Diwali 2025 : 84 साल बाद बन रहा दुर्लभ योग, माता लक्ष्मी की पूजा का दोगुना लाभ
- by Priyanka Tiwari
- 2025-09-26 14:04:00
India News Live,Digital Desk : सनातन धर्म में दिवाली का महत्व बहुत बड़ा है। यह पर्व हर साल कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है। इस दिन घरों में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की विशेष पूजा की जाती है। साथ ही लोग व्रत रखते हैं और दीपक जलाकर अपने घर को रोशन करते हैं। पूरे देश और विदेश में दिवाली को धूमधाम से मनाया जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा करने से आर्थिक तंगी दूर होती है, घर में सुख-समृद्धि आती है और व्यापार में वृद्धि होती है। खास बात यह है कि दिवाली 2025 इस बार बेहद खास होने वाली है।
दिवाली 2025 का दुर्लभ संयोग
इस वर्ष दिवाली पर ऐसा दुर्लभ योग बन रहा है जो 84 साल बाद देखने को मिलेगा। यह योग पिछली बार 1941 में था। वैदिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा करने से लाभ दोगुना हो जाएगा।
दिवाली 2025 की तिथि और समय
वैदिक पंचांग के अनुसार:
अमावस्या तिथि: 20 अक्टूबर, दोपहर 3:44 बजे से शुरू होकर 21 अक्टूबर शाम 5:54 बजे समाप्त होगी।
इस दिन ही दिवाली मनाई जाती है। 21 अक्टूबर की शाम से कार्तिक मास की प्रतिपदा प्रारंभ होगी।
इसलिए 20 अक्टूबर को दिवाली मनाना सबसे उचित रहेगा। हालाँकि, आप अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय देख सकते हैं।
दिवाली 2025 का शुभ मुहूर्त
पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 7:08 बजे से रात 8:18 बजे तक
पूजा का अशुभ समय: शाम 5:46 बजे से रात 8:18 बजे तक
वृषभ काल: शाम 7:08 बजे से रात 9:03 बजे तक
निशिता काल: रात्रि 11:41 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक
भक्त अपनी सुविधा अनुसार इस समय माता लक्ष्मी की पूजा कर सकते हैं।
पंचांग विवरण
सूर्योदय: सुबह 6:25 बजे
सूर्यास्त: शाम 5:46 बजे
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:44 बजे से 5:34 बजे
विजय मुहूर्त: दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे
गोधूलि समय: शाम 5:46 बजे से 6:12 बजे
निशिता मुहूर्त: रात 11:41 बजे से 12:31 बजे
1941 और 2025 का योग
वैदिक पंचांग के अनुसार, दिवाली 20 अक्टूबर 1941 को भी सोमवार के दिन मनाई गई थी। उस समय अमावस्या रात्रि 8:50 बजे तक थी और उसके बाद प्रतिपदा प्रारंभ हुई।
इस बार भी शिववास योग और दिवाली का दुर्लभ संयोग बन रहा है। 1941 में चित्रा नक्षत्र भी बन रहा था, और 2025 में भी वही संयोग बन रहा है।