लोजिंग नोटिस' और उनके सेटलमेंट के खेल की एक निष्पक्ष जांच कराई जाए।

भ्रष्ट अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई: प्रक्रिया का उल्लंघन कर लाइसेंस रद्द करने की धमकी देने वाले अधिकारियों पर सख्त कानूनी एक्शन हो।

पारदर्शिता और डिजिटल रिकॉर्ड: विभाग द्वारा निलंबित किए गए और दोबारा बहाल किए गए सभी लाइसेंसों की तारीख, कारण और सुनवाई का ब्योरा सार्वजनिक पोर्टल पर डिजिटल रूप से जारी किया जाए।

राउत ने अपने पत्र के अंत में तल्ख लहजे में कहा कि यदि आप खुद व्यवस्था में सुधार का दावा करते हैं लेकिन अपने ही मातहत अधिकारियों की लूट पर आपका कोई नियंत्रण नहीं है, तो यह सुधार पूरी तरह अधूरा और दिखावटी है।