ट्रंप के अंकारा पहुंचते ही नाटो देशों में खलबली: राष्ट्रपति की घुड़की के बाद अरबों डॉलर के नए हथियार सौदों का महा-ऐलान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त हिदायत और यूरोप पर रक्षा खर्च बढ़ाने के लगातार दबाव का बड़ा असर दिखने लगा है। तुर्किये की राजधानी अंकारा में आयोजित दो दिवसीय नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन के पहले ही दिन सदस्य देशों ने सामूहिक रूप से अरबों डॉलर के नए और अभूतपूर्व हथियार समझौतों की घोषणा कर दी है। कूटनीतिक हलकों में इस कदम को डोनाल्ड ट्रंप के साथ होने वाली द्विपक्षीय बैठक से पहले यूरोपीय देशों द्वारा खुद को 'सुरक्षित' करने की एक बड़ी कवायद के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप लंबे समय से यह आरोप लगाते रहे हैं कि यूरोपीय देश अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिकी करदाताओं के पैसों पर निर्भर हैं।
शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने और तुर्किये के राष्ट्रपति से रणनीतिक मुलाकात के लिए जैसे ही डोनाल्ड ट्रंप अंकारा पहुंचे, नाटो नेतृत्व ने अपनी नई रक्षा तैयारियों का खाका सामने रख दिया। इस ताबड़तोड़ घोषणाओं से साफ है कि नाटो के 32 सदस्य देश अब वाशिंगटन को यह स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं कि वे अपनी सैन्य आत्मनिर्भरता और रक्षा बजट को लेकर पूरी तरह गंभीर हैं।
नाटो महासचिव मार्क रूट की चेतावनी: एंटी-ड्रोन तकनीक पर खर्च होंगे 40 अरब डॉलर
अंकारा सम्मेलन की शुरुआत करते हुए नाटो के नवनियुक्त महासचिव मार्क रूट ने वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को बेहद नाजुक बताते हुए पूरे सैन्य गठबंधन में 'डिफेंस इंडस्ट्रियल रिवॉल्यूशन' (रक्षा उद्योग में क्रांति) लाने का जोरदार आह्वान किया। रूट ने स्क्रीन पर नए रक्षा समझौतों की विशाल वित्तीय रूपरेखा प्रदर्शित करते हुए रूस, चीन, उत्तर कोरिया और ईरान के आसमान छूते सैन्य खर्च को लेकर पश्चिमी देशों को सचेत किया। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए हमारे पास आराम करने का बिल्कुल समय नहीं है और हमें हर क्षण युद्ध के लिए तैयार रहना होगा।
इस रणनीति के तहत महासचिव ने घोषणा की कि नाटो के सहयोगी देश आगामी पांच वर्षों के भीतर आधुनिक एंटी-ड्रोन (Anti-Drone Capabilities) क्षमताओं को विकसित करने के लिए 40 अरब डॉलर (लगभग ₹3.3 लाख करोड़) से अधिक का भारी-भरकम निवेश करेंगे। यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यूरोपीय रक्षा क्षेत्र को हमेशा से अत्यधिक लालफीताशाही, आंतरिक प्रतिस्पर्धा और अमेरिकी हथियारों पर अत्यधिक निर्भरता के लिए आलोचना का सामना करना पड़ता रहा है।
लीक से हटकर महा-सौदे: निगरानी ड्रोन से लेकर मिसाइलों के संयुक्त उत्पादन पर लगी मुहर
नाटो देशों द्वारा इस सम्मेलन में जिन बड़े रक्षा समझौतों की घोषणा की गई, उनके बारे में पहले से कोई भी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई थी, जिससे वैश्विक मीडिया हैरान है। इन गुप्त और बड़े सौदों में यूरोपीय देशों द्वारा अमेरिकी रक्षा दिग्गज 'नॉर्थरोप ग्रुम्मन' (Northrop Grumman) से अत्यधिक उन्नत निगरानी ड्रोन खरीदने की डील शामिल है। इसके अलावा, नाटो ने हवाई प्रभुत्व को मजबूत करने के लिए स्वीडन की प्रसिद्ध रक्षा कंपनी 'साब' (Saab) से अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों की खरीद को भी मंजूरी दी है।
इस महा-अभियान का सबसे रणनीतिक हिस्सा अमेरिका और जर्मनी का संयुक्त उपक्रम है। अमेरिकी रक्षा कंपनी 'लॉकहीड मार्टिन' (Lockheed Martin) और जर्मनी की 'राइनमेटाल' (Rheinmetall) ने जर्मनी की धरती पर ही विध्वंसक 'ATACMS मिसाइलों' के संयुक्त उत्पादन (Joint Production) के लिए एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। ये तमाम घोषणाएं ठीक उसी समय की गई हैं जब डोनाल्ड ट्रंप ने अंकारा के लिए उड़ान भरने से ठीक पहले एक वीडियो संदेश जारी कर यूरोप को अपनी रक्षा पर खुद खर्च बढ़ाने की अंतिम चेतावनी दी थी।
तुर्किये को ट्रंप का बड़ा तोहफा: हटेगा प्रतिबंध, F-35 लड़ाकू विमानों की डिलीवरी पर होगा फैसला
अंकारा पहुंचने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा रणनीतिक बयान देकर नाटो के पूर्वी मोर्चे को खुश कर दिया है। ट्रंप ने एलान किया कि वह तुर्किये पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने जा रहे हैं और इसके साथ ही अंकारा को पांचवीं पीढ़ी के सबसे खतरनाक 'F-35 फाइटर जेट्स' की संभावित बिक्री पर जल्द ही अंतिम और सकारात्मक निर्णय लेंगे।
इस घोषणा के साथ ही वाशिंगटन और अंकारा के बीच साल 2019 से चला आ रहा एक बड़ा सैन्य गतिरोध समाप्त होने की राह पर है। दरअसल, साल 2019 में तुर्किये ने अमेरिका के कड़े विरोध के बावजूद रूस से 'S-400 वायु रक्षा प्रणाली' (S-400 Air Defense System) खरीद ली थी। इस कदम से नाराज होकर तत्कालीन अमेरिकी प्रशासन ने तुर्किये को अपने महत्वाकांक्षी F-35 फाइटर जेट प्रोग्राम से बाहर कर दिया था और उस पर कड़े आर्थिक व सैन्य प्रतिबंध लगा दिए थे। लेकिन अब बदले वैश्विक समीकरणों और नाटो के बढ़ते खर्च को देखते हुए ट्रंप तुर्किये के साथ अपने रक्षा संबंधों को एक नई ऊंचाई देने के लिए तैयार नजर आ रहे हैं।