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July 08 2026 12:27 am

NCDEX पर 14 साल बाद फिर लौटेगा काली मिर्च का वायदा कारोबार, 15 जुलाई से शुरू होगी बंपर ट्रेडिंग

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भारतीय कमोडिटी और मसाला बाजार के लिए एक ऐतिहासिक और बेहद बड़ी खबर सामने आई है। देश के प्रमुख कृषि कमोडिटी एक्सचेंज, नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (NCDEX) ने करीब 14 साल के लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर 'काली मिर्च का वायदा कारोबार' (Black Pepper Futures) शुरू करने का आधिकारिक एलान कर दिया है। आगामी 15 जुलाई 2026 से इस बहुप्रतीक्षित मसाले की ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर लाइव हो जाएगी। इस रणनीतिक कदम का सबसे सीधा और बड़ा फायदा देश के करोड़ों मसाला किसानों, घरेलू व्यापारियों, प्रोसेसर्स और अंतरराष्ट्रीय निर्यातकों (Exporters) को मिलने वाला है, क्योंकि अब उन्हें अपनी उपज और स्टॉक के सटीक दाम तय करने के लिए एक बेहद पारदर्शी, सुरक्षित और सरकारी नियमों के दायरे में काम करने वाला रेगुलेटेड प्लेटफॉर्म मिल जाएगा।

भारत की बड़ी वापसी: ग्लोबल मार्केट में फिर से तय होंगे काली मिर्च के दाम

ऐतिहासिक रूप से भारत दुनिया के सबसे बड़े काली मिर्च उत्पादकों, उपभोक्ताओं और प्रोसेसर्स में शीर्ष स्थान पर शुमार है। इसके बावजूद, पिछले डेढ़ दशक से घरेलू बाजार में इस कीमती मसाले के लिए कोई भी सक्रिय डेरिवेटिव बेंचमार्क मौजूद नहीं था, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय हितों को नुकसान हो रहा था। NCDEX का मानना है कि इस नए वायदा कॉन्ट्रैक्ट के लाइव होते ही भारत एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काली मिर्च की 'ग्लोबल प्राइस डिस्कवरी' में अपनी बादशाहत कायम कर सकेगा। इस पूरे व्यापार को सुचारू रूप से चलाने के लिए केरल के कोच्चि शहर को मुख्य डिलीवरी सेंटर बनाया गया है, जिसे भारत में मसालों का सबसे बड़ा ग्लोबल ट्रेडिंग और प्रोसेसिंग हब माना जाता है।

समझिए नए कॉन्ट्रैक्ट का पूरा गणित: अनिवार्य डिलीवरी और जरूरी फीचर्स

एक्सचेंज द्वारा जारी की गई आधिकारिक गाइडलाइंस के मुताबिक, नए काली मिर्च वायदा कॉन्ट्रैक्ट को बेहद पारदर्शी और निवेशकों के अनुकूल बनाया गया है। इस कॉन्ट्रैक्ट की मुख्य विशेषताएं और तकनीकी विवरण नीचे दी गई तालिका में विस्तार से समझे जा सकते हैं:

फीचर / विशेषताएंआधिकारिक जानकारी व नियम
बेसिस सेंटर (Basis Center)एक्स-वेयरहाउस कोच्चि (लागू होने वाला GST अलग से देय होगा)
ट्रेडिंग यूनिट (Trading Unit)1 मीट्रिक टन (यानी कुल 1000 किलोग्राम)
डिलीवरी यूनिट (Delivery Unit)1 मीट्रिक टन (यानी कुल 1000 किलोग्राम)
कोटेशन / भाव (Quotation)रुपये प्रति किलोग्राम (Rs per Kg) के आधार पर
टिक साइज (Tick Size)न्यूनतम 10 पैसे का उतार-चढ़ाव
मुख्य डिलीवरी सेंटरकोच्चि (नगर निगम सीमा से 60 किलोमीटर के दायरे में)
अतिरिक्त डिलीवरी सेंटरफिलहाल कोई अन्य सेंटर उपलब्ध नहीं है
डिलीवरी व्यवस्था (Delivery Mechanism)अनिवार्य डिलीवरी (Compulsory Delivery Contract)

एनसीडीईएक्स के टॉप मैनेजमेंट का भरोसा: मसाला बाजार में खत्म होगी मंदी और अनिश्चितता

इस ऐतिहासिक री-लॉन्च पर भरोसा जताते हुए NCDEX के प्रबंध निदेशक (MD) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) डॉ. अरुण रास्ते ने कहा कि अतीत में जब काली मिर्च का वायदा कारोबार सक्रिय था, तब किसानों और एक्सपोर्टर्स की भागीदारी 100 प्रतिशत तक पहुंच जाती थी और कई कॉन्ट्रैक्ट्स मैच्योरिटी के समय पूरी डिलीवरी के साथ क्लोज होते थे। उन्होंने बताया कि भारत बड़ा उत्पादक होने के बावजूद धीरे-धीरे वैश्विक स्तर पर कीमत तय करने की अपनी शक्ति खो चुका था, लेकिन यह नया कॉन्ट्रैक्ट हमारे हितधारकों को कीमतों में होने वाले अचानक उतार-चढ़ाव (Price Volatility) के जोखिम से पूरी तरह सुरक्षित रखेगा।

वहीं, एक्सचेंज के चीफ बिजनेस ऑफिसर केदार देशपांडे ने इस कदम को वैश्विक स्तर पर गेम-चेंजर बताते हुए कहा कि इस समय पूरी दुनिया में काली मिर्च के लिए कोई सक्रिय और भरोसेमंद डेरिवेटिव बेंचमार्क मौजूद नहीं है। ऐसे में भारत का यह कदम लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मसाला व्यापार में महसूस की जा रही एक बड़ी कमी को हमेशा के लिए पूरा कर देगा।

'हर घर इन्वेस्टर' का महा-अभियान: मल्टी-एसेट एक्सचेंज बनने की राह पर NCDEX

काली मिर्च वायदा की इस बड़ी घोषणा के साथ ही, NCDEX ने दक्षिण भारत के प्रमुख व्यापारिक केंद्र कोच्चि में अपने महत्वाकांक्षी और लोकप्रिय राष्ट्रीय अभियान 'हर घर इन्वेस्टर' के विस्तार की भी शुरुआत कर दी है। इस अभियान का मुख्य विजन देश के बड़े महानगरों से बाहर निकलकर टियर-2 और टियर-3 शहरों के आम भारतीय परिवारों तक सुरक्षित और रेगुलेटेड वित्तीय बाजारों में निवेश की पहुंच को बढ़ाना है।

एक्सचेंज के भविष्य के प्लान्स भी काफी बड़े हैं; हाल ही में मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) से इक्विटी और इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में एंट्री करने की सैद्धांतिक मंजूरी मिलने और संस्थागत निवेशकों से ₹770 करोड़ की भारी-भरकम फंडिंग हासिल करने के बाद, NCDEX अब केवल कमोडिटी तक सीमित न रहकर एक संपूर्ण 'मल्टी-एसेट एक्सचेंज' बनने की दिशा में बेहद तेजी से कदम आगे बढ़ा रहा है।