"भारतीय बनकर ही मरना है": 94 साल की बुजुर्ग महिला ने ठुकरा दी अमेरिकी नागरिकता, मातृभूमि के लिए छोड़ी विदेशी सुख-सुविधाएं
कहते हैं कि इंसान दुनिया के चाहे किसी भी कोने में चला जाए, अपनी मातृभूमि की मिट्टी की खुशबू उसे वापस खींच ही लाती है। देशप्रेम और अपनी जड़ों से जुड़ाव की एक ऐसी ही दिल को झकझोर देने वाली भावुक कहानी आंध्र प्रदेश से सामने आई है। यहां की रहने वाली 94 वर्षीय बुजुर्ग महिला कोंड्रागुंटा महालक्ष्मीअम्मा (Kondragunta Mahalakshmamma) ने अपनी अमेरिकी नागरिकता (US Citizenship) को हमेशा के लिए त्याग दिया है। लगभग 26 साल सात समंदर पार अमेरिका की सुख-सुविधाओं के बीच बिताने के बाद अब इस उम्र में उनकी सिर्फ एक ही अंतिम इच्छा है—वे अपनी मातृभूमि भारत में एक सच्चे भारतीय नागरिक के रूप में अपनी अंतिम सांस लें।
अमेरिका की चकाचौंध पर भारी पड़ा वतन का मोह
आंध्र प्रदेश में जन्मीं महालक्ष्मीअम्मा के जीवन का एक लंबा हिस्सा विदेश में गुजरा। पति के आकस्मिक निधन के बाद वे अपने बेटे के पास अमेरिका चली गई थीं। वहां साल 2000 में उन्होंने आधिकारिक रूप से अमेरिकी नागरिकता ग्रहण कर ली और करीब 18 साल तक वहीं रहीं। विदेशों में तमाम सुख-सुविधाएं, बेहतरीन लाइफस्टाइल और सब कुछ होने के बाद भी उनका दिल हमेशा भारत के लिए ही धड़कता रहा। आखिरकार साल 2018 में जब उनका बेटा भारत वापस लौटा, तो वे भी उसके साथ अपनी मिट्टी में वापस आ गईं।
"कलेक्टर गरु, मेरे गांव में ही हो मेरा अंतिम संस्कार"
महालक्ष्मीअम्मा ने अपनी इस आखिरी इच्छा को कानूनी रूप देने के लिए हाल ही में आंध्र प्रदेश के बापटला जिले के कलेक्टर जे. वेंकट मुरली से मुलाकात की। कलेक्टर के सामने अपनी नागरिकता का आवेदन रखते हुए बुजुर्ग महिला बेहद भावुक हो गईं। उन्होंने भर्राए गले से कहा:
????????❤️ 'I Want To Die As An Indian': 94-Year-Old Gives Up US Citizenship
— Avinash K S???????? (@AvinashKS14) June 26, 2026
Media reports suggest the woman from Andhra Pradesh renounced her US citizenship to spend the rest of her life - and have her last rites performed -in her native village
All of them like her went there
+1 pic.twitter.com/wUFIwqKKhU
कलेक्टर ने दिया तुरंत मदद का भरोसा
बुजुर्ग महिला की इस गहरी देशभक्ति और मातृभूमि के प्रति तड़प को देखकर जिले के कलेक्टर जे. वेंकट मुरली भी दंग रह गए। उन्होंने तुरंत महालक्ष्मीअम्मा को आश्वासन दिया कि उनके नागरिकता के आवेदन को पूरी संवेदनशीलता के साथ नियमों के तहत प्रोसेस किया जाएगा और जल्द से जल्द मंजूरी के लिए इसे केंद्र सरकार (गृह मंत्रालय) को भेजा जाएगा।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई देशभक्ति की मिसाल
94 साल की उम्र में जहां लोग सफर करने से भी कतराते हैं, वहां महालक्ष्मीअम्मा की अपनी मिट्टी के लिए यह छटपटाहट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इंटरनेट पर लोग उनकी इस सच्ची देशभक्ति को सलाम कर रहे हैं। यह घटना इस बात का जीता-जागती मिसाल है कि दुनिया का कोई भी वैभव, धन-दौलत और विदेशी सुविधाएं मातृभूमि की पुकार से बढ़कर नहीं हो सकतीं। महालक्ष्मीअम्मा ने आने वाली युवा पीढ़ी को यह संदेश दिया है कि अपनी जड़ों और अपने देश से बढ़कर दुनिया में कुछ भी नहीं है।