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July 08 2026 10:20 am

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा मोड़, अब CBI संभालेगी जांच की कमान

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अयोध्या ब्यूरो: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की रकम की हेराफेरी का मामला अब एक बेहद संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल मोड़ पर पहुंच चुका है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की समय सीमा बढ़ाए जाने के बाद, अब इस पूरे मामले की कमान केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने की कवायद तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय जांच एजेंसियां लगातार इस घटनाक्रम पर इनपुट जुटा रही हैं, जिससे आने वाले दिनों में जांच का दायरा काफी व्यापक होने की उम्मीद है।

एसआईटी की बढ़ी मियाद, बैंक और ट्रस्ट के रसूखदारों पर गहराया शक

इस आर्थिक अपराध की गंभीरता को देखते हुए पुलिस जांच की सुई अब भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के अधिकारियों और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कुछ प्रमुख चेहरों की तरफ घूम गई है। मामले में आठ आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद हुई कड़ाई से पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच टीम अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि दान में आए नोटों के बंडल बनाते समय और उसे बैंक तक पहुंचाने की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) में कहां और कैसे लापरवाही बरती गई। बैंक के दो अधिकारियों और ट्रस्ट के एक रसूखदार सदस्य की भूमिका की गहराई से पड़ताल की जा रही है।

चुनावी माहौल में चढ़ावा चोरी पर गरमाई सियासत

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के ठीक पहले आए इस मामले ने राज्य में सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। राम मंदिर और अयोध्या हमेशा से ही राजनीतिक केंद्र रहे हैं, ऐसे में विपक्ष ने इसे सीधे रामभक्तों की आस्था से जोड़कर सरकार और ट्रस्ट को घेरना शुरू कर दिया है। समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस लगातार ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, योगी सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आठ नामजद आरोपियों को जेल भेजकर यह साफ संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार के इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

सीबीआई की ईओडब्ल्यू (EOW) विंग को मिल सकती है जिम्मेदारी

चूंकि मामला पब्लिक मनी (जनता के पैसे) की हेराफेरी से जुड़ा है और इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक 'स्टेट बैंक ऑफ इंडिया' के कर्मचारियों की संलिप्तता के संकेत मिले हैं, इसलिए एफआईआर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गई हैं। सूत्रों का दावा है कि मामले के अंतरराज्यीय और तकनीकी पहलुओं को देखते हुए इसे जल्द ही सीबीआई दिल्ली की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के हवाले किया जा सकता है। इधर, एसबीआई प्रबंधन ने भी अपने स्तर पर आंतरिक जांच शुरू कर दी है और दोषी कर्मियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।