June 22 2026 10:11 am

ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच एक और मोर्चा: ताइवान के पास गरजे चीनी युद्धपोत, ड्रैगन की नई चाल से दुनिया में खलबली

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India News Live,Digital Desk : दुनिया अभी ईरान और अमेरिका के बीच चल रही भीषण तनातनी और समुद्री नाकेबंदी से उबरी भी नहीं है कि सुदूर पूर्व में 'दूसरे युद्ध' की आहट सुनाई देने लगी है। चीन ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ताइवान स्ट्रेट में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाते हुए दो युद्धपोत भेज दिए हैं। ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि चीनी डिस्ट्रॉयर और फ्रिगेट पेंघु द्वीप समूह (Penghu Islands) के बेहद करीब देखे गए, जिसके बाद पूरे द्वीप पर हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।

पेंघु द्वीपों तक पहुंचा चीनी घेरा

ताइवान रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, सोमवार देर रात चीन का एक गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर और एक फ्रिगेट पेंघु द्वीपों के दक्षिण-पश्चिमी जल क्षेत्र में घुस आए। यह क्षेत्र ताइवान की मुख्य भूमि की रक्षा के लिए सुरक्षा कवच माना जाता है।

ताइवान का एक्शन: चीनी जहाजों की हरकत देखते ही ताइवानी नौसेना और वायुसेना को सक्रिय कर दिया गया। ताइवान ने इन युद्धपोतों की हवाई तस्वीरें भी जारी की हैं, जो ड्रैगन की आक्रामक मंशा को साफ दर्शाती हैं।

निगरानी तेज: ताइवानी सशस्त्र बलों ने चीनी बेड़े पर 'सख्त नजर' बनाए रखी है और उचित जवाबी कार्रवाई (Counter-measures) की बात कही है।

'न्यायसंगत' बताकर घुसपैठ जारी

चीन इस लोकतांत्रिक द्वीप को अपना अभिन्न अंग मानता है और ताइवान के चारों ओर लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों को भेजना उसकी 'डेली रूटीन' बन गया है। इस महीने की शुरुआत में चीनी रक्षा मंत्रालय ने इन घुसपैठों को 'पूरी तरह न्यायसंगत और उचित' करार दिया था। चीन का तर्क है कि तनाव के लिए ताइपे की सरकार जिम्मेदार है, जबकि ताइवान का कहना है कि उसके भविष्य का फैसला केवल वहां की जनता करेगी।

दोतरफा संकट में फंसी दुनिया

वैश्विक विशेषज्ञों का मानना है कि चीन इस समय का फायदा उठा रहा है। जब अमेरिका और उसके सहयोगी मिडिल-ईस्ट (ईरान-अमेरिका संघर्ष) और यूक्रेन में उलझे हुए हैं, तब चीन ताइवान स्ट्रेट में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।

मिडिल ईस्ट संकट: होर्मुज की नाकेबंदी से वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित है।

ताइवान तनाव: अगर यहां संघर्ष शुरू होता है, तो सेमीकंडक्टर चिप्स और वैश्विक शिपिंग का एक बड़ा हिस्सा ठप हो जाएगा।

ताइवान की सुरक्षा चिंताएं

पेंघु द्वीपों के पास चीनी युद्धपोतों की मौजूदगी इसलिए अधिक गंभीर है क्योंकि आमतौर पर ताइवान केवल विमानवाहक पोतों (Aircraft Carriers) की मूवमेंट पर विस्तृत बयान जारी करता है। विध्वंसक और फ्रिगेट के लिए जारी किए गए विशेष अलर्ट से साफ है कि चीनी बेड़ा इस बार सामान्य से अधिक करीब और आक्रामक स्थिति में था।

फिलहाल, इलाके में तनाव चरम पर है और अमेरिकी नौसेना की गतिविधियों पर भी सबकी नजर बनी हुई है। चीन के इस कदम ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific Region) में सुरक्षा समीकरणों को फिर से हिला दिया है।