यूपी में जिला पंचायत अध्यक्षों और ब्लॉक प्रमुखों को बड़ा झटका: हाईकोर्ट की सख्ती के बाद जुलाई में खत्म होगा कार्यकाल
लखनऊ/यूपी की राजनीति: उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था (UP Panchayat System) से जुड़े जनप्रतिनिधियों के लिए एक बहुत बड़ी और मायूस करने वाली खबर सामने आ रही है. प्रदेश में जिला पंचायत अध्यक्षों और ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल आगे बढ़ाए जाने की उम्मीदों को इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) की सख्त टिप्पणी के बाद करारा झटका लगा है. ग्राम प्रधानों को ही उनके कार्यकाल की समाप्ति के बाद 'प्रशासक' (Administrator) नियुक्त किए जाने के सरकारी फैसले पर हाईकोर्ट द्वारा तीखी नाराजगी जताए जाने के बाद सूबे का पंचायती राज विभाग अब पूरी तरह बैकफुट पर आ गया है.
जुलाई में खत्म हो रहा है जिला पंचायत अध्यक्षों और ब्लॉक प्रमुखों का सफर
इलाहाबाद हाईकोर्ट त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव (UP Panchayat Elections 2026) समय पर कराए जाने को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाए हुए है. कोर्ट की इस सख्ती का सीधा असर अब जिला पंचायत के शीर्ष पदों पर दिखने वाला है:
जिला पंचायत अध्यक्ष: प्रदेश के सभी जिला पंचायत अध्यक्षों का 5 साल का कार्यकाल आगामी 11 जुलाई 2026 को समाप्त हो रहा है.
ब्लॉक प्रमुख: इसी क्रम में विकास खंडों के ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल भी 19 जुलाई 2026 को खत्म हो जाएगा.
इससे पहले, राज्य के ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त होने वाला था, लेकिन सरकार ने चुनाव टालते हुए उन्हें ही बतौर प्रशासक काम जारी रखने का आदेश दे दिया था, जिस पर अब कानूनी पेच फंस गया है.
संविधान के विपरीत हैं सरकार के आदेश: इलाहाबाद हाईकोर्ट
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने अरविंद राठौर की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के 25 और 26 मई के उन आदेशों पर असंतोष जताया, जिसमें 'यूपी पंचायत राज अधिनियम 1947' की धारा 12(3-ए) का हवाला देकर चुनाव टालने और प्रधानों को पद पर बनाए रखने की बात कही गई थी.
कोर्ट की दो टूक टिप्पणी: संविधान के अनुच्छेद 243ई (Article 243E) के तहत पंचायतों का कार्यकाल केवल 5 वर्षों के लिए निश्चित और सीमित है. किसी भी परिस्थिति में 5 साल की अवधि खत्म होने से पहले ही अगले चुनाव संपन्न करा लिए जाने चाहिए. राज्य सरकार कोई अध्यादेश, विशेष कानून या नियमावली लाकर चुनावों को 5 साल की तय सीमा से आगे नहीं बढ़ा सकती. चूंकि सरकार के दोनों आदेश संविधान की मूल भावना के विपरीत हैं, इसलिए निवर्तमान पदाधिकारियों को प्रशासक के रूप में बने रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती.
सुनवाई के दौरान कोर्ट के संज्ञान में यह भी लाया गया कि वर्ष 2000 में 'प्रेम लाल पटेल' के ऐतिहासिक मामले में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच पहले ही इस धारा को असंवैधानिक और अनुच्छेद 243ई व 243के का उल्लंघन करार दे चुकी है.
अगली सुनवाई 13 जुलाई को, विधिक राय ले रहे हैं ओम प्रकाश राजभर
हाईकोर्ट के इस कड़े रुख के बाद पंचायती राज विभाग आगामी कानूनी लड़ाई और अगली सुनवाई में अपना पक्ष मजबूती से रखने की रणनीति तैयार कर रहा है. मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को होनी है.
उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर (Om Prakash Rajbhar) ने इस विषय पर बयान देते हुए कहा है कि विभाग इस पूरे प्रकरण पर देश के बड़े न्यायविदों से विधिक राय (Legal Advice) ले रहा है और अदालत के समक्ष सरकार का पक्ष पूरी मजबूती के साथ रखा जाएगा. हालांकि, राहत की बात यह है कि विभाग द्वारा त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की अंतिम मतदाता सूची (Final Voter List) का प्रकाशन पहले ही किया जा चुका है, जिससे साफ है कि विभाग चुनावों की जमीनी तैयारियों में जुटा हुआ है.