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August 07 2026 06:42 pm

पानी के लिए पीएम मोदी के दरबार पहुंचे सीएम थलपति विजय: गोदावरी-कावेरी लिंक प्रोजेक्ट पर थमाई मांगों की लिस्ट, तमिलनाडु के जल संकट पर बड़ा कदम

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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभालने के बाद अभिनेता से राजनेता बने थलपति विजय ने राज्य के सबसे बड़े मुद्दे यानी पानी की किल्लत को लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बड़ा राजनीतिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विजय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विशेष रूप से मिलने पहुंचे और उनके सामने दक्षिण भारत के गंभीर जल संकट का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। इस दौरान उन्होंने पीएम मोदी को एक विस्तृत पत्र सौंपते हुए गोदावरी-कावेरी-वैगई-गुंडार नदी जोड़ो परियोजना को तेजी से लागू करने की मांग की है।

पानी की भारी कमी और पड़ोसी राज्यों पर निर्भरता

प्रधानमंत्री को सौंपी गई मांगों की सूची में सीएम विजय ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि तमिलनाडु में सतही जल की स्वाभाविक कमी है और राज्य अपनी पीने के पानी की 30 प्रतिशत से अधिक जरूरतों के लिए पड़ोसी राज्यों पर निर्भर है। उन्होंने बताया कि राज्य के कई दक्षिणी जिले जैसे पुदुकोट्टई, शिवगंगा, रामनाथपुरम और विरुधुनगर भयंकर सूखे और पानी की कमी का सामना कर रहे हैं। भूजल स्तर खतरनाक रूप से नीचे गिरने के कारण स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है, जिसे सुधारने के लिए केंद्र सरकार के सीधे हस्तक्षेप की आवश्यकता है।

नदी जोड़ो परियोजना को राष्ट्रीय महत्व का दर्जा देने की मांग

मुख्यमंत्री विजय ने प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया है कि गोदावरी-कावेरी लिंक प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द 'राष्ट्रीय महत्व की परियोजना' घोषित किया जाए। उनका कहना है कि बाढ़ के पानी को पानी की कमी वाले बेसिन तक पहुंचाने वाली यह परियोजना ही दक्षिण भारत के जल संकट का एकमात्र स्थायी समाधान है। इसके अलावा, उन्होंने जल शक्ति मंत्रालय और राष्ट्रीय जल विकास एजेंसी (NWDA) को निर्देश देने की मांग की है ताकि सभी संबंधित राज्यों के बीच आम सहमति बनाकर इस प्रोजेक्ट को फास्ट-ट्रैक बेसिस पर पूरा किया जा सके।

राजनीतिक हलचल और केंद्र से सहयोग की उम्मीद

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तमिलनाडु और पड़ोसी राज्यों के बीच चल रहे कावेरी जल विवाद और मेकेदातु प्रोजेक्ट के विरोध के बीच सीएम विजय का यह कदम राज्य के हितों की रक्षा के लिए एक बड़ा रणनीतिक दांव है। विजय ने केंद्र सरकार को भरोसा दिलाया है कि इस परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए तमिलनाडु सरकार प्रशासनिक स्तर पर हरसंभव सहयोग करने को पूरी तरह तैयार है। अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार इस मांग पर क्या ठोस कदम उठाती है, जिससे दक्षिण भारत के करोड़ों लोगों को पेयजल संकट से बड़ी राहत मिल सके।