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May 04 2026 03:44 pm

Jyeshtha Purnima 2026: ज्येष्ठ पूर्णिमा पर बन रहा है बेहद शुभ संयोग, जानें सही तारीख, मुहूर्त और दान का महत्व

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India News Live, Digital Desk: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है। साल 2026 में ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा बेहद खास मानी जा रही है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान और भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन ही 'वट सावित्री पूर्णिमा' का व्रत भी रखा जाता है, जो अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए अनिवार्य माना गया है। आइए जानते हैं इस साल ज्येष्ठ पूर्णिमा की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और इसकी पौराणिक महत्ता।

2026 में ज्येष्ठ पूर्णिमा कब है? 

पंचांग की गणना के अनुसार, इस साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 30 मई 2026, शनिवार को पड़ रही है। शनिवार का दिन होने और पूर्णिमा तिथि का संयोग होने से यह दिन पितृ दोष से मुक्ति और शनि देव की शांति के उपायों के लिए भी अत्यंत फलदायी हो गया है। इस दिन सत्यनारायण भगवान की कथा सुनने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।

शुभ मुहूर्त और समय ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ और समापन का समय पूजा-पाठ के लिए बहुत महत्वपूर्ण है:

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 29 मई 2026 की रात से।

पूर्णिमा तिथि समापन: 30 मई 2026 की रात तक।

स्नान-दान का समय: 30 मई की सुबह सूर्योदय काल से ही पुण्य काल प्रारंभ हो जाएगा।

चंद्रोदय का समय: शाम के समय चंद्रमा की पूजा का विशेष फल मिलता है, जो रात लगभग 7:10 बजे के आसपास होगा।

पूजा विधि: ऐसे प्रसन्न होंगे श्री हरि और लक्ष्मी पूर्णिमा के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में किसी पवित्र नदी या घर पर ही गंगाजल डालकर स्नान करें। इसके बाद भगवान विष्णु के समक्ष दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लें। पूरे दिन फलाहार रहें और संध्या काल में माता लक्ष्मी के साथ विष्णु जी की विधिवत पूजा करें। इस दिन 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का निरंतर जाप करना चाहिए। रात में चंद्रमा को दूध और गंगाजल से अर्घ्य देने से मानसिक तनाव दूर होता है और चंद्र दोष से मुक्ति मिलती है।

दान का विशेष महत्व: घड़ा और फल का करें दान ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी के कारण इस पूर्णिमा पर शीतल वस्तुओं के दान का विधान है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन जल से भरा घड़ा, सत्तू, छाता, चप्पल और रसीले फलों (जैसे आम, तरबूज) का दान करने से कई जन्मों के पापों का नाश होता है। साथ ही, ज्येष्ठ पूर्णिमा पर वट वृक्ष (बरगद) की पूजा करने से महिलाओं को वैवाहिक सुख और संतान की दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।