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May 04 2026 08:49 pm

TMC को सुप्रीम कोर्ट में बड़ा झटका: 'किससे करानी है गिनती, यह चुनाव आयोग का विशेषाधिकार'

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India News Live,Digital Desk : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों से महज 48 घंटे पहले ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को देश की सर्वोच्च अदालत से तगड़ा झटका लगा है। मतगणना के दौरान केंद्र सरकार और PSU (सार्वजनिक उपक्रम) के कर्मचारियों की तैनाती को चुनौती देने वाली टीएमसी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि अधिकारियों का चयन करना चुनाव आयोग (ECI) का अनन्य विशेषाधिकार है।

कलकत्ता हाईकोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में दखल देने से इनकार कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी: "विकल्प खुला है"

जस्टिस पामिदिघंतम नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की विशेष पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा:

"चुनाव आयोग के पास यह विकल्प पूरी तरह खुला है कि वह मतगणना सुपरवाइजर और सहायक के तौर पर केंद्र सरकार के कर्मचारियों को चुने या राज्य सरकार के। चूंकि कानून में यह विकल्प मौजूद है, इसलिए हम यह नहीं मान सकते कि आयोग की अधिसूचना नियमों के विपरीत है।"

कपिल सिब्बल की 4 प्रमुख दलीलें

TMC की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट के सामने पार्टी का पक्ष रखते हुए आयोग की मंशा पर सवाल उठाए:

देरी से जानकारी: सिब्बल ने कहा कि जिला चुनाव अधिकारियों को नोटिस 13 अप्रैल को दिया गया, लेकिन पार्टी को इसकी भनक 29 अप्रैल को लगी।

गड़बड़ी की आशंका पर सवाल: उन्होंने पूछा कि आयोग को यह जानकारी कहां से मिली कि हर बूथ पर गड़बड़ी होगी? यह आशंका आधारहीन और चौंकाने वाली है।

दोहरे अधिकारी क्यों?: सिब्बल ने तर्क दिया कि हर मेज पर पहले से ही 'माइक्रो-ऑब्जर्वर' के तौर पर केंद्रीय कर्मचारी मौजूद हैं, तो अब सुपरवाइजर भी केंद्र का ही क्यों चाहिए?

राज्य के कर्मियों की अनदेखी: उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग अपने ही सर्कुलर का उल्लंघन कर रहा है, जिसमें राज्य सरकार के अधिकारियों को शामिल करने का प्रावधान है।

TMC का 'यू-टर्न' और चुनाव आयोग का आश्वासन

अदालत के कड़े रुख को देखते हुए टीएमसी ने अंततः अपने स्टैंड में बदलाव किया और मांग की कि कम से कम आयोग अपने ही पुराने सर्कुलर का सख्ती से पालन करे।

ECI का जवाब: आयोग की ओर से पेश वकील दामा शेषद्रि नायडू ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि 4 मई को होने वाली मतगणना के दौरान राज्य सरकार के प्रतिनिधि की मौजूदगी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि दिशानिर्देशों का अक्षरशः पालन हो रहा है और निष्पक्षता से कोई समझौता नहीं होगा।

4 मई की मतगणना पर प्रभाव

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब यह साफ हो गया है कि मतगणना केंद्रों पर केंद्र सरकार के कर्मचारियों की प्रभावी भूमिका रहेगी। भाजपा पहले ही राज्य सरकार के कर्मचारियों पर पक्षपात का आरोप लगाती रही है, जबकि टीएमसी ने इसे 'संघीय ढांचे' पर प्रहार बताया था।

अब सबकी निगाहें सोमवार (4 मई) पर टिकी हैं, जब इन सुरक्षा और प्रशासनिक इंतजामों के बीच बंगाल का असली जनादेश सामने आएगा।