राज्यसभा चुनाव में 150 पार का लक्ष्य रख भाजपा ने बिछाई बिसात, कांग्रेस को सूपड़ा साफ होने और क्रॉस वोटिंग की टेंशन

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India News Live,Digital Desk : देश की सियासत में उच्च सदन (Rajya Sabha) के संख्याबल को लेकर शह और मात का खेल शुरू हो चुका है। 18 जून 2026 को राज्यसभा की 25 सीटों के लिए होने वाला मतदान बेहद नजदीक है, जिसने राजनीतिक दलों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शीर्ष नेतृत्व ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक कर अपनी ताकत बढ़ाने की रणनीति तैयार कर ली है, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस कई राज्यों में नंबर गेम और अंदरूनी खींचतान की वजह से भारी टेंशन में नजर आ रही है।

उच्च सदन में NDA 'दो-तिहाई' बहुमत के करीब, 150 पार का लक्ष्य

वर्तमान में राज्यसभा के भीतर अकेले भाजपा के पास 148 सांसद हैं। इस आगामी चुनाव में भाजपा का लक्ष्य 25 में से कम से कम 17 से 18 सीटें जीतकर अपने नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) गठबंधन के आंकड़े को 150 के पार ले जाना है। यदि भाजपा इसमें सफल रहती है, तो वह उच्च सदन में दो-तिहाई बहुमत के बेहद करीब पहुंच जाएगी, जिससे सरकार को आने वाले दिनों में कड़े और बड़े संवैधानिक संशोधन विधेयकों (जैसे परिसीमन और ONOE) को पास कराने में आसानी होगी।

गौरतलब है कि इस चुनाव में कई राष्ट्रीय दिग्गजों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व पीएम एच.डी. देवगौड़ा, दिग्विजय सिंह, और केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन व रवनीत सिंह बिट्टू शामिल हैं।

राज्यों का समीकरण: कहाँ फंसी है कांग्रेस और क्या है भाजपा का 'खेला'?

1. गुजरात: राज्यसभा में 'सांसद विहीन' होने की कगार पर कांग्रेस

कांग्रेस को सबसे करारा और ऐतिहासिक झटका गुजरात में लगने जा रहा है। 21 जून को गुजरात से कांग्रेस के एकमात्र राज्यसभा सांसद शक्ति सिंह गोहिल का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। संख्याबल के क्रूर गणित के कारण इस बार गुजरात विधानसभा से कांग्रेस का कोई भी नेता राज्यसभा नहीं पहुंच पाएगा:

नियम: गुजरात में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 46 विधायकों के मत (वोट) की आवश्यकता है।

हकीकत: विधानसभा में कांग्रेस के पास इस समय महज 12 विधायक हैं, जो जीत के आंकड़े से कोसों दूर हैं। ऐसे में गुजरात की सीट सीधे भाजपा के खाते में जानी तय है।

2. मध्य प्रदेश: दिग्विजय सिंह का इनकार और क्रॉस वोटिंग का साया

मध्य प्रदेश की 3 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है। विधायकों की संख्या के हिसाब से कांग्रेस यहाँ केवल 1 सीट ही जीत सकती है, जबकि भाजपा आसानी से 2 सीटें जीत लेगी (जिसमें एक केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन के खाते में जा सकती है)।

दिक्कत: पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा इस बार चुनाव लड़ने से साफ मना किए जाने के बाद कांग्रेस के लिए एक सर्वमान्य और मजबूत उम्मीदवार ढूंढना टेढ़ी खीर बन गया है।

खतरा: कांग्रेस को डर है कि यदि स्थानीय गुटबाजी के कारण किसी कमजोर चेहरे को उतारा गया, तो भाजपा विधायकों में क्रॉस वोटिंग (Cross-Voting) कराकर उसका खेल बिगाड़ सकती है।

3. कर्नाटक और राजस्थान: खरगे सुरक्षित, गहलोत पर दांव

कर्नाटक: यहाँ का नंबर गेम कांग्रेस के पक्ष में मजबूत है। कांग्रेस को उम्मीद है कि वह यहाँ आसानी से 3 सीटें जीत लेगी, जिससे स्वयं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकाजुन खरगे की सीट पूरी तरह सुरक्षित है।

राजस्थान: यहाँ भाजपा को 2 और कांग्रेस को 1 सीट मिलने की उम्मीद है। भाजपा यहाँ से केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को उतार सकती है, जबकि कांग्रेस अपनी एकमात्र सुरक्षित सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत या तेज-तर्रार प्रवक्ता पवन खेड़ा को भेजने पर विचार कर रही है।

झारखंड का पेचीदा गणित: क्या शिबू सोरेन की सीट पर 'खेला' करेगी भाजपा?

झारखंड की 2 राज्यसभा सीटों पर दांव लगा है, जिसमें से एक सीट झामुमो (JMM) के दिग्गज नेता शिबू सोरेन के निधन के बाद खाली हुई है। 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में एक सीट जीतने के लिए 28 वोटों की जरूरत होती है।

झारखंड विधानसभा गठबंधन गणित (कुल सीटें: 81): | ├── हेमंत सोरेन महागठबंधन (JMM 34 + कांग्रेस 16 + RJD 4 + माले 2) = 56 विधायक └── एनडीए गठबंधन (BJP + आजसू + जदयू + लोजपा) = 24 विधायक

महागठबंधन की स्थिति: हेमंत सोरेन की अगुवाई वाले सत्तारूढ़ गठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं, जो गणितीय रूप से दोनों सीटें जीतने के लिए बिल्कुल पर्याप्त हैं ($28 \times 2 = 56$)। हालांकि, कांग्रेस इस उम्मीद में है कि झामुमो बड़े भाई की भूमिका निभाते हुए एक सीट उसके कोटे में देगी, जिसे लेकर बातचीत जारी है।

भाजपा की रणनीति: विपक्षी एनडीए के पास केवल 24 विधायक हैं, यानी एक सीट जीतने के लिए भी उसे 4 अतिरिक्त वोटों की दरकार है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा यहाँ चुप नहीं बैठने वाली है। वह बचे हुए निर्दलीय विधायकों को साधने और महागठबंधन के असंतुष्ट विधायकों में सेंध लगाकर 'क्रॉस वोटिंग' के जरिए बड़ा उलटफेर करने की ताक में है।