"तुम सिर्फ पढ़ाई करो, बाकी हम पर छोड़ दो...", हापुड़ की भावुक छात्रा से बोले सीएम योगी; अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

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India News Live,Digital Desk : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) अपने कड़े प्रशासनिक फैसलों के साथ-साथ आम जनता और विशेषकर बच्चों के प्रति संवेदनशील रवैये के लिए भी जाने जाते हैं। सोमवार को लखनऊ में आयोजित 'जनता दर्शन' कार्यक्रम के दौरान एक ऐसा ही भावुक और दिल छू लेने वाला वाकया सामने आया, जब हापुड़ से आई एक छोटी सी बच्ची की परेशानी सुनकर खुद मुख्यमंत्री ने उसकी शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी उठाने का भरोसा दिया।

जनता दर्शन में प्रदेश के कोने-कोने से अपनी फरियाद लेकर पहुंचे सैकड़ों लोगों के बीच हापुड़ से अपने परिजनों के साथ आई कक्षा-7 की एक छात्रा भी खड़ी थी। जब उसकी बारी आई, तो उसने बेहद मासूमियत और रुआंसे मन से मुख्यमंत्री को अपने परिवार की दयनीय आर्थिक स्थिति (माली हालत) के बारे में बताया। छात्रा ने कहा कि घर की तंगी के कारण उसकी आगे की पढ़ाई पर संकट मंडरा रहा है और वह अपनी शिक्षा को लेकर बहुत ज्यादा चिंतित है।

"तुम घर जाओ और सिर्फ मन लगाकर पढ़ो"

बच्ची की पूरी बात को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेहद ध्यान और संवेदनशीलता से सुना। उन्होंने स्नेहपूर्वक बच्ची से उसकी पढ़ाई और स्कूल के बारे में पूछा। जब छात्रा ने बताया कि वह सातवीं कक्षा में पढ़ती है, तो सीएम योगी ने तुरंत उसके सिर पर हाथ रखकर ढांढस बंधाया और एक अभिभावक की तरह कहा—"तुम बिल्कुल चिंता मत करो, आराम से घर जाओ और सिर्फ अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो, बाकी सब कुछ हमारे (सरकार) ऊपर छोड़ दो।"

मुख्यमंत्री के मुख से मिले इस बड़े आश्वासन को सुनकर वह मासूम छात्रा और उसके माता-पिता बेहद भावुक हो गए और उनकी आंखों में खुशी के आंसू आ गए।

शिक्षित बच्चा ही सशक्त भारत की नींव: सीएम योगी

मुख्यमंत्री ने छात्रा के माता-पिता से भी बात की और कहा कि गरीबी या किसी भी अन्य अभाव के कारण बच्चों की शिक्षा के अधिकार में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए। उन्होंने कहा, "एक शिक्षित बच्चा ही आगे चलकर एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव बनता है।"

सीएम योगी ने मौके पर मौजूद लखनऊ और हापुड़ के प्रशासनिक अधिकारियों को तत्काल निर्देश दिए कि वे पीड़ित परिवार से संपर्क स्थापित कर बच्ची की आगे की पढ़ाई के लिए जो भी आवश्यक आर्थिक या कागजी सहायता चाहिए, उसे समय सीमा के भीतर उपलब्ध कराएं। साथ ही उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे बच्चों को बिना नागा (नियमित रूप से) स्कूल जरूर भेजें।

लापरवाही पर नपेंगे अफसर: लंबित मामलों को लेकर मुख्यमंत्री के कड़े तेवर

जनता दर्शन कार्यक्रम में शिक्षा के अलावा राजस्व (Land Revenue) और पुलिस विभाग से जुड़े कई गंभीर मामले भी मुख्यमंत्री के सामने आए। इन शिकायतों पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों की क्लास लगाते हुए कई सख्त गाइडलाइंस जारी कीं:

कार्यालयों के चक्कर लगाने से मिले मुक्ति: मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि आम जनता को अपनी जायज शिकायतों के समाधान के लिए सरकारी दफ्तरों और बाबूओं के चक्कर न काटने पड़ें। सभी समस्याओं का निस्तारण समयबद्ध तरीके से और स्थानीय स्तर पर ही होना चाहिए।

6 महीने से लंबित मामलों की होगी समीक्षा: जमीन और राजस्व से जुड़े पुराने मुकदमों पर चिंता जताते हुए सीएम योगी ने निर्देश दिया कि जो भी राजस्व वाद पिछले 6 महीने या उससे अधिक समय से अटके हुए हैं, उनकी उच्च स्तर पर समीक्षा की जाए।

जवाबदेही होगी तय: यदि बिना किसी ठोस और उचित कानूनी कारण के किसी मामले में देरी पाई जाती है, तो संबंधित लापरवाह अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

"शासन का काम सिर्फ फाइलें निपटाना नहीं, जनता के चेहरे पर मुस्कान लौटाना है"

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी का अहसास कराते हुए अंत में कहा कि शासन और प्रशासन का असली दायित्व केवल शिकायतों का निस्तारण (Disposal) करना नहीं है, बल्कि समाज के सबसे निचले और जरूरतमंद व्यक्ति को बिना किसी भेदभाव के न्याय दिलाना और उसके चेहरे पर खुशहाली व विश्वास को वापस लौटाना है।