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July 29 2026 06:33 pm

राज्यसभा में हंगामा: आइशी घोष की गिरफ्तारी के प्रयास पर गरमाई सियासत, जेपी नड्डा बोले- 'एक्टिविस्ट बनेंगे तो जेल जाना ही पड़ेगा'

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संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को राज्यसभा में नीट पेपर लीक और दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भारी हंगामा देखने को मिला। इस दौरान सदन में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सदन के नेता व केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के बीच तीखी बहस हुई। माकपा कार्यालय में पुलिस के घुसने और जेएनयूएसयू की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष की गिरफ्तारी के प्रयास पर विपक्षी दलों ने सरकार को घेरा, जिस पर जेपी नड्डा ने कड़ा पलटवार किया।

माकपा दफ्तर में पुलिस कार्रवाई पर विवाद

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास ने दिल्ली में माकपा के केंद्रीय कार्यालय में पुलिस के घुसने और पूर्व जेएनयूएसयू अध्यक्ष आइशी घोष को गिरफ्तार करने के प्रयास का मामला उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सादे कपड़ों में आई पुलिस का मकसद हाल ही में जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन में आइशी घोष की सहभागिता को दबाना था।

इस मुद्दे पर सरकार पर हमला बोलते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि देश में लोकतंत्र खतरे में है और किसी राष्ट्रीय पार्टी के कार्यालय में इस तरह पुलिस का घुसना बेहद शर्मनाक है।

जेपी नड्डा का पलटवार: 'मैंने इमरजेंसी में दो बार जेल झेली है'

विपक्ष के हमलों का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की कार्रवाई का पुरजोर समर्थन किया। अपने छात्र जीवन के दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वे खुद एक स्टूडेंट एक्टिविस्ट रहे हैं और कांग्रेस के शासनकाल (इमरजेंसी के दौरान) में उन्हें क्लासरूम से उठाकर कई बार जेल भेजा गया था।

नड्डा ने दो टूक शब्दों में कहा:

“स्टूडेंट एक्टिविस्ट को जेल जाना पड़ता है। जब कोई कानून हाथ में लेता है, तो पुलिस को कार्रवाई करनी ही पड़ती है। इसे सनसनी मत बनाइए। अगर किसी छात्र को एक्टिविज्म करनी है, तो ये सब झेलना ही पड़ेगा। मैंने भी बहुत बार झेला है, मैं इमरजेंसी के दौरान दो बार गिरफ्तार हुआ था।”

हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही स्थगित

इस तीखी बहस और विपक्षी सांसदों द्वारा गृहमंत्री अमित शाह के बयान की मांग को लेकर हो रहे लगातार हंगामे के चलते राज्यसभा की कार्यवाही को पहले दोपहर 12 बजे तक और फिर दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। विपक्ष का आरोप है कि सरकार छात्रों की आवाज को दबाने के लिए पुलिस तंत्र का दुरुपयोग कर रही है।