BREAKING:
July 25 2026 12:52 pm

26/11 हमले से पहले भारत में ठहरा था तहव्वुर राणा, NIA की पूछताछ में किए बड़े खुलासे

Post

India News Live,Digital Desk : 2008 में मुंबई पर हुए आतंकी हमलों का अहम साजिशकर्ता तहव्वुर हुसैन राणा अब एनआईए की गिरफ्त में है और उससे हो रही पूछताछ में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उससे गहन पूछताछ की, जिसमें राणा ने खुद स्वीकार किया कि उसने डेविड कोलमैन हेडली को हमलों के मुख्य निशानों की पहचान में मदद की थी, जिसमें छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस भी शामिल है।

सेना से भगोड़ा बना आतंकी मददगार

राणा ने बताया कि उसने 1986 में पाकिस्तान के रावलपिंडी स्थित आर्मी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया था और बाद में पाकिस्तानी सेना में कैप्टन डॉक्टर के रूप में नियुक्त हुआ। उसे कई संवेदनशील क्षेत्रों जैसे सिंध, बलूचिस्तान, बहावलपुर और सियाचिन में तैनात किया गया। लेकिन सियाचिन में रहने के दौरान उसे पल्मोनरी एडिमा नामक बीमारी हो गई, जिससे वह ड्यूटी पर नहीं जा सका और उसे सेना से भगोड़ा घोषित कर दिया गया।

आतंक की साजिश में कैसे शामिल हुआ?

राणा ने बताया कि वह इसलिए हेडली की साजिश में शामिल हुआ क्योंकि हेडली ने उसका नाम पाकिस्तानी सेना की नजरों में साफ कराने का झांसा दिया था। उसने दावा किया कि पाकिस्तानी सेना, जो आतंकवादियों का समर्थन करती है, उस पर भरोसा करने लगी थी और उसे खाड़ी युद्ध के दौरान एक सीक्रेट मिशन पर सऊदी अरब भी भेजा गया था।

दुनिया में घूम चुका है राणा

पकड़े जाने से पहले राणा कनाडा में रह रहा था। इससे पहले वह जर्मनी, ब्रिटेन और अमेरिका में भी रहा और मीट प्रोसेसिंग, किराने और रियल एस्टेट जैसे व्यवसायों में हाथ आजमाया।

हेडली से पुराना रिश्ता

राणा और हेडली की दोस्ती 1974 से 1979 के बीच हसन अब्दाल कैडेट कॉलेज में हुई थी। राणा ने बताया कि हेडली अपनी सौतेली मां से झगड़े के बाद अमेरिका चला गया और वहीं बस गया। राणा का कहना है कि हेडली ने उसे बताया था कि वह लश्कर-ए-तैयबा के तीन प्रशिक्षण शिविरों में भी शामिल हुआ था।

हमलों से पहले मुंबई में मौजूद था राणा

पूछताछ में राणा ने माना कि वह हमलों से कुछ दिन पहले भारत आया था और 20-21 नवंबर को मुंबई के पवई इलाके के एक होटल में ठहरा था। इसके बाद वह दुबई होते हुए बीजिंग चला गया। एनआईए की चार्जशीट के मुताबिक, राणा ने ही इमिग्रेंट लॉ सेंटर नाम की एक फर्जी कंपनी शुरू की थी, जिसके जरिए हेडली भारत के विभिन्न शहरों का दौरा कर पाया। यह कंपनी आतंकियों की जासूसी गतिविधियों को छिपाने का जरिया थी।

फर्जी दस्तावेज और ISI से कनेक्शन

राणा ने पूछताछ में माना कि उसने हेडली के लिए भारत में घुसने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कराए थे। उसने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI और लश्कर-ए-तैयबा से सीधे संपर्क में होने की बात भी कबूली है। उसने साजिद मीर, अब्दुल रहमान पाशा और मेजर इकबाल जैसे ISI अफसरों को भी जानने की बात स्वीकार की, जिन पर हमले की साजिश रचने के आरोप हैं।

गवाहों की पुष्टि

2023 में दाखिल 405 पन्नों की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में बताया गया है कि राणा ने छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस जैसी जगहों की पहचान में हेडली की मदद की थी। अब तक 14 गवाहों ने उसके रोल की पुष्टि कर दी है।