Greenland dispute: अमेरिका और यूरोप के बीच अविश्वास की खाई गहरी, यूरोप ने कड़ा रुख अपनाया
- by Priyanka Tiwari
- 2026-01-26 02:29:00
India News Live,Digital Desk : यूक्रेन को लेकर अंतरराष्ट्रीय असहमतियों ने ग्रीनलैंड के मसले पर अमेरिका और यूरोप के बीच अविश्वास की खाई और गहरी कर दी है। यूरोप ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका के चापलूसी भरे व्यवहार को नहीं मानेगा और अमेरिकी सरपरस्ती वाली कूटनीति में हर काम में साथ नहीं देगा।
ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने दिखाई ताकत
यूरोप की तीन बड़ी ताकतों—ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी—ने अपनी स्थिति मजबूत करना शुरू कर दिया है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने कहा कि ग्रीनलैंड की संप्रभुता के मामले में ब्रिटेन कोई नरम रुख नहीं अपनाएगा। अन्य यूरोपीय नेताओं के तेवर भी इसी तरह कड़े हैं।
यूरोपीय देशों का स्पष्ट संदेश
नार्वे के प्रधानमंत्री यूनोस गाफ्टर ने कहा कि सहयोगियों के बीच धमकियों के लिए कोई स्थान नहीं है और अमेरिका की किसी भी धमकी को स्वीकार नहीं किया जाएगा। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेट फ्रेडरिक्सन ने कहा, "जब यूरोप एकजुट रहेगा, तो इसका परिणाम स्पष्ट होगा। एकजुटता हम सभी को मजबूत बनाएगी।"
फ्रेडरिक्सन ने अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस के उस बयान का जवाब भी दिया, जिसमें वेंस ने डेनमार्क को ‘अच्छा सहयोगी’ नहीं बताया था। उन्होंने कहा, "हम बुरे सहयोगी नहीं हैं, लेकिन हर बात को मानना हमने बंद कर दिया है।"
ग्रीनलैंड प्रधानमंत्री का कड़ा रुख
ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नील्सन ने अमेरिका में अपने क्षेत्र के विलय के प्रस्ताव का स्पष्ट रूप से विरोध किया। वहां की जनता ने भी अमेरिकी सैन्य अड्डे के सामने विरोध प्रदर्शन किया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ट्रंप के बीच इसी दौरान सबसे ज्यादा तनाव पैदा हुआ।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यूरोप की इस एकजुटता के कारण ही ट्रंप ने ग्रीनलैंड मामले में अपने रुख में नरमी दिखाई और अब सैन्य शक्ति के इस्तेमाल का प्रस्ताव नहीं दे रहे हैं। वह अब यूरोप की सुरक्षा का हवाला दे रहे हैं।