मालदीव में 'प्रेस की आजादी' पर संकट: राष्ट्रपति के 'अफेयर' की खबर दिखाने पर मीडिया हाउस पर छापा
India News Live,Digital Desk : भारत के पड़ोसी देश मालदीव से प्रेस की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों को लेकर एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के कथित निजी संबंधों (Extramarital Affair) पर एक डॉक्यूमेंट्री दिखाने वाले प्रमुख मीडिया आउटलेट 'अधधु ऑनलाइन' (Adhadhu Online) के खिलाफ वहां की पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है। पुलिस ने न केवल मीडिया हाउस के दफ्तरों पर छापेमारी की, बल्कि उसके संपादकों के खिलाफ 'लुकआउट' नोटिस जारी कर उनके देश छोड़ने पर भी पाबंदी लगा दी है।
क्या है पूरा मामला? (डॉक्यूमेंट्री 'आयशा' का विवाद)
विवाद की जड़ 28 मार्च को सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई एक डॉक्यूमेंट्री है, जिसका शीर्षक 'आयशा' है। इस डॉक्यूमेंट्री में एक 22 वर्षीय महिला का इंटरव्यू दिखाया गया था, जिसने अपनी पहचान गुप्त रखते हुए राष्ट्रपति मुइज्जू पर गंभीर आरोप लगाए थे:
शारीरिक संबंध का दावा: महिला, जो एक सिंगल मदर है, उसने दावा किया कि जब वह राष्ट्रपति कार्यालय में प्रशासक के रूप में काम कर रही थी, तब 47 वर्षीय विवाहित राष्ट्रपति के साथ उसके शारीरिक संबंध शुरू हुए।
राजनीतिक समय: यह डॉक्यूमेंट्री मालदीव में एक महत्वपूर्ण संवैधानिक जनमत संग्रह से ठीक पहले जारी की गई थी, जिसने राष्ट्रपति की छवि को काफी नुकसान पहुंचाया।
पुलिसिया कार्रवाई और सरकार का बचाव
सोमवार देर रात मालदीव पुलिस ने 'अधधु ऑनलाइन' के दफ्तर पर धावा बोला। इस दौरान पुलिस ने पत्रकारों के लैपटॉप और स्टोरेज डिवाइस जब्त कर लिए।
सरकार का तर्क: गृह सुरक्षा मंत्री अली इहसान ने इस कार्रवाई को जायज ठहराते हुए कहा कि प्रेस की आजादी का मतलब यह नहीं है कि किसी की प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए झूठ फैलाया जाए।
राष्ट्रपति का रुख: राष्ट्रपति मुइज्जू ने इन आरोपों को "पूरी तरह बेबुनियाद और झूठा" करार देते हुए संबंधित अधिकारियों को अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
प्रेस की आजादी पर उठते सवाल
मालदीव में मीडिया संगठनों और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार निकायों ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। आलोचकों का कहना है कि मुइज्जू सरकार आलोचना को दबाने के लिए पुलिस का सहारा ले रही है।
विवादास्पद मीडिया कानून: पिछले साल सितंबर में मालदीव में एक नया मीडिया कानून पारित हुआ था, जिसके तहत एक सरकारी आयोग बनाया गया है। इस आयोग के पास किसी भी मीडिया आउटलेट पर भारी जुर्माना लगाने या उसे बंद करने का असीमित अधिकार है।
लोकतांत्रिक संतुलन: 4 अप्रैल को हुए जनमत संग्रह में मालदीव की जनता ने मुइज्जू के एक प्रस्ताव को 69% बहुमत से खारिज कर दिया था। जानकारों का मानना है कि जनादेश खोने की बौखलाहट में सरकार अब मीडिया को निशाना बना रही है।
मालदीव की वर्तमान स्थिति
मालदीव एक सुन्नी मुस्लिम बहुल देश है जहाँ इस्लामी कानून और सामाजिक मर्यादाओं का बहुत महत्व है। ऐसे में राष्ट्रपति पर व्यभिचार (Adultery) के आरोप लगना उनके राजनीतिक करियर के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है। फिलहाल, मीडिया हाउस के संपादकों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है और मालदीव में प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता जताई जा रही है।