प्रेमानंद महाराज के आश्रम में शिष्य रसिक दुलारी संग आखिरी 11 मिनट में क्या हुआ?
वृंदावन स्थित विख्यात संत प्रेमानंद गोविंद शरण महाराज के 'श्री हित राधा केली कुंज आश्रम' से एक अत्यंत दुखद और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। आश्रम में ठाकुर जी की सेवा और संतों के भोग की तैयारी में जुटी महिला सेवादार शिष्या रसिक दुलारी (मूल नाम सुमित्रा देवी) एक भयानक औद्योगिक दुर्घटना का शिकार हो गईं। रोज की तरह भक्ति भाव और राधा नाम के संकीर्तन के बीच चल रही भोग निर्माण की सेवा के दौरान अचानक आटा/मसाला पीसने वाली बड़ी ग्राइंडर मशीन में उनके कपड़े फंस गए। महज कुछ ही पलों के भीतर यह हादसा इतना विकराल हो गया कि मौके पर मौजूद सेवादारों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
इस घटना के बाद से ही आश्रम से जुड़े श्रद्धालुओं और भक्तों के बीच शोक की लहर है। प्रत्यक्षदर्शियों और सामने आए विवरण के अनुसार, उस वक्त रसोई में भजन गूंज रहे थे और सेवा पूरी तन्मयता से चल रही थी, लेकिन अगले 11 मिनटों में जो कुछ घटा, उसने सभी को स्तब्ध कर दिया।
तड़के का समय, गूंज रहे थे भजन और चल रही थी भोग सेवा
केली कुंज आश्रम की परंपरा के अनुसार प्रतिदिन तड़के ही ठाकुर जी के भोग, संतों और आश्रम में आने वाले भक्तों के लिए प्रसाद तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। रसिक दुलारी, जो पिछले कई वर्षों से सांसारिक जीवन त्यागकर प्रेमानंद महाराज के सानिध्य में वृंदावन में रहकर सेवा कर रही थीं, रसोई और भोग सेवा का अभिन्न हिस्सा थीं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रसोई में अन्य सेवादार भी मौजूद थे। पृष्ठभूमि में लाउडस्पीकर पर संकीर्तन और राधा नाम के पद चल रहे थे। रसिक दुलारी भोग के लिए सामग्री पीसने के काम में जुटी हुई थीं। इसके लिए रसोई में लगा बड़ा कमर्शियल इलेक्ट्रिक ग्राइंडर चालू था। सब कुछ सामान्य रूप से चल रहा था, लेकिन किसी को अंदेशा नहीं था कि चंद पलों में क्या अनहोनी होने वाली है।
दुपट्टा या साड़ी का पल्लू फंसा: अचानक हुई दुर्घटना
हादसा उस वक्त हुआ जब रसिक दुलारी सामग्री डालने या मशीन के पास झुकीं। अचानक उनके वस्त्र (दुपट्टा या साड़ी का छोर) तेज गति से घूम रही ग्राइंडर की मोटर और ब्लेड शाफ्ट की चपेट में आ गए।
मशीन की मोटर इतनी शक्तिशाली थी कि उसने कपड़े को अपनी तरफ खींच लिया और रसिक दुलारी संभल नहीं सकीं। कपड़े के साथ ही उनका सिर और शरीर का ऊपरी हिस्सा तेजी से घूमते हुए ग्राइंडर के ब्लेड और शाफ्ट में खिंचता चला गया। जब तक आसपास मौजूद अन्य सेवादार चीख-पुकार सुनकर कुछ समझ पाते, मशीन के भारी रोटर ने उन्हें बुरी तरह अपनी चपेट में ले लिया था।
वो आखिरी 11 मिनट: चीख-पुकार, पावर कट और मशीन काटने की जद्दोजहद
हादसा होते ही रसोई में अफरा-तफरी मच गई। साथी सेवादारों ने तुरंत दौड़कर ग्राइंडर का मुख्य पावर स्विच बंद किया, लेकिन तब तक रसिक दुलारी का शरीर मशीन में बुरी तरह उलझ चुका था:
मशीन को खोलने की कोशिश: सेवादारों ने तुरंत उन्हें बाहर खींचने की कोशिश की, लेकिन कपड़े और शरीर के अंग मशीन के आंतरिक हिस्सों में इतने जटिल तरीके से फंस चुके थे कि हाथ से निकालना नामुमकिन था।
उपकरणों और कटर की तलाश: आश्रम के अन्य कर्मी टूल्स, रिंच और लोहे को काटने वाले औजार लेकर दौड़े। मशीन के नट-बोल्ट और आउटर केसिंग को काटकर उन्हें अलग करने की कोशिश की गई।
गंभीर रक्तस्राव और दर्दनाक स्थिति: ग्राइंडर के ब्लेड से सिर और गर्दन के हिस्से में गंभीर चोटें आई थीं और अत्यधिक खून बह रहा था। लगभग 10 से 11 मिनट की कड़ी मशक्कत और जद्दोजहद के बाद मशीन के हिस्सों को ढीला कर उन्हें बाहर निकाला जा सका।
अस्पताल पहुंचने से पहले ही थम गईं सांसें
गंभीर रूप से लहूलुहान अवस्था में रसिक दुलारी को तुरंत आश्रम के वाहन से नजदीकी अस्पताल (रामकृष्ण मिशन अस्पताल/जिला अस्पताल) ले जाया गया। लेकिन घाव इतने गहरे थे और अत्यधिक रक्त बह जाने के कारण रास्ते में ही उनकी सांसें थम चुकी थीं। अस्पताल के चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटना स्थल का मुआयना किया, पंचनामा भरा और शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। पुलिस और आश्रम प्रबंधन दोनों ने पुष्टि की कि यह पूरी तरह से एक अप्रत्याशित और दुर्भाग्यपूर्ण तकनीकी हादसा था।
आश्रम में शोक, संत प्रेमानंद महाराज ने जताया गहरा दुख
इस हृदयविदारक हादसे की सूचना जब संत प्रेमानंद महाराज को मिली, तो आश्रम का माहौल पूरी तरह शोकाकुल हो गया। महाराज जी ने अपनी प्रिय शिष्या और समर्पित सेवादार के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भगवत सेवा और धाम में देह त्यागना निश्चित रूप से आत्मा की सद्गति का मार्ग प्रशस्त करता है, लेकिन जिस तरह से यह हादसा हुआ, उसने सभी को गहरा आघात पहुंचाया है।
आश्रम प्रबंधन ने इस घटना के बाद भोगशाला में लगी सभी मशीनों, ग्राइंडर और विद्युत उपकरणों के चारों ओर अतिरिक्त सुरक्षा गार्ड्स और सेफ्टी मैकेनिज्म लगाने के निर्देश दिए हैं ताकि भविष्य में इस तरह की किसी भी मानवीय या तकनीकी चूक से बचा जा सके।