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July 29 2026 08:39 pm

यूपी में बिजली के स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर बड़ी राहत: अब बैलेंस खत्म होने के बाद भी नहीं कटेगी बिजली

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India News Live,Digital Desk : उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतों और बढ़ते आक्रोश के बीच यूपी पावर कॉर्पोरेशन (UPPCL) ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। नई गाइडलाइंस के तहत अब मीटर का बैलेंस 'जीरो' या 'नेगेटिव' होने पर भी तुरंत अंधेरा नहीं होगा। कॉर्पोरेशन ने 'इमरजेंसी क्रेडिट पीरियड' व्यवस्था लागू कर दी है, जिससे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।

यह नई व्यवस्था 25 अप्रैल 2026 से पूरे प्रदेश में प्रभावी हो गई है। कानपुर में केस्को (KESCO) ने भी इसे तुरंत प्रभाव से लागू करने की पुष्टि की है।

नेगेटिव बैलेंस पर राहत: 3 नई श्रेणियां तय

पावर कॉर्पोरेशन ने घरेलू श्रेणी के उपभोक्ताओं को उनके लोड (KW) के आधार पर तीन अलग-अलग स्लैब में राहत दी है:

उपभोक्ता श्रेणीराहत की अवधिमुख्य शर्त
1 किलोवाट (गरीब वर्ग)30 दिन तक बिजली नहीं कटेगीबैलेंस नेगेटिव होने के बाद भी 1 महीने की मोहलत।
2 किलोवाट (घरेलू)7 दिन तक बिजली नहीं कटेगीनेगेटिव बैलेंस 200 रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए।
1 किलोवाट से ऊपर (अन्य)3 दिन तक बिजली नहीं कटेगीरिचार्ज खत्म होने पर कम से कम 3 दिनों की गारंटीड मोहलत।

विशेष ध्यान दें: 2 किलोवाट वाले उपभोक्ताओं के मामले में यदि नेगेटिव बैलेंस 200 रुपये से ऊपर चला जाता है, तो सात दिन पूरे होने से पहले ही बिजली स्वतः (Automatically) कट जाएगी।

प्रीपेड बनाम पोस्टपेड: नियमों पर रार बरकरार

एक तरफ जहां नई व्यवस्था ने राहत दी है, वहीं नए कनेक्शनों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।

सीईए (CEA) की अधिसूचना: केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने 1 अप्रैल को एक अधिसूचना जारी कर प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता समाप्त कर दी थी। नियम के मुताबिक, उपभोक्ता तय करेगा कि उसे प्रीपेड कनेक्शन चाहिए या पोस्टपेड।

यूपी में स्थिति: उत्तर प्रदेश में अभी भी नए कनेक्शन केवल प्रीपेड मोड में ही दिए जा रहे हैं। पावर कॉर्पोरेशन ने सितंबर में जारी अपना पुराना आदेश अभी तक वापस नहीं लिया है, जिसे लेकर विद्युत नियामक आयोग में मामला सुलझने की उम्मीद है।

क्यों पड़ी इस सिस्टम की जरूरत?

पिछले कुछ महीनों में प्रदेश भर से ऐसी खबरें आ रही थीं कि रात के समय या मेहमानों के आने पर अचानक बैलेंस खत्म होने से बिजली गुल हो जाती थी। इससे न केवल आम जनता परेशान थी, बल्कि कई विधायकों ने भी ऊर्जा मंत्री को पत्र लिखकर विरोध दर्ज कराया था। उपभोक्ता संगठनों का तर्क था कि बिजली कंपनियां जबरन प्रीपेड सिस्टम थोप रही हैं, जो उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।