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August 05 2026 08:50 pm

भारत ने विश्वेश नेगी को बनाया ईरान में नया राजदूत: पश्चिम एशिया के तनाव के बीच अहम कूटनीतिक कदम, एस जयशंकर ने ईरानी समकक्ष से की बात

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भारत सरकार ने पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव और कूटनीतिक हलचल के बीच ईरान में देश के नए राजदूत की नियुक्ति कर दी है। वरिष्ठ राजनियक विश्वेश नेगी को ईरान में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया गया है। विदेश मंत्रालय (MEA) की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, 2002 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी विश्वेश नेगी वर्तमान में मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत हैं और वे जल्द ही अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे।

विश्वेश नेगी का कूटनीतिक सफर और अनुभव

विश्वेश नेगी एक बेहद अनुभवी अधिकारी हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय संबंधों और सामरिक मामलों का लंबा अनुभव है:

रक्षा मंत्रालय में अहम भूमिका: विदेश मंत्रालय में मौजूदा जिम्मेदारी से पहले, नेगी रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव (अंतरराष्ट्रीय सहयोग) के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

विदेशी मिशनों का अनुभव: उन्होंने अपने अब तक के करियर में विभिन्न देशों में भारतीय दूतावासों और मिशनों में कई अहम पदों पर कार्य किया है, जिससे उन्हें क्षेत्रीय और वैश्विक कूटनीति की गहरी समझ है।

रणनीतिक रूप से बेहद अहम समय पर नियुक्ति

यह नियुक्ति ऐसे समय पर हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम सीमा पर है। भारत के लिए यह क्षेत्र ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। भारत होर्मुज स्ट्रेट समेत तमाम कमर्शियल शिपिंग रूट्स और वहां तैनात नाविकों की सुरक्षा को लेकर लगातार ईरान के संपर्क में है और अपनी गहरी फिक्र जाहिर कर रहा है। संकट के इस दौर में भारत लगातार 'डायलॉग और डिप्लोमेसी' (संवाद और कूटनीति) के रास्ते पर जोर दे रहा है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर की ईरान के विदेश मंत्री से उच्च-स्तरीय बातचीत

हाल ही में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ टेलीफोन पर लंबी बातचीत की। इस दौरान द्विपक्षीय और क्षेत्रीय सुरक्षा हालात पर गंभीर चर्चा हुई:

शिपिंग रूट्स और नाविकों की सुरक्षा: विदेश मंत्री जयशंकर ने स्पष्ट किया कि किसी भी हालत में कमर्शियल शिपिंग और नाविकों पर हमले रोके जाने चाहिए। भारत ने क्षेत्र में किसी भी पार्टी द्वारा किए जा रहे ऐसे हमलों पर अपनी कड़ी आपत्ति और चिंता जताई है।

कूटनीतिक समाधान पर जोर: जयशंकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी देते हुए कहा कि उन्हें मौजूदा घटनाक्रम और चल रही वार्ताओं पर ईरान के नजरिए से अवगत कराया गया है। भारत का रुख साफ है कि समस्याओं का हल केवल संवाद और कूटनीति के जरिए ही निकल सकता है।

वैश्विक कूटनीति और क्षेत्रीय हलचल

इस बीच, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं:

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा मध्यस्थों के जरिए ईरान के साथ बातचीत की प्रक्रिया शुरू होने के संकेत दिए गए हैं।

वहीं, ईरानी मीडिया के अनुसार, समुद्री कॉरिडोर को सुचारू रूप से चलाने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ईरान और ओमान के बीच एक 'जॉइंट ऑपरेशनल सिस्टम' पर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। विश्वेश नेगी की यह नियुक्ति इस संवेदनशील समय में भारत और ईरान के बीच राजनयिक संवाद को और अधिक मजबूत करेगी।