June 18 2026 06:31 am

IAF की ताकत पर 'ग्रहण'? पूर्व अमेरिकी राजदूत की दोटूक- अब पाक पर एयरस्ट्राइक करना भारत के लिए नहीं होगा आसान

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India News Live,Digital Desk : क्या भारत भविष्य में पाकिस्तान के खिलाफ बालाकोट जैसी बड़ी सैन्य कार्रवाई कर पाएगा? इस सवाल पर भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत केनेथ जस्टर ने एक ऐसी चेतावनी दी है, जिसने रणनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। जस्टर का मानना है कि अमेरिका और पाकिस्तान के बीच बदलती दूरियां भविष्य में भारत के 'कड़े' फैसलों की राह में रोड़ा बन सकती हैं।

ट्रंप प्रशासन और पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकियां

वाशिंगटन के हडसन इंस्टीट्यूट में आयोजित 'द न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस' में बोलते हुए केनेथ जस्टर ने कहा कि पाकिस्तान ने मौजूदा ट्रंप प्रशासन को अपनी ओर रिझाने में कामयाबी हासिल कर ली है। हालात यह हैं कि पाकिस्तान अब अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। जस्टर के मुताबिक, पाकिस्तान का यह कूटनीतिक पैंतरा न केवल आश्चर्यजनक है, बल्कि भारत के लिए एक बड़ी परेशानी का सबब भी बन सकता है।

क्या पुलवामा जैसा जवाब अब संभव नहीं?

पूर्व राजदूत ने एक गंभीर कूटनीतिक चिंता जाहिर करते हुए कहा कि यदि भविष्य में सीमा पार से कोई बड़ा आतंकी हमला होता है, तो भारत की जवाबी कार्रवाई पहले जैसी 'स्वतंत्र' नहीं रह पाएगी। उन्होंने पुलवामा हमले के बाद हुई बालाकोट एयरस्ट्राइक का जिक्र करते हुए कहा कि उस वक्त अमेरिका भारत के साथ मजबूती से खड़ा था। लेकिन अब, अमेरिका-पाक के मधुर संबंधों को देखते हुए भारत को इस बात पर संदेह हो सकता है कि क्या वॉशिंगटन आतंकवाद के खिलाफ किसी सैन्य कार्रवाई में नई दिल्ली का दोबारा वैसा ही समर्थन करेगा।

21वीं सदी की सबसे बड़ी 'जियोपॉलिटिकल' कहानी

हालांकि, जस्टर ने भारत की बढ़ती वैश्विक शक्ति को भी नजरअंदाज नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत की विशाल जनसंख्या, तकनीकी प्रतिभा और बढ़ती सैन्य ताकत उसे इस सदी की सबसे महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक शक्ति बनाती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंध फिर से पटरी पर लौट आएंगे, क्योंकि यह साझेदारी दोनों देशों के भविष्य के लिए अनिवार्य है।

भारत के लिए कूटनीतिक चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि जस्टर का यह बयान भारत के लिए एक अलार्म की तरह है। एक तरफ जहां भारत आतंकवाद पर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाए हुए है, वहीं अमेरिका का पाकिस्तान के प्रति नरम रुख भारत की सामरिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) के लिए चुनौती पैदा कर सकता है। अब देखना यह होगा कि भारत अपनी विदेशी नीति के जरिए इस त्रिकोणीय समीकरण को कैसे साधता है।