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July 03 2026 12:42 am

राम मंदिर में अब जाली पार से लाइव दिखेगी चढ़ावे की गिनती, ट्रस्ट में बड़े फेरबदल की तैयारी

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अयोध्या ब्यूरो: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद के बाद अब मंदिर प्रशासन और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट व्यवस्थाओं को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाने जा रहा है। चढ़ावे की रकम की गिनती में किसी भी तरह की हेराफेरी को रोकने के लिए अब पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाएगा। इसके तहत परिसर में एक विशेष पारदर्शी हॉल बनाने की तैयारी है, जिसके चारों तरफ लोहे की मजबूत जालियां और शीशे लगे होंगे। मंदिर में आने वाले आम श्रद्धालु भी अपनी आंखों के सामने दान की गई राशि को गिनते हुए लाइव देख सकेंगे।

हर कोने पर होगी तीसरी आंख की नजर, बदलेगा काउंटिंग सिस्टम

इस नए काउंटिंग हॉल को पूरी तरह से हाई-टेक सुरक्षा घेरे में रखा जाएगा। पूरे पारदर्शी केबिन के अंदर और बाहर कुछ-कुछ दूरी पर अत्याधुनिक सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाए जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने देश के कई अन्य बड़े और प्रतिष्ठित मंदिरों की दान प्रबंधन प्रणालियों का बारीकी से अध्ययन किया है, जिसके बाद इस नए मॉडल को अयोध्या में लागू करने का सर्वसम्मति से फैसला लिया गया है। इस पूरी नई व्यवस्था को अंतिम रूप देने के लिए आगामी 6 जुलाई को ट्रस्ट की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है, जिसमें कई बुजुर्ग पदाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी हिस्सा लेंगे।

नृपेंद्र मिश्रा की एंट्री से बढ़ा सियासी पारा, ट्रस्ट से आउट हो सकते हैं कई दिग्गज

भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा इस अहम बैठक से एक दिन पहले, यानी 5 जुलाई को ही अयोध्या पहुंच रहे हैं। चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद उन्होंने वर्तमान सुरक्षा और प्रबंधन व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े किए थे, जिससे इस बैठक की अहमियत और बढ़ गई है। चर्चा है कि इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट विश्व हिंदू परिषद (VHP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शीर्ष नेतृत्व को भेजी जा चुकी है। 6 जुलाई की बैठक में बहुमत के आधार पर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव के भविष्य पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है। सूत्रों का दावा है कि दो बड़े पदाधिकारियों की ट्रस्ट से छुट्टी तय मानी जा रही है।

क्रिप्टो करेंसी कनेक्शन की जांच, खंगाले जा रहे हैं वित्तीय रिकॉर्ड

मामले की जांच कर रही पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को अंदेशा है कि चढ़ावे की चोरी की गई भारी-भरकम रकम को सफेद करने के लिए उसे क्रिप्टो करेंसी में निवेश किया गया हो सकता है। इस डिजिटल ट्रेल और साइबर धोखाधड़ी को पकड़ने के लिए जांच टीम ने संदेह के घेरे में आए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के अधिकारियों, कर्मियों और उनके परिजनों के वित्तीय दस्तावेजों, बैंक खातों और निवेशों की स्क्रूटनी शुरू कर दी है। इसके साथ ही, आउटसोर्सिंग पर रखे गए कर्मचारियों की अवैध नियुक्तियों में शामिल बैंक अफसरों की भूमिका की भी आंतरिक जांच की जा रही है, जिस पर एसबीआई मुख्यालय कड़ी कार्रवाई करने के मूड में है।