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August 20 2026 04:39 pm

फिटमेंट फैक्टर 2.0, 2.25 या 2.57? जानिए किसमें कितनी बढ़ेगी बेसिक सैलरी: 8वें वेतन आयोग में अलग-अलग फॉर्मूलों का पूरा गणित

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केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन पुनरीक्षण में सबसे अहम भूमिका फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) की होती है। फिटमेंट फैक्टर वह मल्टीप्लायर (गुणांक) है, जिससे मौजूदा 7वें वेतन आयोग की बेसिक सैलरी को गुणा करके नई बेसिक सैलरी तय की जाती है:

नई बेसिक सैलरी = वर्तमान बेसिक सैलरी (7th CPC) × फिटमेंट फैक्टर

कर्मचारी संगठनों द्वारा 2.86 से 3.83 गुना तक के बड़े फिटमेंट फैक्टर की मांग की जा रही है, जबकि वित्तीय विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि राजकोषीय संतुलन को देखते हुए आयोग 2.00 से 2.57 के दायरे में सिफारिश कर सकता है।

न्यूनतम बेसिक सैलरी (Level-1 Entry Pay) पर तीनों फॉर्मूलों का सीधा असर

वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत लेवल-1 कर्मचारी (जैसे एमटीएस, ग्रुप डी) की न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 प्रति माह है। तीनों अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर लागू होने पर न्यूनतम सैलरी इस प्रकार होगी:

2.00 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹18,000 × 2.00 = ₹36,000 प्रति माह (सीधा 100% का उछाल)

2.25 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹18,000 × 2.25 = ₹40,500 प्रति माह (125% की बढ़ोतरी)

2.57 फिटमेंट फैक्टर पर (7th CPC के समान): ₹18,000 × 2.57 = ₹46,260 प्रति माह (लगभग 157% का भारी इजाफा)

पे मैट्रिक्स लेवल 1 से 10 तक: किस स्तर पर कितनी बनेगी नई बेसिक सैलरी?

अलग-अलग पदों और पे-लेवल्स के कर्मचारियों की मौजूदा बेसिक पे पर तीनों फिटमेंट फैक्टर्स का प्रभाव इस प्रकार दिखेगा:

पे-लेवल (पद स्तर)वर्तमान बेसिक पे (7th CPC)2.00× फिटमेंट पर2.25× फिटमेंट पर2.57× फिटमेंट पर
लेवल 1 (MTS, चपरासी)₹18,000₹36,000₹40,500₹46,260
लेवल 2 (LDC, जूनियर क्लर्क)₹19,900₹39,800₹44,775₹51,143
लेवल 4 (UDC, हेड कांस्टेबल)₹25,500₹51,000₹57,375₹65,535
लेवल 5 (सीनियर क्लर्क, तकनीशियन)₹29,200₹58,400₹65,700₹75,044
लेवल 6 (सब-इंस्पेक्टर, शिक्षक, जेई)₹35,400₹70,800₹79,650₹90,978
लेवल 7 (इंस्पेक्टर, सेक्शन ऑफिसर)₹44,900₹89,800₹1,01,025₹1,15,393
लेवल 8 (असिस्टेंट एकाउंट्स ऑफिसर)₹47,600₹95,200₹1,07,100₹1,22,332
लेवल 10 (SDM, DSP, ग्रुप-A एंट्री)₹56,100₹1,12,200₹1,26,225₹1,44,177

डीए (DA) रीसेट और इन-हैंड सैलरी में भत्तों का खेल

फिटमेंट फैक्टर केवल बेसिक सैलरी तय करता है, लेकिन इन-हैंड (टेक-होम) सैलरी का ढांचा कई अन्य भत्तों से मिलकर बनता है:

महंगाई भत्ता (DA) रीसेट: जब भी नया वेतन आयोग लागू होता है, उस समय तक जमा हुआ कुल डीए नई बेसिक सैलरी में समाहित (Merge) हो जाता है और नया डीए 0% से शुरू होता है।

मकान किराया भत्ता (HRA) में भारी उछाल: एचआरए सीधे बेसिक सैलरी के प्रतिशत (जैसे एक्स-शहरों में 30%, वाई-शहरों में 20%, जेड-शहरों में 10%) के रूप में मिलता है। बेसिक सैलरी दोगुनी होते ही कर्मचारियों को मिलने वाली एचआरए की वास्तविक रकम भी लगभग दोगुनी हो जाएगी।

टीए (Travel Allowance) और पेंशन: बेसिक सैलरी बढ़ने से ट्रैवल अलाउंस में बढ़ोतरी होगी, वहीं सेवानिवृत्त कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक पेंशन ₹9,000 से बढ़कर फिटमेंट फैक्टर के आधार पर ₹18,000 से ₹23,130 प्रति माह तक पहुंच जाएगी।

सरकार के सामने वित्तीय चुनौती: कौन-सा फैक्टर चुने जाने की संभावना अधिक?

7वें वेतन आयोग में सरकार ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर तय किया था। वर्तमान में 8वें वेतन आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती सरकारी खजाने पर पड़ने वाले वित्तीय भार को नियंत्रित रखना है। यदि आयोग 2.00 से 2.25 के बीच का फैक्टर चुनता है, तो सरकारी कर्मचारियों को महंगाई के मुकाबले सुरक्षित रखते हुए राजकोषीय घाटे को भी सीमित रखा जा सकेगा। अंतिम निर्णय आयोग की रिपोर्ट और केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा।