BREAKING:
July 29 2026 12:18 am

राम मंदिर दान चोरी मामले में नई SIT के सामने 7 अनसुलझे सवाल; आज सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी स्टेटस रिपोर्ट

Post

अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान चोरी का हाई-प्रोफाइल मामला अब जांच के दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस पूरे प्रकरण की नए सिरे से निष्पक्ष जांच के लिए एक नई विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है। सोमवार को सरकार सुप्रीम कोर्ट के समक्ष नई एसआईटी के गठन की जानकारी और मामले की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट पहली एसआईटी की कार्रवाई से संतुष्ट होता, तो नई टीम के गठन का निर्देश न देता। ऐसे में पुलिस और पहली जांच टीम के एक महीने के प्रयास के बाद भी अनुत्तरित रहे कई गहरे रहस्यों से पर्दा उठाना नई एसआईटी के लिए किसी 'अग्निपरीक्षा' से कम नहीं होगा।

IG किरण एस के नेतृत्व में नई SIT का गठन

नई गठित एसआईटी की कमान आईजी लखनऊ रेंज किरण एस (IG Kiran S) को सौंपी गई है। इस टीम में अयोध्या रेंज के डीआईजी सोमेन वर्मा और एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर को भी शामिल किया गया है। चूंकि ये तीनों वरिष्ठ अधिकारी पहले से ही जांच प्रक्रिया से जुड़े रहे हैं, इसलिए उन्हें पूरे घटनाक्रम की गहरी और सटीक जानकारी है।

जांच पर उठते सवाल और पुलिस की ढिलाई

मामले की समानांतर विवेचना कर रही पुलिस और एसआईटी की प्राथमिक जांच अब तक सामने आए केवल 8 आरोपियों से आगे नहीं बढ़ पाई है:

किसी नए आरोपी की गिरफ्तारी नहीं: पूरे प्रकरण में अभी तक कोई नई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

बैंक कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं: बैंक प्रबंधन की सीधी जवाबदेही होने के बावजूद पुलिस ने किसी भी बैंक कर्मचारी को आरोपी नहीं बनाया है।

अनिल मिश्र, चंपत राय और गोपाल राव पर सवाल: एसआईटी अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में अनिल मिश्र की भूमिका पर सवाल खड़े कर चुकी है। वहीं ट्रस्ट से जुड़े चंपत राय और गोपाल राव को लेकर जनता में उठ रहे प्रशासनिक लापरवाही व संलिप्तता के सवाल अब भी अनुत्तरित हैं।

सफेदपोश और मददगार पकड़ से दूर: सीसीटीवी कैमरों की निगरानी करने वाले, चोरी के आभूषण खरीदने वाले और चोरी की रकम का इस्तेमाल करने वाले कथित 'सफेदपोशों' से केवल पूछताछ की गई है, वे अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर हैं।

नई SIT के सामने 7 सबसे बड़े अनसुलझे सवाल

कुल कितनी रकम की हुई चोरी?

4 जून को गणना कक्ष से सटे बाथरूम से करीब ₹2.25 लाख बरामद होने पर मामला उजागर हुआ था। इसे महज एक दिन की चोरी बताया गया था। इसके बाद लाखों और करोड़ों रुपये तथा गायब आभूषणों को लेकर अलग-अलग दावे आए, लेकिन आज तक किसी एजेंसी ने चोरी की वास्तविक कुल राशि स्पष्ट नहीं की। जब तक सटीक राशि का पता नहीं चलेगा, तब तक यह जानना नामुमकिन है कि पैसा कहां-कहां पहुंचा।

क्या अकेले 'टिन्नू' चला रहा था पूरा गैंग?

जांच में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू को मास्टरमाइंड माना जा रहा है, लेकिन सवाल यह है कि क्या वह अकेले इतना बड़ा खेल चला सकता था? उसे हुंडियों की चाबियां रखने की अनुमति किसने दी? भतीजे मनीष यादव और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति में किसकी भूमिका थी? और बैंक कर्मियों से उसके रिश्तों का असली सच क्या है?

बैंक कर्मियों की जवाबदेही तय क्यों नहीं हुई?

सुरक्षा मानकों के घोर उल्लंघन के बावजूद किसी बैंक कर्मचारी को आरोपी नहीं बनाया गया। गणना कर्मियों के लिए तय वर्दी न होना, गणना के समय बैंक प्रतिनिधि का न रहना और कर्मचारियों के रोटेशन की व्यवस्था लागू न होना जैसी गंभीर लापरप्रवाहियों का जिम्मेदार आखिर कौन है?

CCTV सब देखता रहा, निगरानी करने वाले क्यों चूके?

गणना कक्ष में सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बाद भी लगातार चोरी होती रही। फुटेज की निगरानी करने की जिम्मेदारी किस अधिकारी की थी और चोरी पकड़ी क्यों नहीं गई?

चंपत राय, अनिल मिश्र और गोपाल राव की भूमिका क्या है?

ट्रस्ट पदाधिकारियों की भूमिका पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। पुलिस ने अभी तक स्पष्ट नहीं किया है कि इनके खिलाफ प्रत्यक्ष संलिप्तता के सबूत मिले हैं या केवल प्रशासनिक लापरवाही की जांच हो रही है।

फर्जी चंदा रसीदों का सच क्या है?

जांच के दौरान चर्चा में आई फर्जी चंदा रसीदों के इस्तेमाल और उनके अस्तित्व को लेकर जांच टीम ने अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया है।

कहाँ-कहाँ पहुँचा चोरी का रुपया?

चुराए गए पैसों का इस्तेमाल किन-किन जगहों पर हुआ? क्या यह पैसा केवल आरोपियों तक सीमित था या अन्य सफेदपोशों तक भी पहुँचा? यह रहस्य भी अभी सुलझना बाकी है।