June 27 2026 01:59 am

रेंटल एग्रीमेंट सिर्फ़ 11 महीने का ही क्यों होता है? जानिए इसके पीछे की कानूनी और व्यावहारिक वजहें

Post

India News Live,Digital Desk : देश भर से लोग काम की तलाश में बड़े शहरों में आते हैं। यहाँ वे किराए के मकानों में रहकर अपना गुज़ारा करते हैं। बाहर से आने वाले लोगों को घर किराए पर देते समय रेंटल एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य होता है। सुरक्षा की दृष्टि से इसे ज़रूरी माना जाता है और इस एग्रीमेंट में कई तरह की जानकारियाँ लिखी होती हैं। लेकिन यह एग्रीमेंट सिर्फ़ 11 महीनों के लिए ही होता है। यह पूरे साल के लिए नहीं होता। अब आप सोच रहे होंगे कि अगर साल में 12 महीने होते हैं, तो 11 महीने का एग्रीमेंट क्यों किया जाता है? 

11 महीने की अवधि के लिए किराये का समझौता

हममें से ज़्यादातर लोगों ने या तो घर किराए पर लिया है या किराए के घर में रह रहे हैं। हमारे देश में किराए के घर में रहने के लिए, किरायेदारों को मकान मालिक के साथ एक निश्चित अवधि के लिए कानूनी किराया समझौता करना पड़ता है। यह समझौता एक निश्चित अवधि के लिए होता है। ज़्यादातर मकान मालिक कम से कम 11 महीने की अवधि के लिए किराया समझौता तैयार करते हैं।

किरायेदार और मालिक के अधिकार और जिम्मेदारियाँ

रेंटल एग्रीमेंट एक प्रकार का अनुबंध होता है जो यह बताता है कि किरायेदार संपत्ति को कैसे किराए पर लेगा और किरायेदार व मकान मालिक के अधिकार व ज़िम्मेदारियाँ क्या होंगी। इसमें मासिक किराया, संपत्ति का उपयोग, सुरक्षा जमा, किराये की अवधि और अन्य बातें शामिल हैं।

केवल 11 महीने के लिए रेंटल एग्रीमेंट करने के पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि मकान मालिक बाद में कानूनी झंझटों से बचना चाहते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि कानूनी तौर पर ऐसे पट्टों में, जहाँ एग्रीमेंट लंबी अवधि के लिए होता है, किराया, किरायेदारी और अवधि जैसे शब्दों का अक्सर इस्तेमाल होता है। इससे दूसरे पक्ष (किरायेदार) द्वारा रेंट कंट्रोल एक्ट के तहत संपत्ति को आगे भी किराए पर देने की संभावना बढ़ जाती है। विवाद की स्थिति में, रेंट टेनेंसी एक्ट के दायरे में आने वाला यह एग्रीमेंट लंबी अदालती लड़ाई का कारण बन सकता है।

एक वर्ष से अधिक की अवधि के लिए पट्टा समझौता अनिवार्य

पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 17 के अनुसार, एक वर्ष से अधिक अवधि के लिए पट्टा समझौते का पंजीकरण अनिवार्य है। इसका अर्थ है कि 12 महीने से कम अवधि के लिए किराया समझौता बिना पंजीकरण के भी किया जा सकता है। यह विकल्प पक्षकारों को उप-पंजीयक कार्यालय में दस्तावेज़ को पंजीकृत कराने और उसकी फीस चुकाने की बोझिल प्रक्रिया से बचाता है।

इसके अलावा, एक साल से कम समय के लिए किरायेदारी होने पर पंजीकरण न कराने से स्टाम्प शुल्क की लागत भी बचती है। इसलिए आमतौर पर, मकान मालिक और किरायेदार इतनी ज़्यादा फीस देने से बचने के लिए आपसी सहमति से अनुबंध को पंजीकृत न कराने का फैसला करते हैं। क्योंकि नियमों के अनुसार, किरायेदारी की अवधि जितनी लंबी होगी, स्टाम्प शुल्क उतना ही ज़्यादा होगा।

रेंटल एग्रीमेंट को रजिस्टर कराने के बजाय, ज़्यादातर मकान मालिक और किरायेदार इसे नोटरीकृत करवाते हैं। इसमें किराए के मकान, फ्लैट, कमरे आदि का पता, वर्तमान स्थिति और नियम व शर्तें, और दोनों पक्षों व गवाहों के हस्ताक्षर होते हैं। किसी भी पक्ष द्वारा नोटिस दिए जाने के बाद, इस एग्रीमेंट को एक निश्चित समय पर समाप्त किया जा सकता है। इसके अलावा, ज़रूरत पड़ने पर इसे आसानी से रिन्यू भी किया जा सकता है।