यूपी में स्मार्ट मीटर पर फिर भड़का गुस्सा: ज्यादा बिल और रोक के बाद भी बांटे गए लाखों नए कनेक्शन, जानें सीएम योगी तक पहुंचे इस बड़े विवाद का सच
उत्तर प्रदेश में बिजली के प्रीपेड स्मार्ट मीटरों को लेकर एक बार फिर बड़ा आंदोलन छिड़ने की संभावना बन रही है। राज्य में लगातार बढ़ रही ज्यादा बिजली बिल की शिकायतों ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। सबसे बड़ी बात यह है कि शासन स्तर से रोक लगाए जाने के बावजूद नए बिजली कनेक्शनों में धड़ल्ले से स्मार्ट मीटर ही लगाए जा रहे हैं।
गुणवत्ता रिपोर्ट अब तक गायब, फिर भी बांटे जा रहे मीटर
केंद्र सरकार की 'आरडीएसएस' (RDSS) योजना के तहत पुराने मीटरों को स्मार्ट प्रीपेड मीटरों से बदला जा रहा था। हालांकि, तेज चलने और तकनीकी खामियों की शिकायतों के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इनकी गुणवत्ता जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने प्रीपेड व्यवस्था पर रोक लगा दी थी। हैरानी की बात यह है कि जांच रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं की गई, लेकिन इसके बावजूद अब तक लाखों नए कनेक्शन इन्हीं विवादास्पद स्मार्ट मीटरों से दे दिए गए हैं।
नियामक आयोग के आदेशों की अनदेखी
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा के अनुसार, नियामक आयोग ने साफ निर्देश दिए थे कि आरडीएसएस के तहत आए मीटरों का उपयोग केवल पुराने मीटर बदलने के लिए होगा, नए कनेक्शनों के लिए नहीं। यदि नए कनेक्शन देने हैं तो नए प्रमाणित मीटर खरीदे जाएं। इसके बावजूद पावर कॉरपोरेशन पुराने स्टॉक के मीटरों से ही नए कनेक्शन जारी कर रहा है।
सीएम योगी से हस्तक्षेप और कड़ी कार्रवाई की मांग
स्मार्ट मीटरों से आ रहे भारी-भरकम बिलों के कारण आम जनता परेशान है। उपभोक्ता परिषद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस पूरी योजना की उच्चस्तरीय समीक्षा करने और इसे तत्काल बंद करने की मांग की है। साथ ही, ओवर-बिलिंग के लिए जिम्मेदार कंपनियों और अधिकारियों पर कागजी नहीं, बल्कि धरातल पर कठोर कार्रवाई करने की अपील की गई है। इस मामले में जल्द ही नियामक आयोग से भी दोबारा हस्तक्षेप की मांग की जाएगी।