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August 08 2026 07:24 pm

कामिका एकादशी 2026: 9 अगस्त को सुबह 4:22 बजे से है पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त, जानें शुभ चौघड़िया, विधि और अचूक उपाय

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हिंदू पंचांग और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को 'कामिका एकादशी' के नाम से जाना जाता है। इस पावन दिन जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु और देवों के देव महादेव दोनों की एक साथ पूजा-अर्चना की जाती है। चूंकि सावन का महीना शिवजी को समर्पित होता है, इसलिए सावन मास में पड़ने वाली इस एकादशी का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से व्यक्ति के समस्त पापों का नाश होता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस वर्ष कामिका एकादशी का व्रत 9 अगस्त 2026 को रखा जाएगा, क्योंकि उदया तिथि इसी दिन प्राप्त हो रही है। आइए जानते हैं कामिका एकादशी के सभी शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और विशेष उपायों के बारे में।

कामिका एकादशी 2026: शुभ तिथि और समय

हिंदू पंचांग के अनुसार, श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 8 अगस्त को दोपहर 01:59 मिनट से होगा और इसका समापन 9 अगस्त को सुबह 11:04 मिनट पर होगा। चूंकि उदया तिथि 9 अगस्त को मिल रही है, इसलिए व्रत और पूजन इसी दिन किया जाएगा। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त से ही पूजा के लिए कई अत्यंत शुभ योग बन रहे हैं, जिससे साधकों को दोगुना फल प्राप्त होगा।

कामिका एकादशी पर सुबह और दोपहर के शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:22 बजे से 05:04 बजे तक

प्रातः सन्ध्या: सुबह 04:43 बजे से 05:47 बजे तक

अमृत काल: सुबह 06:42 बजे से 08:09 बजे तक

चर (सामान्य): सुबह 07:27 बजे से 09:07 बजे तक

लाभ (उन्नति): सुबह 09:07 बजे से 10:47 बजे तक

द्विपुष्कर योग: सुबह 11:04 बजे से दोपहर 02:43 बजे तक

अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:53 बजे तक

विजय मुहूर्त: दोपहर 02:40 बजे से 03:33 बजे तक

कामिका एकादशी पर शाम और रात्रि के शुभ मुहूर्त

शुभ (उत्तम): दोपहर 02:06 बजे से शाम 03:46 बजे तक

गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:06 बजे से 07:27 बजे तक

सायाह्न सन्ध्या: शाम 07:06 बजे से रात 08:10 बजे तक

शुभ (उत्तम): शाम 07:06 बजे से रात 08:26 बजे तक

अमृत (सर्वोत्तम): रात 08:26 बजे से 09:46 बजे तक

निशिता मुहूर्त: रात 12:05 बजे से 12:48 बजे तक (10 अगस्त)

कामिका एकादशी की संपूर्ण पूजा विधि

एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और मंदिर की अच्छी तरह साफ-सफाई करें।

इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु और भोलेनाथ दोनों का जलाभिषेक करें और उनका पंचामृत तथा गंगाजल से स्नान कराएं।

भगवान शिव को सफेद चंदन और प्रिय श्वेत पुष्प अर्पित करें, जबकि भगवान विष्णु को पीला चंदन और पीले फूल बेहद प्रिय हैं, उन्हें वही अर्पित करें।

मंदिर में शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें और विधि-विधान से व्रत का संकल्प लें।

पूजा के दौरान कामिका एकादशी की व्रत कथा का पाठ करें और दोनों देवताओं के मंत्रों का जाप करें।

अंत में पूरी श्रद्धा के साथ श्री हरि विष्णु और भगवान शिव की आरती करें।

भगवान विष्णु को तुलसी दल सहित सात्विक चीजों का भोग लगाएं, लेकिन ध्यान रखें कि शिवजी के भोग में तुलसी का प्रयोग वर्जित है।

कामिका एकादशी पर क्या लगाएं भोग और करें उपाय?

भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए इस खास दिन पर गुड़ और चने की दाल, केले या पंचामृत का भोग लगाना बहुत शुभ माना जाता है। वहीं, भोलेनाथ को मखाने या मिश्री का भोग अर्पित करना चाहिए। इस दिन शिवजी को प्रसन्न करने के लिए शिव चालीसा का पाठ करें और विष्णु जी के मूल मंत्रों का जाप करें। इन उपायों को करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।