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July 08 2026 12:34 am

SBI ने की होम लोन सीमा ₹1 करोड़ और एजुकेशन लोन ₹50 लाख करने की ऐतिहासिक सिफारिश

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देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने भारतीय बैंकिंग और लोन सेक्टर में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के सामने एक बेहद महत्वाकांक्षी प्रस्ताव रखा है। साल 2047 तक 'विकसित भारत' के निर्माण के महा-लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, एसबीआई ने अपनी नवीनतम आर्थिक शोध रिपोर्ट में होम लोन, एजुकेशन लोन, रिन्यूएबल एनर्जी और सोशल इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए कर्ज देने की सीमाओं (Loan Limits) को दोगुना तक बढ़ाने की पुरजोर वकालत की है। बैंक का मानना है कि बिना उधारी के नियमों को आधुनिक बनाए, देश की विकास दर को नई रफ्तार देना मुमकिन नहीं है।

मेट्रो शहरों में ₹1 करोड़ का होम लोन: बदलने जा रहे हैं प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग के नियम

एसबीआई की इस उच्च स्तरीय रिपोर्ट में सबसे बड़ी राहत रियल एस्टेट और घर खरीदारों के लिए प्रस्तावित की गई है। यदि भारतीय रिजर्व बैंक ने इस सिफारिश को हरी झंडी दे दी, तो प्राथमिक सेक्टर लेंडिंग (PSL) के तहत मेट्रो शहरों में मकान खरीदने के लिए मिलने वाले होम लोन की सीमा सीधे ₹1 करोड़ तक पहुंच जाएगी। वहीं, गैर-मेट्रो या छोटे शहरों में इस सीमा को ₹75 लाख करने का सुझाव दिया गया है।

वर्तमान नियमों के अनुसार, शहरों की आबादी और वर्गीकरण के आधार पर पीएसएल होम लोन की अधिकतम सीमा केवल ₹35 लाख से ₹50 लाख के बीच सिमटी हुई है। इस सीमा के बढ़ने से शहरी मध्यम वर्ग के लिए आलीशान और किफायती घर खरीदना बेहद आसान हो जाएगा। इसके साथ ही, देश और विदेश में उच्च शिक्षा का सपना देख रहे छात्रों के लिए भी बैंक ने बड़ा दिल दिखाया है। एसबीआई ने एजुकेशन लोन की मौजूदा ऊपरी सीमा को ₹25 लाख से सीधे बढ़ाकर ₹50 लाख करने की सिफारिश की है, जिससे महंगी होती तकनीकी और प्रबंधकीय पढ़ाई के बजट को आसानी से पूरा किया जा सके।

ग्रीन एनर्जी को महा-बूस्ट: रिन्यूएबल सेक्टर के लिए ₹100 करोड़ के फंड का प्रस्ताव

आर्थिक प्रगति के साथ-साथ देश को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए एसबीआई ने ग्रीन एनर्जी सेक्टर के लिए भी अपने खजाने के दरवाजे चौड़े करने की बात कही है। बैंक का मानना है कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के खतरों को कम करने वाले प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता के आधार पर लोन दिया जाना चाहिए।

इसके तहत, रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) के लिए वर्तमान में तय अधिकतम ₹35 करोड़ की लोन सीमा को सीधे बढ़ाकर ₹100 करोड़ करने की मजबूत सिफारिश की गई है। इसके अलावा, देश के कोने-कोने में सामाजिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 'सोशल इन्फ्रास्ट्रक्चर लोन' की सीमा को भी सभी श्रेणी के शहरों के लिए एक समान करते हुए ₹25 करोड़ तय करने का प्रस्ताव दिया गया है।

₹2500 लाख करोड़ ($30 Trillion) की इकॉनमी का टारगेट: वित्त मंत्रालय और आरबीआई के पाले में गेंद

एसबीआई की इस ऐतिहासिक रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि साल 2047 तक जब भारत एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनेगा, तब भारतीय अर्थव्यवस्था का कुल आकार 30 लाख करोड़ डॉलर ($30 Trillion) से अधिक होने का अनुमान है। इतने विशाल आर्थिक ढांचे को संभालने और उद्योगों को गति देने के लिए देश के बैंकिंग सिस्टम को बहुत बड़े पैमाने पर कर्ज की तरलता (Credit Liquidity) बढ़ानी होगी।

अच्छी बात यह है कि केंद्र सरकार का वित्तीय सेवाएं विभाग (DFS) इस योजना पर पहले से ही आंतरिक रूप से काम कर रहा है। अब एसबीआई के इन आधिकारिक सुझावों पर अंतिम और नीतिगत फैसला रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को लेना है, जिसकी घोषणा आगामी मौद्रिक समीक्षा या विशेष गाइडलाइंस के जरिए होने की उम्मीद जताई जा रही है।